इंडेक्स फंड या एक्टिव फंड: 10 साल में ₹1 लाख का निवेश कहां बना सबसे ज्यादा मुनाफा? व्यापार एक घंटा पहले 2
म्युचुअल फंड निवेश में लंबे समय से बहस छिड़ी है कि इंडेक्स फंड बेहतर है या एक्टिव फंड। जानिए 10 वर्षों के आंकड़ों के आधार पर किसमें निवेश करने पर आपको अधिक लाभ मिला।

इंडेक्स बनाम एक्टिव फंड: कौन सा विकल्प रहा बेहतर

म्युचुअल फंड की दुनिया में हमेशा यह सवाल बना रहता है कि क्या इंडेक्स फंड में पैसा लगाना सही है या किसी फंड मैनेजर के प्रबंधन वाला एक्टिव फंड बेहतर रिटर्न दे सकता है। अगर हम पिछले 10 वर्षों के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो पता चलता है कि सही चुनाव करने पर एक्टिव फंड ने इंडेक्स फंड की तुलना में काफी अधिक लाभ प्रदान किया है, लेकिन गलत फंड का चुनाव नुकसान का कारण भी बन सकता है।

निवेश का गणित और प्रदर्शन

यदि आपने 10 साल पहले ₹1 लाख का निवेश निफ्टी 50 इंडेक्स फंड में किया होता, तो आज उसकी वैल्यू बढ़कर करीब ₹3.15 लाख हो गई होती। वहीं, इसकी तुलना में एक अच्छा लार्ज-कैप एक्टिव फंड चुनने पर वही निवेश लगभग ₹3.83 लाख तक पहुंच सकता था। हालांकि, यदि आपने किसी कमजोर प्रदर्शन करने वाले एक्टिव फंड में पैसा लगाया होता, तो यही रकम सिर्फ ₹2.60 लाख के आसपास रह जाती।

फ्लेक्सी-कैप फंड में सबसे बड़ा अंतर

आंकड़ों के अनुसार, फ्लेक्सी-कैप फंड की श्रेणी में रिटर्न का अंतर सबसे अधिक नजर आया है।

  • सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले एक्टिव फ्लेक्सी-कैप फंड में निवेशित ₹1 लाख बढ़कर 10 साल में लगभग ₹5.99 लाख हो गए। इस दौरान सालाना रिटर्न का आंकड़ा 19.62% रहा।
  • वहीं, सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले फ्लेक्सी-कैप फंड में यही निवेश केवल ₹2.53 लाख तक ही पहुंच पाया, जहां सालाना रिटर्न मात्र 9.74% दर्ज किया गया।

एक्टिव फंड और इंडेक्स फंड की अलग-अलग खूबियां

एक्टिव फंड का प्रबंधन करने वाले फंड मैनेजर बाजार की स्थितियों के अनुसार निर्णय लेते हैं। वे अलग-अलग सेक्टर, लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों के बीच निवेश को समायोजित कर सकते हैं। यही फ्लेक्सिबिलिटी इंडेक्स फंड से बेहतर रिटर्न दिलाने में मदद करती है।

इसके विपरीत, इंडेक्स फंड उन निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जो कम जोखिम के साथ एक सरल निवेश विकल्प तलाश रहे हैं। इंडेक्स फंड का लक्ष्य बाजार के प्रदर्शन के अनुरूप रिटर्न देना होता है और इसमें फंड मैनेजर के निर्णयों पर निर्भरता कम रहती है, साथ ही इनका प्रबंधन खर्च भी अपेक्षाकृत कम होता है।

निवेशकों के लिए सबक

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि एक्टिव फंड में पैसा दोगुना या कई गुना करने की क्षमता अधिक है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़ा होता है। निवेशकों को केवल पिछले रिटर्न को आधार बनाकर फैसला नहीं करना चाहिए। किसी भी फंड में निवेश करने से पहले उसकी निवेश रणनीति, जोखिम प्रबंधन और दीर्घकालिक प्रदर्शन की गहराई से जांच करना अनिवार्य है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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