सांवलिया सेठ के दरबार में श्रावण मास में उमड़ा आस्था का सैलाब, दानपेटी से निकले 35.66 करोड़ रुपये धर्म 2 घंटे पहले 2
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर में श्रावण मास के दौरान भक्तों ने दिल खोलकर दान किया है, जिससे मंदिर को कुल 35.66 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई।

दान का रिकॉर्ड और भक्तों का अटूट विश्वास

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में श्रावण मास के पवित्र महीने के दौरान भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। इस दौरान न केवल श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए बल्कि अपनी श्रद्धा के अनुसार नकद और कीमती धातुओं के रूप में बड़ा दान भी अर्पित किया। हाल ही में पूरी हुई दानपेटी की गणना के आंकड़ों ने सबको हैरान कर दिया है। मंदिर प्रशासन की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस बार कुल 35 करोड़ 66 लाख 64 हजार 428 रुपये की दानराशि प्राप्त हुई है।

भंडार गणना और सोने-चांदी की बंपर आवक

श्री सांवलिया सेठ मंदिर मंडल के अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव ने जानकारी दी कि दानपेटी की गणना का काम 11 अगस्त 2026 से शुरू हुआ था, जो कुल छह चरणों में पूरा किया गया। बुधवार को गणना का अंतिम चरण संपन्न हुआ। मंदिर के भंडार से भारी मात्रा में कीमती धातुएं प्राप्त हुई हैं, जो श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। भंडार से कुल 1 किलो 38 ग्राम 300 मिलीग्राम सोना और 133 किलो 653 ग्राम चांदी प्राप्त हुई है। मंदिर आने वाले भक्तों का मानना है कि सांवलिया सेठ के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ती जा रही है और यह दान उसी का साक्षात प्रमाण है।

दान की विस्तृत जानकारी

मंदिर मंडल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस विशाल दानराशि को अलग-अलग स्रोतों से एकत्रित किया गया है, जिसका विवरण इस प्रकार है:

  • मंदिर के भंडार की दानपेटी से कुल 27 करोड़ 89 लाख 54 हजार 347 रुपये नकद प्राप्त हुए हैं।
  • इसके अतिरिक्त, मनीऑर्डर, ऑनलाइन माध्यमों और अन्य भेंट स्वरूप मंदिर को 7 करोड़ 77 लाख 10 हजार 81 रुपये मिले हैं।
  • कुल मिलाकर मंदिर की आय 35 करोड़ 66 लाख 64 हजार 428 रुपये तक जा पहुंची है।

आस्था का अद्भुत संगम

श्रावण मास में भगवान सांवलिया सेठ के दर्शन के लिए राजस्थान के कोने-कोने से ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु चित्तौड़गढ़ पहुंचे थे। मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार दान करने को आतुर दिखा। मंदिर प्रशासन का कहना है कि जिस तरह से भक्तों ने इस बार सोने और चांदी के आभूषणों का चढ़ावा चढ़ाया है, वह अत्यंत सराहनीय है। यह दान न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भक्तों के भगवान सांवलिया सेठ के प्रति अटूट विश्वास और गहरी आस्था को भी प्रदर्शित करता है। गणना के बाद प्राप्त इन कीमती धातुओं को अब सुरक्षित रूप से मंदिर के कोष में जमा कर दिया गया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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