हिमाचल प्रदेश में अपराध के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता: तीन साल में हत्या के 309 और दुष्कर्म के 1,287 मामले दर्ज, विधानसभा में सरकार ने पेश किए आंकड़े हिमाचल प्रदेश एक घंटा पहले 6
हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर विधानसभा में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए गए हैं, जिसमें महिलाओं के खिलाफ अपराध और चोरी-अपहरण की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी देखी गई है।

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य में पिछले तीन साल के भीतर दर्ज हुए आपराधिक मामलों के आंकड़े काफी डरावने हैं। विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान खुद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस संबंध में लिखित जानकारी साझा की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 36 महीनों में राज्य में दुष्कर्म के कुल 1,287 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से केवल 66 मामलों में ही दोषियों को सजा मिल पाई है, जबकि एक बड़ी संख्या में मामले अभी भी अदालती कार्यवाही के चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं।

हत्या और अपहरण के मामलों में तेजी से इजाफा

भाजपा विधायक दीप राज द्वारा करसोग क्षेत्र के संदर्भ में पूछे गए एक लिखित सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि हिमाचल प्रदेश में 31 जुलाई 2026 तक पिछले तीन सालों में गंभीर अपराधों के कुल 5,773 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों का विस्तृत विवरण इस प्रकार है:

  • चोरी: राज्य भर में चोरी के सबसे अधिक 3,481 मामले दर्ज किए गए।
  • अपहरण: अपहरण के मामलों की संख्या भी बेहद चिंताजनक रही, जो 1,970 दर्ज की गई।
  • हत्या: इस अवधि के दौरान राज्य में हत्या के कुल 309 मामले सामने आए हैं।
  • डकैती: पहाड़ी राज्य में डकैती के कुल 13 मामले दर्ज किए गए हैं।

इन मामलों में कानूनी कार्रवाई और अदालती फैसलों की गति काफी धीमी रही है। हत्या के कुल 309 मामलों में से अब तक केवल 5 मामलों में ही आरोपियों को दोषी ठहराया जा सका है, जबकि 6 मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया गया। इसके अलावा, हत्या के 233 मामले अभी भी विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं।

देवभूमि में महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़े

खुद को देवभूमि कहने वाले हिमाचल प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन साल के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4,379 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के गंभीर अपराध शामिल हैं:

  • दुष्कर्म (रेप): महिलाओं के साथ दुष्कर्म के कुल 1,287 मामले सामने आए।
  • शोषण: महिलाओं के शोषण के सबसे अधिक 1,915 मामले दर्ज किए गए।
  • उत्पीड़न: घरेलू और सामाजिक उत्पीड़न के 646 मामले सामने आए।
  • छेड़छाड़: राह चलती महिलाओं और युवतियों से छेड़छाड़ के 435 मामले दर्ज किए गए।
  • महिलाओं की हत्या: इस अवधि में 96 महिलाओं की हत्या के मामले भी दर्ज हुए हैं।

न्यायिक प्रक्रिया की बात करें तो दुष्कर्म के दर्ज 1,287 मामलों में से सिर्फ 66 मामलों में आरोपियों को सजा मिली है, जबकि 219 मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया गया है। इसके अलावा, 775 मामले अब भी अदालतों में पेंडिंग यानी लंबित हैं, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी हो रही है।

शिमला और मंडी जिलों में सबसे ज्यादा क्राइम

अगर जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें, तो राज्य की राजधानी शिमला और मंडी जिला अपराध के मामलों में सबसे आगे रहे हैं।

  • हत्या और चोरी: राज्य में हत्या के सबसे ज्यादा मामले शिमला जिले में सामने आए, जहां इस अवधि में 50 लोगों की जान ली गई। इसके साथ ही चोरी की वारदातों में भी शिमला अव्वल रहा, जहां 455 मामले दर्ज किए गए।
  • दुष्कर्म: महिलाओं के खिलाफ दुष्कर्म के सबसे अधिक मामले मंडी जिले में दर्ज हुए, जिनकी संख्या 187 रही। इसके बाद शिमला और सिरमौर जिले दूसरे स्थान पर रहे, जहां दोनों ही जिलों में 168-168 दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए हैं।

बहुउद्देशीय कर्मचारियों और ओबीसी आरक्षण पर बड़ा फैसला

इस सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कांग्रेस विधायक आर.एस. बाली के एक सवाल का जवाब देते हुए राज्य सरकार की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों में कार्यरत बहुउद्देशीय कर्मचारियों (मल्टीपर्पज वर्कर्स) के लिए जल्द ही एक समान नीति तैयार करेगी। वर्तमान में, विभिन्न विभागों ने अपनी जरूरत और नियमों के हिसाब से इन कर्मचारियों की भर्ती की है, जिसके कारण उनकी सेवा शर्तें और मानदेय अलग-अलग हैं। सरकार इस विसंगति को दूर कर सभी के लिए एक समान मानदेय लागू करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। इससे कर्मचारियों के मानदेय में एकरूपता आएगी।

इसके अतिरिक्त, मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के लिए भी सुक्खू ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि साल 2027 में होने वाली जनगणना के नए आंकड़े जारी होने के बाद, राज्य सरकार ओबीसी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए MBBS की सीटें बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करेगी। इससे राज्य के ओबीसी वर्ग के छात्रों को मेडिकल की पढ़ाई में अधिक अवसर मिल सकेंगे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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