भारत-उज़्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक साझेदारी, अब वहां भी चलेगा यूपीआई और मिलेगी यूरेनियम की आपूर्ति विश्व एक घंटा पहले 2
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के बीच हुई शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच 11 बड़े समझौते हुए हैं, जिसमें यूरेनियम आपूर्ति से लेकर डिजिटल भुगतान तक के अहम फैसले शामिल हैं।

रणनीतिक साझेदारी और नए रिश्तों की शुरुआत

भारत और उज़्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा देते हुए व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का आधिकारिक निर्णय लिया है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के बीच हुई विस्तृत बातचीत में दोनों देशों ने आपसी सहयोग के कई बड़े आयामों पर सहमति व्यक्त की। इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कुल 11 समझौतों और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए, साथ ही 5 बड़ी घोषणाओं को अंजाम दिया गया। इस साझेदारी का मुख्य लक्ष्य 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़ों को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

यूरेनियम और महत्वपूर्ण खनिजों पर बड़ा फैसला

ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से भारत के लिए यह यात्रा बेहद निर्णायक साबित हुई है। भारत असैन्य परमाणु ऊर्जा उत्पादन की जरूरतों को पूरा करने के लिए उज़्बेकिस्तान से यूरेनियम खरीदने की योजना पर काम कर रहा है। दोनों देशों ने यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष व्यवस्था बनाने पर अपनी सहमति जताई है। इसके अलावा, रणनीतिक महत्व के खनिज संसाधनों और भूविज्ञान के क्षेत्र में भी आपसी सहयोग बढ़ाने को लेकर समझौता हुआ है, जो भारत की औद्योगिक और ऊर्जा जरूरतों के लिए एक अहम कदम है।

डिजिटल कनेक्टिविटी: अब उज़्बेकिस्तान में भी चलेगा UPI

आधुनिक तकनीक और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए भारत ने अपनी क्रांतिकारी भुगतान प्रणाली UPI को उज़्बेकिस्तान के UZQR सिस्टम के साथ एकीकृत करने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत, भारतीय पर्यटक और व्यापारी अपने UPI ऐप का उपयोग करके उज़्बेकिस्तान में व्यापारियों के UZQR कोड को स्कैन कर आसानी से भुगतान कर सकेंगे। यह पहल दोनों देशों के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगी और कारोबारी लेनदेन को बेहद सरल बना देगी।

समझौतों का विस्तृत दायरा

दोनों देशों के बीच हुए इन 11 समझौतों में विविध क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जो आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करेंगे:

  • वर्ष 2026-30 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान का कार्यक्रम।
  • पर्यटन क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयास।
  • आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में अनुसंधान एवं विकास।
  • पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए साझेदारी।
  • उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान में तकनीकी आदान-प्रदान।
  • आर्थिक और वित्तीय विषयों पर संवाद के लिए नया मंच।
  • भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार और उज़आर्काइव के बीच सहयोग।
  • राजनयिक प्रशिक्षण हेतु सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट और उज़्बेक डिप्लोमैटिक एकेडमी के बीच तालमेल।

सांस्कृतिक विरासत और मानवीय संबंध

ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को जीवंत बनाए रखने के लिए उज़्बेकिस्तान के तेरमेज स्थित फयाज तेपा और कारा तेपा जैसे बौद्ध स्थलों के संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए एक सहमति पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) पर हस्ताक्षर हुए हैं। अराल सागर क्षेत्र में वनीकरण की परियोजना के लिए भारत 10 लाख डॉलर की वित्तीय सहायता भी प्रदान करेगा। इसके अलावा, हिंदी भाषा के अध्ययन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 100 लाल बहादुर शास्त्री स्कॉलरशिप देने की घोषणा की गई है। साथ ही, ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की ओर से संस्कृत चेयर स्थापित करने का भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। भारत के गुजरात राज्य और उज़्बेकिस्तान के समरकंद क्षेत्र के बीच पार्टनरशिप स्थापित करने का समझौता भी दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने में मददगार साबित होगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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