जियो आईपीओ की लिस्टिंग पर भावुक हुए अनंत अंबानी, कहा- कर्मचारियों की कड़ाके की धूप में मेहनत से बनी कंपनी की नींव व्यापार एक घंटा पहले 5
जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग के अवसर पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी ने कर्मचारियों और 58 करोड़ भारतीय परिवारों का आभार जताया। उन्होंने धीरूभाई अंबानी के संघर्ष और मुकेश अंबानी के विज़न को याद करते हुए इसे पूरे देश का सपना बताया।

जियो आईपीओ लिस्टिंग के दौरान भावुक क्षण

रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी ने जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग के ऐतिहासिक अवसर पर एक बेहद भावुक संबोधन दिया। इस खास मौके पर जहां शेयरधारकों, निवेशकों और कंपनी के कर्मचारियों के बीच भारी उत्साह था, वहीं अनंत अंबानी के शब्दों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल को छू लिया। उन्होंने कंपनी की इस सफलता का श्रेय सीधे तौर पर जियो के जमीनी कर्मचारियों की दिन-रात की मेहनत और देश की जनता के अटूट विश्वास को दिया।

कर्मचारियों के पसीने से मजबूत हुई जियो की नींव

अपने संबोधन में अनंत अंबानी ने जियो के कर्मचारियों के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज कंपनी जिस मुकाम पर खड़ी है, वह केवल वातानुकूलित दफ्तरों में बैठकर लिए गए फैसलों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उन कर्मचारियों के अथक परिश्रम का नतीजा है जिन्होंने हर कठिन परिस्थिति में काम किया।

अनंत अंबानी ने कर्मचारियों के प्रति अपना आभार जताते हुए कहा:

  • कड़ाके की धूप में काम: जब जियो के कर्मचारी भीषण धूप में भी नेटवर्क टॉवर पर चढ़कर काम कर रहे थे, तब दरअसल वे कंपनी की बुनियाद को और मजबूत बना रहे थे।
  • 58 करोड़ परिवारों का भरोसा: देश के 58 करोड़ परिवारों से मिले प्यार और भरोसे ने ही मिलकर जियो को इतना बड़ा और सफल बनाया है।
  • टीम भावना और समर्पण: कर्मचारियों का यही समर्पण कंपनी की असली ताकत बना।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में घंटी बजाना मंदिर की पूजा जैसा

अनंत अंबानी ने अपने भाषण का आगाज बेहद सादगी के साथ 'जय श्री कृष्णा' के पवित्र अभिवादन के साथ किया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर आईपीओ (IPO) की लिस्टिंग के दौरान पारंपरिक घंटी बजाने की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे एक धार्मिक अनुभव जैसा बताया।

उन्होंने कहा कि मेरे लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में घंटी बजाना किसी मंदिर में प्रार्थना करने से कम नहीं है, क्योंकि मेरे लिए काम ही सबसे बड़ी पूजा है। उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह हर धार्मिक पूजा का समापन प्रसाद वितरण के साथ होता है, उसी तरह जियो की यह सफलता भी एक प्रसाद की तरह है। आज जियो अपनी इस ऐतिहासिक कामयाबी का प्रसाद पूरे देश के साथ बांट रहा है।

दादा धीरूभाई अंबानी के संघर्षों और सपनों की यादें

संबोधन के दौरान अनंत अंबानी अपने दादाजी और रिलायंस समूह के संस्थापक धीरूभाई अंबानी के शुरुआती जीवन के संघर्षों को याद करते हुए भावुक नजर आए। उन्होंने भारत की वैचारिक क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि इस देश की सबसे बड़ी पूंजी यहां के लोगों के सपने हैं। भारत में भले ही किसी व्यक्ति के हाथ खाली हों, लेकिन उसकी आंखों में हमेशा बड़े सपने तैरते हैं।

धीरूभाई अंबानी के प्रेरणादायक जीवन सफर को याद करते हुए उन्होंने कहा:

  • साधारण शुरुआत: धीरूभाई अंबानी गुजरात के छोरवाड़ जैसे एक छोटे और साधारण से परिवार से निकलकर आगे बढ़े थे।
  • अदन में नौकरी: करियर की शुरुआत में उनके पास न तो कोई पहचान थी और न ही धन। उन्होंने अदन के एक पेट्रोल पंप पर मामूली नौकरी करके अपना सफर शुरू किया था।
  • सपनों की ताकत: सीमित साधनों के बावजूद उनके सपने बहुत बड़े थे, जिन्होंने आगे चलकर रिलायंस जैसे विशाल समूह की नींव रखी।

जामनगर रिफाइनरी से जियो की डिजिटल क्रांति तक का सफर

अनंत अंबानी ने बताया कि उनके दादाजी द्वारा रखी गई मजबूत नींव को उनके पिता मुकेश अंबानी ने अपने दूरदर्शी विज़न से और अधिक सुदृढ़ बनाया। उनके पिता का हमेशा से यह सपना रहा कि भारत प्रौद्योगिकी और औद्योगिक क्षमता के मामले में दुनिया में किसी भी देश से पीछे न रहे।

अपने पिता के ऐतिहासिक फैसलों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जब जामनगर की बंजर भूमि पर दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी का निर्माण किया गया, तो पूरी दुनिया भारत के उस सामर्थ्य को देखकर हैरान रह गई। उन्होंने दुनिया को यह दिखाया कि जब भारत कुछ निर्माण करता है, तो पूरी दुनिया उसे देखती है।

ईशा अंबानी और आकाश अंबानी के योगदान का जिक्र

रिफाइनरी के बाद नए भारत और युवा भारत का दौर आया, जिसकी सबसे बड़ी जरूरत तीव्र इंटरनेट और बेहतर कनेक्टिविटी थी। इसी विज़न और जरूरत का नाम जियो था।

अनंत अंबानी ने जियो की शुरुआत और इसके विकास में अपने भाई-बहनों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा:

सपनों का बीजारोपण: जियो के इस डिजिटल सपने का बीज सबसे पहले ईशा दीदी ने बोया था। सपने को आगे बढ़ाना: इसके बाद आकाश भाई ने इस सोच को अपना सपना बना लिया और इसे वास्तविकता में बदलने के लिए जी-तोड़ मेहनत की। देश का समर्थन: इस पूरे विचार को पूरे देश की दुआएं मिलीं, जिसके कारण आज जियो एक सफल और मजबूत कंपनी बन चुकी है।

उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना महामारी के कठिन समय में जब सब कुछ थम सा गया था, तब जियो ही वह मुख्य माध्यम बना जिसने लोगों को आपस में जोड़े रखा और देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाए रखा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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