धर्म
एक घंटा पहले
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विचारों
शनि प्रदोष व्रत का महत्व
अगर आप भी लगातार चल रही परेशानियों और आर्थिक तंगी से घिरे हुए हैं, तो अब आपको ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। कई बार कोशिशों के बावजूद जीवन में एक समस्या खत्म नहीं होती कि दूसरी आ खड़ी हो जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सभी नवग्रह भगवान शिव के अधीन कार्य करते हैं।
ग्रह बाधाओं से मुक्ति का मार्ग
हरिद्वार के पंडित श्रीधर शास्त्री का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति पर ग्रहों की महादशा, साढेसाती या ढैया का प्रभाव चल रहा है, तो महादेव की शरण में जाना ही एकमात्र समाधान है। पंडित जी के अनुसार, भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से जातक को इन दोषों से राहत मिलती है।
इस शनिवार का विशेष संयोग
इस बार ज्येष्ठ शुद्ध शुक्ल पक्ष में प्रदोष तिथि का आगमन शनिवार (27 जून) को हो रहा है। शनिवार के दिन पड़ने वाले इस प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष व्रत के रूप में जाना जाता है। इस दिन महादेव के स्तोत्रों का पाठ और उनकी विशेष पूजा-अर्चना करना बहुत फलदायी माना गया है। यदि आप भी अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि चाहते हैं, तो इस शुभ अवसर का लाभ उठाएं और महादेव की भक्ति में लीन होकर अपने संकटों को दूर करें।
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