हर साल समंदर में समा रहा 5 करोड़ टन प्लास्टिक, दोगुनी हुई समुद्री जलस्तर बढ़ने की रफ्तार, UN की भयावह चेतावनी विश्व 5 घंटे पहले 3
संयुक्त राष्ट्र की नई वर्ल्ड ओशियन असेसमेंट रिपोर्ट के मुताबिक बीते 10 सालों में समुद्र का जलस्तर बढ़ने की रफ्तार दोगुनी हो चुकी है, पानी तेजी से गर्म हो रहा है और प्लास्टिक प्रदूषण से समुद्री जीवन खतरे में है। UN प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने इसे जलवायु संकट का सबसे बड़ा अलार्म बताया है।

संयुक्त राष्ट्र की ताजा वर्ल्ड ओशियन असेसमेंट रिपोर्ट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। महासागर पहले से कहीं अधिक गंभीर संकट में हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 सालों में समुद्र का जलस्तर बढ़ने की रफ्तार बिल्कुल दोगुनी हो चुकी है। इंसानी गलतियों ने महासागरों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसकी सबसे बड़ी वजह प्रदूषण और बड़े पैमाने पर हो रही इंडस्ट्रियल फिशिंग है। रिपोर्ट बताती है कि समुद्री इकोसिस्टम पर बेहद दबाव है और बायोडायवर्सिटी लगातार खत्म हो रही है।

यह रिपोर्ट 86 देशों के 600 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने तैयार की है, जिसमें 2021 से 2025 तक समुद्र की सेहत का अध्ययन किया गया है। इससे पहले 2018 की रिपोर्ट में भी समुद्री पर्यावरण को हुए नुकसान की बात कही गई थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसान ने महासागरों को कूड़ेदान समझ लिया है।

जलस्तर की रफ्तार ने क्यों उड़ाई वैज्ञानिकों की नींद

रिपोर्ट का आंकड़ा वाकई डराने वाला है। 2015 से पहले समुद्र का पानी हर साल 2 मिलीमीटर बढ़ता था, लेकिन 2023 में यह रफ्तार बढ़कर 4.3 मिलीमीटर तक पहुंच गई। इसका सीधा मतलब है कि समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी दोगुनी हो चुकी है।

पानी का गर्म होना भी एक बड़ा खतरा बन गया है। 1955 के बाद से समुद्र जितना गर्म हुआ है, उसका 16 परसेंट हिस्सा सिर्फ 2018 के बाद दर्ज हुआ है। अटलांटिक महासागर के साथ-साथ हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के दक्षिणी हिस्से सबसे तेजी से गर्म हो रहे हैं।

महासागरों की गहराई आज भी रहस्य

वैज्ञानिक मानते हैं कि हमें समुद्र के बारे में बहुत कम जानकारी है। 2025 तक महासागरों के सिर्फ 27 परसेंट हिस्से का ही नक्शा तैयार हो पाया है। समुद्र का बड़ा भाग आज भी एक पहेली बना हुआ है और डीप सी इकोसिस्टम को समझना वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती है। गहराइयों में हो रहे बदलावों और वहां रहने वाले जीवों पर इंसानी दबाव के असर को समझना अब भी बाकी है।

प्लास्टिक प्रदूषण से समुद्री जीवन पर मंडराता संकट

रिपोर्ट के मुताबिक हर साल समुद्र में 52.1 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा फेंका जा रहा है, जो कोई छोटी मात्रा नहीं है। इस प्लास्टिक के 24.4 ट्रिलियन माइक्रोप्लास्टिक पार्टिकल्स समुद्र के पानी में घुल चुके हैं। इसका सीधा और खतरनाक असर 4000 से ज्यादा समुद्री प्रजातियों पर पड़ रहा है।

मछलियां और अन्य समुद्री जीव इस कचरे को खाकर जान गंवा रहे हैं, जिससे समुद्री जीवन का प्राकृतिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है। राफेल गोंजालेज-क्विरोस ने कहा कि एक स्वस्थ महासागर की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

UN महासचिव का सख्त संदेश

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस रिपोर्ट पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा, ‘हम महासागरों को असीमित नहीं मान सकते।’ गुटेरेस ने दुनिया के तमाम देशों से मिलकर काम करने की अपील की और कहा कि हमें महासागरों के साथ एक नया रिश्ता बनाना होगा, जो विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित हो।

हाल ही में लागू हुई हाई सीज ट्रीटी से उन समुद्री इलाकों को बचाने में मदद मिलेगी जो किसी देश की सीमा में नहीं आते।

जलवायु संतुलन और समुद्री धाराओं पर असर

हमारी धरती का 70 परसेंट से ज्यादा हिस्सा पानी से ढका है और महासागर ही हमारे वैश्विक जलवायु को नियंत्रित करते हैं। इंसान जितना फॉसिल फ्यूल जलाता है, उसकी 90 परसेंट अतिरिक्त गर्मी समुद्र सोख लेता है। इसके अलावा 30 परसेंट कार्बन डाइऑक्साइड भी पानी में घुल जाती है।

समुद्र का पानी ओशियन करंट्स के जरिए गर्मी को वैश्विक और स्थानीय स्तर पर संतुलित करता है, लेकिन अब ये धाराएं भी बदल रही हैं। भविष्य की जलवायु पर इसके प्रभाव को समझना वैज्ञानिकों के लिए मुश्किल होता जा रहा है।

बढ़ती आबादी से समुद्री किनारों पर खतरा

दुनिया की आबादी 2024 के अंत तक 8.2 बिलियन तक पहुंच चुकी है। दुनिया की एक तिहाई आबादी समुद्र से 100 किलोमीटर के दायरे में रहती है, जबकि करीब 11 परसेंट लोग ऐसी जमीन पर बसे हैं जो समुद्र तल से 10 मीटर से भी कम ऊंची है। जलस्तर बढ़ने से इन लोगों के डूबने का सीधा खतरा है। इसके अलावा सामाजिक और भू-राजनीतिक तनाव भी समुद्री सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

ग्रीनपीस जैसी संस्थाओं ने सरकारों से तुरंत सख्त कदम उठाने की मांग की है। ग्रीनपीस के ग्लोबल ओशियन कैंपेनर लुकास मेउस ने कहा, ‘सरकारों को 2030 तक 30 परसेंट महासागरों को पूरी तरह सुरक्षित करना होगा।’

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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