जापान का अनोखा फूल: बारिश की बूंद पड़ते ही बन जाता है कांच जैसा पारदर्शी, गायब हो जाता है पंखुड़ियों का रंग विश्व एक घंटा पहले 4
स्केलेटन फ्लावर या क्रिस्टल फ्लावर के नाम से मशहूर डिफाइलिया ग्रेई पानी के संपर्क में आते ही अपना रूप बदल लेता है और सफेद पंखुड़ियां पारदर्शी हो जाती हैं। यह दुर्लभ पौधा जापान, चीन और पूर्वी एशिया के नम पहाड़ी जंगलों में पाया जाता है।

क्या आपने कभी ऐसे फूल के बारे में सुना है, जिसकी सफेद पंखुड़ियां पानी की एक बूंद गिरते ही धीरे-धीरे पारदर्शी होने लगें? सुनने में यह बात भले ही हैरान करने वाली लगे, लेकिन हकीकत में ऐसा होता है। बारिश की बूंदें पड़ते ही यह फूल इस तरह दिखने लगता है, मानो कांच से तराशा गया हो।

कौन-सा है यह अनोखा फूल

इस खास पौधे का नाम डिफाइलिया ग्रेई है, जिसे आम बोलचाल में स्केलेटन फ्लावर या क्रिस्टल फ्लावर भी कहा जाता है। पहली नजर में यह किसी साधारण सफेद जंगली फूल जैसा ही लगता है। इसकी पंखुड़ियां सफेद रंग की होती हैं और बीच का हिस्सा पीला होता है, यानी देखने में यह बिल्कुल आम फूलों की तरह नजर आता है।

कहां पाया जाता है यह पौधा

यह फूल जापान और चीन के ठंडे और नम पहाड़ी जंगलों में उगता है। जापान, चीन और पूर्वी एशिया के कुछ हिस्सों के नमी भरे पर्वतीय जंगल इसका प्राकृतिक ठिकाना हैं। पानी के संपर्क में आते ही अपना रूप बदल लेने की क्षमता इसे दुनिया के सबसे निराले फूलों वाले पौधों में शामिल करती है।

रंग बदलने के पीछे का विज्ञान

वैज्ञानिकों के मुताबिक इस फूल का सफेद रंग किसी खास पिगमेंट की वजह से नहीं होता। इसकी पंखुड़ियों के भीतर बेहद छोटे-छोटे हवा से भरे खाली स्थान होते हैं, जो रोशनी को बिखेर देते हैं और इसी वजह से फूल सफेद दिखाई देता है। जैसे ही बारिश का पानी पंखुड़ियों पर पड़ता है, ये खाली स्थान पानी से भर जाते हैं। इसके बाद रोशनी पहले की तरह बिखरने के बजाय सीधे पंखुड़ियों के आर-पार गुजरने लगती है, और यही कारण है कि पंखुड़ियां पारदर्शी नजर आने लगती हैं।

लाइट और पानी से जुड़ा बदलाव

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जब फूल सूख जाता है, तो उसके अंदर फिर से हवा भर जाती है और वह दोबारा सफेद रंग का हो जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो यह कोई रासायनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरी तरह रोशनी और पानी से जुड़ा बदलाव है।

यह पौधा आमतौर पर वसंत और गर्मियों की शुरुआत में खिलता है। इसके बड़े-बड़े पत्ते 40 सेंटीमीटर तक चौड़े हो सकते हैं। बारिश के दौरान इसके आर-पार दिखने की खूबी देखने के लिए प्रकृति प्रेमी और फोटोग्राफर दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं।

वैज्ञानिकों की दिलचस्पी क्यों

वैज्ञानिक भी इस फूल पर अध्ययन कर रहे हैं, क्योंकि इसकी पंखुड़ियों की बनावट से भविष्य में ऐसी नई चीजें विकसित की जा सकती हैं, जो पानी के संपर्क में आते ही अपना रूप बदल लें। यही वजह है कि स्केलेटन फ्लावर को प्रकृति के सबसे अद्भुत और रहस्यमयी फूलों में गिना जाता है। बारिश में इसका सफेद से पारदर्शी हो जाना किसी जादू से कम नहीं लगता।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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