हिमाचल प्रदेश में मॉनसून का असर: 298 लोगों की मौत और 1683 करोड़ का नुकसान, जानें अगले 5 दिन का मौसम हिमाचल प्रदेश एक घंटा पहले 4
हिमाचल प्रदेश में इस मॉनसून सीजन के दौरान जान-माल का बड़ा नुकसान हुआ है, हालांकि पिछले तीन वर्षों की तुलना में तबाही का स्तर कम रहा है। प्रदेश में मॉनसून अब विदाई की ओर है और अगले 5 दिनों तक मौसम की स्थिति सामान्य रहने के आसार हैं।

हिमाचल में मॉनसून का विदाई दौर

हिमाचल प्रदेश में मॉनसून अब अपने अंतिम चरण में है और अगले करीब 10 दिनों के भीतर इसके पूरी तरह विदा होने की संभावना है। राज्य में इस बार मॉनसून सीजन काफी चुनौतीपूर्ण रहा है, जिसमें प्राकृतिक आपदाओं और सड़क दुर्घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक कुल 298 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। इसके अलावा 4 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। पशु-पक्षियों के नुकसान की बात करें तो 521 की मौत की सूचना है। मौसम विभाग ने 19 सितंबर तक राज्य में बारिश का सिलसिला बने रहने की भविष्यवाणी की है, हालांकि इसके बाद राहत मिलने की उम्मीद है।

बीते तीन वर्षों के मुकाबले कम नुकसान

हिमाचल प्रदेश में मॉनसून के दौरान हुई बारिश और आपदाओं से अब तक करीब 1683 करोड़ रुपये की सरकारी और निजी संपत्ति का नुकसान हुआ है। राहत की बात यह है कि साल 2023 और 2024 के मुकाबले इस बार नुकसान का आंकड़ा काफी कम है। उन दो वर्षों में राज्य को करीब 10 हजार करोड़ रुपये की क्षति हुई थी। मौसम विभाग के अनुसार, अभी भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में छिटपुट बारिश जारी रह सकती है। शिमला स्थित मौसम केंद्र ने हाल ही में चंबा, कांगड़ा, मंडी, ऊना और हमीरपुर जैसे जिलों के लिए मध्यम बारिश का अलर्ट जारी किया था। इसके अलावा सिरमौर, बिलासपुर और सोलन के कुछ इलाकों में भी हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। फिलहाल 19 सितंबर तक किसी बड़े भारी बारिश के अलर्ट की चेतावनी नहीं दी गई है।

संपत्ति और बुनियादी ढांचे को पहुंची क्षति

मॉनसून की मार केवल जान-माल तक सीमित नहीं रही है, बल्कि प्रदेश के रिहायशी ढांचे को भी भारी नुकसान हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, 40 पक्के और 89 कच्चे मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। वहीं, 155 पक्के और 347 कच्चे मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। पशुपालकों के लिए बड़ी समस्या यह है कि करीब 470 गौशालाएं पूरी तरह जमींदोज हो गई हैं। बुनियादी ढांचे की बात करें तो लोक निर्माण विभाग को सर्वाधिक 1231 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है, जबकि जल शक्ति विभाग को 368 करोड़ रुपये से ज्यादा का आर्थिक झटका लगा है। प्रदेश में अभी भी 63 सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बंद हैं। बिजली आपूर्ति की 21 परियोजनाएं और जलापूर्ति की 2 परियोजनाएं भी आपदा के कारण प्रभावित हुई हैं।

सड़कों की मरम्मत और भविष्य की कार्ययोजना

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार करते हुए बताया कि सरकार क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की बहाली के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि करीब 800 किलोमीटर सड़कों को ठीक करने के लिए बजट का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है। बारिश का दौर पूरी तरह थमने के बाद, अक्टूबर महीने से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सड़कों की मेटलिंग और सुधार कार्य तेज कर दिया जाएगा। मंत्री के अनुसार, लगभग 350 किलोमीटर सड़कों पर विभिन्न जोन में काम शुरू होगा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण पूर्व में प्रभावित हुए सड़क कार्यों को भी अक्टूबर और नवंबर के महीनों में प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

शिमला में यातायात का सुदृढ़ीकरण

राजधानी शिमला में ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए लोक निर्माण मंत्री ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। कार्ट रोड के चौड़ीकरण की प्रक्रिया पर काम आगे बढ़ चुका है। इसके लिए निर्धारित सरकारी नीति के तहत भूमि अधिग्रहण किया जाएगा और प्रभावित जमीन मालिकों को सर्किल रेट के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, शिमला शहर में ट्रैफिक के बोझ को कम करने के लिए दो नई सुरंगों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें से एक सुरंग की परियोजना को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। ये सुरंगें शहर के अलग-अलग क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी, जिससे मुख्य शहर के व्यस्त मार्गों पर भीड़ कम हो सकेगी।

हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती आपदाओं पर गंभीर चिंता

हिमालयी राज्यों में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर विक्रमादित्य सिंह ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ-साथ चीन और नेपाल से सटे हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती निर्माण गतिविधियों और जलविद्युत परियोजनाओं के कारण पर्यावरण पर दबाव बढ़ रहा है। हाल के दिनों में इन क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदाओं का हवाला देते हुए उन्होंने जोर दिया कि इस पूरे हिमालयी क्षेत्र को लेकर एक विस्तृत संवाद और रणनीति की जरूरत है। यह मुद्दा किसी एक राज्य या देश तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के अस्तित्व से जुड़ा है। आपदा प्रबंधन के लिए पड़ोसी देशों के साथ बेहतर समन्वय और सूचनाओं का आदान-प्रदान करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन अब एक विकराल चुनौती का रूप ले चुका है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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