बाज़ार
2 घंटे पहले
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बाजार में दिन भर रहा असमंजस का माहौल
शुक्रवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। निवेशकों ने पूरे दिन एक दुविधा वाली स्थिति देखी, जिसमें बाजार कभी मजबूती के संकेत दे रहा था तो कभी बिकवाली की चपेट में आता दिखाई दिया। सत्र के समापन पर सेंसेक्स और निफ्टी बिना किसी बड़े बदलाव के लगभग सपाट स्तरों पर बंद हुए। हालांकि आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में कमजोरी रही, लेकिन मेटल और चुनिंदा फाइनेंशियल स्टॉक्स की बदौलत बाजार को जरूरी सपोर्ट मिला और यह किसी बड़ी गिरावट से बच गया।
सेंसेक्स और निफ्टी की क्लोजिंग
कारोबार के अंत में BSE Sensex महज 3.11 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,540.83 के स्तर पर स्थिर रहा। यह बढ़त प्रतिशत में 0.00 फीसदी रही। वहीं NSE Nifty ने भी कुछ ऐसा ही प्रदर्शन करते हुए 20.15 अंकों की मामूली तेजी दर्ज की और अंत में 24,252.00 के स्तर पर जाकर बंद हुआ। पूरे सत्र के दौरान बाजार एक तय दायरे में ही घूमता नजर आया, जिससे यह स्पष्ट था कि निवेशकों में किसी बड़ी हलचल के लिए फिलहाल उत्साह की कमी है।
मेटल और रियल्टी स्टॉक्स में दिखा जोश
बाजार की गिरावट को थामने का काम मेटल और रियल्टी सेक्टर के शेयरों ने किया, जिनमें निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। इनके अलावा स्मॉल कैप शेयरों और कुछ फाइनेंशियल स्टॉक्स में भी मजबूती दिखी, जिसने इंडेक्स को सहारा दिया। निफ्टी के टॉप गेनर्स की बात करें तो पावर ग्रिड कॉर्प, HDFC लाइफ, नेस्ले, कोटक महिंद्रा बैंक और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स प्रमुख रहे।
आईटी और ऑटो सेक्टर में रही सुस्ती
बाजार पर सबसे अधिक दबाव आईटी और ऑटो सेक्टर की ओर से आया। इंफोसिस और एचसीएल टेक जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। ऑटो सेक्टर में भी रुझान कमजोर रहा, जिसमें मारुति सुजुकि के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त, ट्रेंट और इंटरग्लोब एविएशन जैसे शेयरों ने भी बाजार के प्रदर्शन को प्रभावित किया। एफएमसीजी, मीडिया और फार्मा सेक्टर में भी बिकवाली का माहौल रहा।
स्मॉल कैप शेयरों में रही रौनक
व्यापक सूचकांकों के नजरिए से देखें तो मिडकैप इंडेक्स सपाट रुख के साथ बंद हुआ, जबकि स्मॉल कैप इंडेक्स ने 0.7 फीसदी की तेजी दर्ज की। यह संकेत देता है कि बड़े शेयरों में निवेश करने के बजाय निवेशकों की रुचि छोटे शेयरों में अधिक थी।
वैश्विक चिंताओं का बाजार पर असर
बाजार की इस सुस्त रफ्तार के पीछे वैश्विक स्तर पर बढ़ रही चिंताएं प्रमुख रहीं। मिडिल ईस्ट में तनावपूर्ण हालात, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड मार्केट में अस्थिरता का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखा। इन वैश्विक परिस्थितियों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिसके चलते वे बाजार में बड़े जोखिम लेने से परहेज कर रहे हैं।
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