विमल नेगी केस: CBI चार्जशीट में बड़े खुलासे, तत्कालीन एमडी मीणा बताए गए साजिश के मुख्य सूत्रधार हिमाचल प्रदेश एक घंटा पहले 1
एचपीपीसीएल के चीफ इंजीनियर विमल नेगी मामले में सीबीआई ने शिमला की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें तत्कालीन एमडी हरिकेश मीणा और निदेशक देशराज पर प्रताड़ना तथा एएसआई पंकज शर्मा पर सबूत मिटाने के आरोप हैं।

हिमाचल प्रदेश के चर्चित हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के चीफ इंजीनियर विमल नेगी मामले में अब एक अहम मोड़ आया है। सीबीआई ने शिमला की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें कई गंभीर बातें सामने आई हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि विभाग के अधिकारियों की लगातार प्रताड़ना से तंग आकर ही नेगी ने अपनी जान दी।

मीणा बताए गए साजिश के मुख्य सूत्रधार

सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, तत्कालीन एमडी हरिकेश मीणा इस पूरी साजिश के मुख्य सूत्रधार रहे। चार्जशीट में कहा गया है कि वे चाहते थे कि काम अधूरा रहने के बावजूद ठेकेदार को 16.29 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया जाए।

इस प्रताड़ना की जड़ में ऊना स्थित 32 मेगावाट की पेखुबेला सौर ऊर्जा परियोजना से जुड़ा बड़ा खेल बताया गया है, जिसकी लागत 220 करोड़ रुपये थी। रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन जीएम मोहिंदर कुमार चोपड़ा ने नियमों का हवाला देते हुए इस भुगतान को रोकने की कोशिश की थी। हालांकि एमडी मीणा ने उन्हें पद से हटा दिया और इसके बाद विमल नेगी की तैनाती की गई।

जून 2024 में एमडी मीणा और निदेशक देशराज ने फील्ड अधिकारियों के सामने नेगी पर बैकडेट में कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने का दबाव बनाया। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि नेगी ने किसी निजी कारण से नहीं, बल्कि अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की अत्यधिक प्रताड़ना से परेशान होकर जान दी।

एएसआई पर पेनड्राइव फॉर्मेट करने का आरोप

सीबीआई ने इस मामले में हिमाचल पुलिस के एएसआई पंकज शर्मा को सह-आरोपी बनाया है। उन पर मुख्य आरोपियों को बचाने और डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने का गंभीर आरोप लगाया गया है।

चार्जशीट के अनुसार, विमल नेगी के शव से जो पेन ड्राइव बरामद हुई थी, उसे एएसआई पंकज ने अपने कब्जे में लेकर फॉर्मेट कर दिया। इसके बाद घटना से जुड़े अहम वीडियो और तस्वीरें रिकॉर्ड में हेरफेर के इरादे से कुछ चुनिंदा मोबाइल नंबरों पर साझा की गईं।

‘तुम गधे हो...’ — चेंबर में घंटों खड़ा रखने का आरोप

चार्जशीट के पेज नंबर 16, 29, 30 और 31-33 के अनुसार, विमल नेगी को पूरी तरह तोड़ने में निदेशक देशराज की सबसे क्रूर भूमिका रही। बताया गया है कि देशराज हर दिन नेगी को अपने चेंबर में 8 से 10 बार बुलाते थे और बिना किसी ठोस वजह के घंटों खड़ा रखते थे।

देशराज ने प्रताड़ना के दौरान नेगी से कहा था कि “तुम गधे हो, तुम्हारा दिमाग नहीं है, तुम्हारी फौज गधों की फौज है, तुम मूर्ख हो…।” 3 मार्च 2025 को नेगी की तबीयत इतनी बिगड़ गई थी कि वे खड़े तक नहीं हो पा रहे थे। वे अस्पताल भी गए, लेकिन देशराज ने शाम को उन्हें जबरन दफ्तर बुलाकर प्रोजेक्ट फाइल पर जबरदस्ती हस्ताक्षर करवाए। जब नेगी ने आकस्मिक छुट्टी ली, तो उन्हें परेशान करने के लिए झूठे आधार पर कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया।

वीआरएस लेना चाहते थे नेगी

चार्जशीट के मुताबिक, अपमान और प्रताड़ना से इस कदर परेशान हो चुके विमल नेगी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने का मन बना लिया था। उन्होंने अपनी पत्नी को बताया था कि एमडी इतना क्रूर है कि वह उनके वीआरएस लेने में भी अड़ंगा डाल देगा और नौकरी छोड़ने के बाद भी चैन से जीने नहीं देगा।

लापता होने के बाद झील में मिली थी लाश

10 मार्च 2025 को विमल नेगी संदिग्ध हालात में शिमला से लापता हो गए थे और 18 मार्च को बिलासपुर की गोविंद सागर झील से उनका शव बरामद हुआ। मामले ने काफी तूल पकड़ा, जिसके बाद हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी।

इस केस में तत्कालीन निदेशक देश राज को निलंबित किया गया था, जबकि एमडी हरिकेश मीणा को भी जांच पूरी होने तक पद से हटा दिया गया था। दोनों ही केस में आरोपी हैं। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में भी हो चुकी है।

भाजपा ने उठाए सवाल

भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई के महासचिव संजीव कटवाल ने कहा कि सीबीआई ने फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने, सरकारी रिकॉर्ड में गड़बड़ी करने और नियमों का उल्लंघन कर फैसले लेने जैसे जो आरोप लगाए हैं, वे प्रशासन की ईमानदारी और भरोसे पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता ने कहा कि नेगी का मामला सिर्फ एक व्यक्ति से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और अच्छे शासन का सवाल है। कटवाल ने कहा कि अगर किसी परियोजना की असली स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड में अंतर के बावजूद प्रमाणपत्र जारी किए गए, अधिकारियों पर दबाव डाला गया और आपत्ति करने वालों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसमें पूरी पारदर्शिता जरूरी है।

उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों को यह जानने का हक है कि ऐसी गतिविधियां किसके संरक्षण में चल रही थीं। कटवाल के मुताबिक, अगर जांच में यह सामने आता है कि कुछ लोगों या संस्थाओं को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की गई, तो कांग्रेस सरकार को बताना चाहिए कि आरोपों की गंभीरता के बावजूद समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी को दबाव में काम करने को मजबूर करना, आपत्तियों को नजरअंदाज करना और संस्थागत प्रक्रिया को कमजोर करना प्रशासन की बड़ी नाकामी है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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