बिहार
एक घंटा पहले
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कम लागत में मशरूम की खेती से अच्छी कमाई की उम्मीद रखने वाले किसानों के लिए समस्तीपुर से एक काम की जानकारी सामने आई है। अक्सर देखा जाता है कि कई किसान मशरूम उत्पादन तो शुरू करना चाहते हैं, पर उन्हें यह पता नहीं होता कि गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित बीज आखिर कहां से लिया जाए। ऐसे में गलत या घटिया बीज खरीदने पर उन्हें आर्थिक चोट झेलनी पड़ती है।
किसानों की मदद के लिए आगे आया विश्वविद्यालय का सेंटर
किसानों की इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए समस्तीपुर स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा का एडवांस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मशरूम अहम भूमिका निभा रहा है। यहां किसानों को सरकारी दर पर मशरूम की 12 अलग-अलग किस्मों के प्रमाणित बीज मुहैया कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें मशरूम उत्पादन से जुड़ी तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञों की सलाह भी दी जा रही है।
क्यों जरूरी है प्रमाणित बीज
मशरूम वैज्ञानिक डॉ. आरती प्रसाद के मुताबिक, मशरूम उत्पादन में कामयाबी के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज सबसे अहम कड़ी है। उनका कहना है कि अगर किसान किसी अविश्वसनीय स्रोत से बीज खरीदते हैं तो उत्पादन पर बुरा असर पड़ सकता है और नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का मशरूम केंद्र वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया प्रमाणित बीज उपलब्ध कराता है।
12 किस्मों के बीज उपलब्ध
केंद्र पर ऑयस्टर, मिल्की, बटन और मेडिसिनल बटर समेत कुल 12 प्रकार के मशरूम के बीज मौजूद हैं। एक किलोग्राम के पैक में बीज दिया जाता है। किसान अपनी आवश्यकता और बाजार की मांग के अनुसार किसी भी किस्म को चुन सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सही बीज और उचित तकनीक अपनाकर किसान कम जगह में भी बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा हासिल कर सकते हैं।
कितनी है कीमत और कहां करें संपर्क
डॉ. आरती प्रसाद के अनुसार, विश्वविद्यालय में मशरूम का बीज मात्र 110 रुपये प्रति किलोग्राम की सरकारी दर पर दिया जा रहा है। किसान सीधे एडवांस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मशरूम, पूसा से संपर्क कर बीज ले सकते हैं। केंद्र के विशेषज्ञ किसानों को मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया, रखरखाव और जरूरी सावधानियों की भी जानकारी देते हैं। प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन मिलने से नए किसान भी आसानी से इस खेती की शुरुआत कर सकते हैं।
आय बढ़ाने का बेहतर विकल्प
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा दौर में मशरूम की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक अच्छा जरिया बनकर उभर रही है। कम निवेश और कम जगह में शुरू होने वाली यह खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।
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