सागर की गुफा वाली काली मंदिर में केदारनाथ धाम का अद्भुत नजारा, 1600 फीट लंबी गुफा में दिखेगी दिव्य झलक मध्य प्रदेश 9 घंटे पहले 7
मध्य प्रदेश के सागर में शारदीय नवरात्र के मौके पर एक भव्य झांकी सजाई गई है, जिसमें 1600 फीट लंबी गुफा के अंदर केदारनाथ धाम की प्रतिकृति और 41 फीट ऊंचा झरना आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

सागर में नवरात्र की धूम

शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर देशभर में मां दुर्गा की आराधना की जा रही है और जगह-जगह आकर्षक झांकियां सजाई गई हैं। इस बीच मध्य प्रदेश के सागर शहर में 'गुफा वाली काली' का दरबार श्रद्धालुओं के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर के बड़ा बाजार स्थित सत्यनारायण घाटी में इस बार एक विशाल और अद्भुत झांकी का निर्माण किया गया है, जो श्रद्धालुओं को एक अलग ही लोक में ले जाने का एहसास कराती है।

1600 फीट लंबी गुफा और केदारनाथ धाम की प्रतिकृति

इस बार समिति ने यहां 1600 फीट लंबी एक गुफा का निर्माण किया है। इस गुफा के भीतर प्रवेश करते ही भक्तों को केदारनाथ धाम की दिव्य अनुभूति होगी। समिति ने यहां केदारनाथ मंदिर की एक हुबहू प्रतिकृति बनाई है, जिसके पीछे बर्फीले पहाड़ों का दृश्य तैयार किया गया है। मंदिर के पास ही 41 फीट की ऊंचाई से गिरता हुआ एक झरना बनाया गया है, जिसे मां मंदाकिनी के स्वरूप में प्रदर्शित किया गया है। गुफा के भीतर भीम शिला के साथ-साथ बाबा केदारनाथ और बाहर नंदी महाराज को भी विराजमान किया गया है। इसके अलावा, बीच-बीच में भगवान कृष्ण के झूला झूलने और बाबा भूतनाथ की मनमोहक झांकियां भी देखने को मिलेंगी।

मां भवानी के दर्शन और यात्रा का अंत

इस पूरी गुफा यात्रा का अंतिम पड़ाव मां भवानी का दरबार है। श्रद्धालु जब इस लंबी और रोमांचक गुफा से होकर गुजरते हैं, तो सबसे अंत में उन्हें मां दुर्गा के दर्शन होते हैं। माता के आशीर्वाद के साथ ही यह यात्रा पूर्ण होती है और भक्त गुफा से बाहर निकलते हैं। श्री नवदुर्गा बाल समिति गुफा वाली काली जी की ओर से यह आयोजन किया जा रहा है, और इस वर्ष समिति अपनी स्थापना के 59 वर्ष पूरे कर रही है।

नौ साल बाद झांकियों की वापसी

समिति के सदस्य पप्पू भट्ट के अनुसार, इस आयोजन की शुरुआत बहुत पहले एक छोटी प्रतिमा से हुई थी, जिसे लकड़ी के स्टूल पर रखकर श्रद्धालु अपने सिर पर उठाकर शहर में भ्रमण करते थे। समय के साथ आयोजन का विस्तार हुआ। 2017 तक सब कुछ पूरे उत्साह के साथ चलता रहा, लेकिन बीच के कुछ वर्षों में केवल गुफा का निर्माण किया गया था। अब 9 साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर भव्य झांकियों को वापस लाया गया है। हर बार नए और अलग स्वरूप में झांकियां तैयार करना समिति की विशेषता रही है, जो लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनती है।

स्थानीय सामग्री और युवाओं की मेहनत

इस पूरी गुफा को प्राकृतिक और चट्टानी लुक देने के लिए स्थानीय संसाधनों का ही उपयोग किया गया है। कुलदीप भट्ट ने जानकारी दी कि इसमें अनाज के बोरों की फट्टी, नारियल की रस्सियों और बरगद के पेड़ की टहनियों व पत्तों का इस्तेमाल किया गया है। सजावट में जगह-जगह रंग-रोगन और रंग-बिरंगी लाइटें लगाई गई हैं, जो रात के समय गुफा को अलौकिक बनाती हैं। दिलीप अग्रवाल ने बताया कि इस निर्माण में मोहल्ले के हर एक व्यक्ति और बच्चे ने योगदान दिया है। कारीगर बाहर से बुलाने के बजाय, 80 युवाओं की टीम ने खुद मेहनत करके इसे तैयार किया है। ये युवा दिन में अपने काम धंधों में व्यस्त रहते थे और रात भर जागकर इस झांकी को आकार देते थे।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

12 अक्टूबर से यह गुफा आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दी गई है। भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। गुफा के चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और सुरक्षा के लिए वालंटियर भी तैनात रहेंगे। शैलेश समैया ने बताया कि झरने और पहाड़ी बनावट को जीवंत दिखाने के लिए विशेष तकनीक का उपयोग किया गया है ताकि लोगों को नदी के बहने का वास्तविक एहसास हो सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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