क्या ईरान में सत्ता परिवर्तन की साजिश? मुज्तबा खामेनेई के ठिकाने को लेकर बढ़ा रहस्य विश्व एक महीने पहले 51
ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई की सार्वजनिक अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वे देश से बाहर हैं और तेहरान में कट्टरपंथी गुटों द्वारा तख्तापलट का डर जताया जा रहा है।

ईरान की सत्ता में हलचल

ईरान के मौजूदा हालातों को लेकर एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। सऊदी अरब के समाचार चैनल अल-हदाथ ने इजरायली सुरक्षा सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई इस समय ईरान में मौजूद नहीं हैं। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के साझा सैन्य अभियान में अपने पिता की मृत्यु के बाद मुज्तबा ने सर्वोच्च पद की कमान संभाली थी। हालांकि, पद संभालने के बाद से ही उनकी स्थिति रहस्यमयी बनी हुई है। वे न तो जनता के बीच आए हैं और न ही किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे हैं, बल्कि उनकी ओर से अब तक जो कुछ भी संदेश आए हैं, वे केवल लिखित माध्यमों से ही जारी किए गए हैं।

IRGC की भूमिका और आंतरिक कलह

रिपोर्ट के अनुसार, मुज्तबा खामेनेई की तरफ से जारी किए जा रहे आधिकारिक बयानों के पीछे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ अधिकारियों का हाथ है। इसमें नए नियुक्त प्रमुख अहमद वाहिदी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। इजरायली सुरक्षा सूत्रों का मानना है कि ईरान के भीतर आंतरिक मतभेद अब खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके हैं, जो खुद IRGC के वजूद के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा, इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका नहीं चाहता कि इजरायल ईरान पर किसी भी तरह के जवाबी सैन्य हमले करे, भले ही तेहरान की ओर से इजरायली सीमा में घुसपैठ या हमले की कोशिश की जाए। तेहरान की सड़कों पर भी इस आंतरिक सत्ता संघर्ष की झलक देखने को मिल रही है।

सत्ता के गलियारों में तख्तापलट का शोर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच तेहरान में सत्ता हथियाने की जंग तेज हो गई है। सीएनएन की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान का कट्टरपंथी धड़ा मौजूदा उदारवादी प्रशासन के खिलाफ खड़ा हो गया है। कट्टरपंथियों का आरोप है कि अमेरिका के साथ 14-सूत्रीय राजनयिक समझौते के जरिए एक 'सॉफ्ट कूप' यानी बिना खून-खराबे के सत्ता परिवर्तन का प्रयास किया जा रहा है। कट्टरपंथी खेमे का आरोप है कि सरकार ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिवंगत नेता खामेनेई की हत्या का बदला लेने के बजाय एक तरह से आत्मसमर्पण कर दिया है, जो स्पष्ट रूप से उनके निर्देशों का उल्लंघन है।

नेताओं के बीच जुबानी जंग

अमेरिका में स्थित ईरानी शोधकर्ता अराश अज़ीज़ी के अनुसार, मुज्तबा खामेनेई की लगातार गैर-मौजूदगी का फायदा उठाते हुए ग़ालिबफ़ और उनके सहयोगी देश का कामकाज संभाल रहे हैं। इसी कारण कट्टरपंथी अब उन पर तख्तापलट की साजिश का आरोप लगा रहे हैं। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन ने भी सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान जनता को चेतावनी देते हुए पूछा था कि क्या देश में तख्तापलट की तैयारी चल रही है। उन्होंने बाद में सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि वे शहीद इमाम के खून का बदला लेने के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी भी तख्तापलट की साजिश के खिलाफ मजबूती से खड़े रहेंगे।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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