ऋषिकेश: त्रिवेणी घाट मार्ग पर बढ़ता ट्रैफिक बना जी का जंजाल, बेतरतीब पार्किंग से पैदल चलना भी हुआ मुश्किल उत्तराखंड एक घंटा पहले 2
ऋषिकेश के ऐतिहासिक त्रिवेणी घाट मार्ग पर दिनभर वाहनों के भारी दबाव और सड़क किनारे अवैध पार्किंग के कारण स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल ऋषिकेश में यातायात की समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। विशेष रूप से प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट मार्ग पर वाहनों के बढ़ते दबाव ने स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ यहां आने वाले पर्यटकों की नाक में दम कर रखा है। इस मार्ग पर सुबह से लेकर देर रात तक वाहनों का तांता लगा रहता है, जिससे हर कोई परेशान है।

सड़क पर वाहनों का कब्जा और संकरी होती राहें

त्रिवेणी घाट की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर हर समय वाहनों का रेला देखा जा सकता है। इस मार्ग पर यातायात के मुख्य साधन और उनकी वजह से उत्पन्न होने वाली समस्याओं की सूची इस प्रकार है:

  • वाहनों की लगातार आवाजाही: इस मार्ग पर दिनभर कार, ऑटो, ई-रिक्शा और दोपहिया वाहनों का भारी दबाव रहता है।
  • अवैध और बेतरतीब पार्किंग: सड़क के दोनों किनारों पर बेतरतीब ढंग से खड़े किए गए वाहन इस मार्ग को और अधिक संकरा बना देते हैं, जिससे सुचारू यातायात में बड़ी बाधा आती है।
  • पैदल यात्रियों की मुश्किलें: सड़क पर जगह न बचने के कारण पैदल चलने वाले लोगों को वाहनों के बीच से ही बचते-बचाते रास्ता बनाना पड़ता है।

शाम होते ही स्थिति हो जाती है बेकाबू

जैसे ही शाम ढलती है, त्रिवेणी घाट पर लोगों का हुजूम उमड़ने लगता है। घाट पर भीड़ बढ़ने के साथ ही इस मार्ग पर वाहनों की कतारें लंबी होने लगती हैं और कई बार स्थिति पूरी तरह से जाम में बदल जाती है। इस दौरान पैदल चलने वाले लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय निवासियों और दुकानदारों की चिंता

इस विकट समस्या को लेकर स्थानीय दुकानदारों और निवासियों में काफी चिंता है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक और बेतरतीब पार्किंग के चलते लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाना चाहिए ताकि सभी को इस रोजाना की परेशानी से राहत मिल सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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