ऑस्ट्रेलिया में अंग्रेजी की परीक्षा में छात्र का भाषण सुनकर हैरान रह गए शिक्षक, AI के इस्तेमाल का खुला राज विश्व 8 घंटे पहले 2
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित एक नामी स्कूल में 12वीं कक्षा के कई छात्रों पर अंग्रेजी की ओरल परीक्षा में AI टूल्स की मदद लेने का आरोप लगा है। जांच के बाद दोषी पाए गए छात्रों के अंक काट दिए गए हैं।

परीक्षाओं में नकल को आमतौर पर सिर्फ भारत से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह समस्या दुनिया भर में मौजूद है। फर्क बस तरीके का है। ऐसा ही एक रोचक मामला ऑस्ट्रेलिया से सामने आया है, जहां 12वीं कक्षा के एक छात्र ने अंग्रेजी की परीक्षा में ऐसा भाषण प्रस्तुत किया कि उसे सुनकर शिक्षक हैरान रह गए और सोचने पर मजबूर हो गए कि आखिर छात्र को इस तरह तैयारी करने की सलाह किसने दी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तकनीक एक ओर शिक्षा के क्षेत्र में नए रास्ते खोल रही है, वहीं दूसरी ओर इसका गलत इस्तेमाल स्कूलों और कॉलेजों के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। यह घटना सिर्फ एक छात्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई छात्रों के भाषण ऐसे थे कि शिक्षक उन्हें सहज रूप से स्वीकार नहीं कर सके।

मेलबर्न के नामी स्कूल का मामला

यह घटना ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल की है, जहां 12वीं कक्षा के कई छात्रों पर परीक्षा में AI टूल्स के इस्तेमाल से अनुचित लाभ लेने का आरोप लगा है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित छात्रों के अंक काट दिए गए हैं।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मेलबर्न के मुलग्रेव इलाके में स्थित माजेनोड कॉलेज के कुछ छात्रों ने 12वीं कक्षा की अंग्रेजी विषय की ओरल परीक्षा की तैयारी में AI टूल्स का सहारा लिया। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस मामले में करीब 50 छात्र शामिल हो सकते हैं, हालांकि स्कूल प्रशासन ने इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

भाषण सुनकर हुआ शक

बताया जा रहा है कि छात्रों की प्रस्तुतियों की समीक्षा के दौरान शिक्षकों को संदेह हुआ कि कुछ भाषण पूरी तरह या आंशिक रूप से AI की मदद से तैयार किए गए हैं। इसी संदेह के बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई। जांच में जिन छात्रों के खिलाफ नियमों के उल्लंघन के सबूत मिले, उनके अंकों में कटौती कर दी गई।

क्या है ओरल असाइनमेंट

ओरल असाइनमेंट को ऑस्ट्रेलिया की 12वीं कक्षा की अंग्रेजी यूनिट-4 परीक्षा का अहम हिस्सा माना जाता है। कुल 20 अंकों के इस मूल्यांकन में छात्रों को किसी सामाजिक, राजनीतिक या समसामयिक विषय पर तीन से पांच मिनट का भाषण तैयार कर अपने विचार रखने होते हैं। इस परीक्षा में मिले अंक छात्रों के अंतिम इंग्लिश स्टडी स्कोर में जोड़े जाते हैं।

माजेनोड कॉलेज के प्रिंसिपल पॉल शैनन ने एक बयान में कहा कि परीक्षा प्रक्रिया की नियमित समीक्षा के दौरान कुछ छात्रों द्वारा AI टूल्स के इस्तेमाल के संकेत मिले थे। इसके बाद विस्तार से जांच की गई और संबंधित छात्रों से बातचीत की गई।

शिक्षा में AI की चुनौती

इस मामले की जानकारी विक्टोरियन करिकुलम एंड असेसमेंट अथॉरिटी (VCAA) को भी दी गई। शैनन ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में AI का बढ़ता उपयोग एक नई चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। उनका मानना है कि छात्रों को सीखने में मदद के लिए तकनीक का सहारा लिया जा सकता है, लेकिन मूल्यांकन और परीक्षाओं में इसका इस्तेमाल निष्पक्षता और अकादमिक ईमानदारी पर असर डालता है।

इसी स्कोर के आधार पर छात्रों की ऑस्ट्रेलियन टर्शियरी एडमिशन रैंक (ATAR) तय होती है, जिसे विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए बेहद अहम माना जाता है। यही कारण है कि परीक्षा में AI के उपयोग को गंभीर शैक्षणिक अनियमितता के रूप में देखा जा रहा है। विक्टोरियन करिकुलम एंड असेसमेंट अथॉरिटी की गाइडलाइन भी साफ तौर पर कहती है कि किसी भी मूल्यांकन में जनरेटिव AI का अनुचित इस्तेमाल नियमों का उल्लंघन है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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