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7 घंटे पहले
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बिश्केक में वैश्विक नेताओं का जमावड़ा और भारत-रूस की नजदीकी
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में वर्तमान में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर दुनिया भर के तमाम दिग्गज और शक्तिशाली नेता एकत्रित हुए हैं। सम्मेलन के व्यस्त कार्यक्रमों के इतर, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई मुलाकात सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बनी रही। बिश्केक स्थित अला-अरचा स्टेट रेजिडेंस में दोनों नेताओं के बीच जिस तरह की कैमिस्ट्री दिखाई दी, उसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों को भी हैरान कर दिया है। यह बैठक केवल एक औपचारिक बातचीत नहीं थी, बल्कि यह भारत और रूस के बीच सदियों पुरानी और अटूट रणनीतिक मित्रता का एक नया अध्याय प्रतीत होती है।
रूसी राष्ट्रपति ने किया पीएम मोदी का इंतजार
इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात की सबसे चर्चित घटना वह रही, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंतजार करते हुए देखे गए। जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी अला-अरचा स्टेट रेजिडेंस पहुंचे, दोनों नेताओं के चेहरों पर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और खुशी साफ झलक रही थी। शिष्टाचार और कूटनीतिक प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए राष्ट्रपति पुतिन आगे बढ़े और प्रधानमंत्री मोदी को गर्मजोशी के साथ गले लगा लिया। इसके बाद दोनों नेताओं ने मीडिया के कैमरों के सामने जिस तरह से हाथ मिलाया, वह आपसी भरोसे और गहरी व्यक्तिगत मित्रता को बयां करने के लिए काफी था। यह नजारा स्पष्ट करता है कि भारत और रूस के बीच के संबंध केवल दो राष्ट्रों के बीच के सरकारी समझौतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह व्यक्तिगत विश्वास की एक मजबूत डोर से बंधे हुए हैं।
कंधे से कंधा मिलाकर एंट्री और कूटनीतिक सहजता
जब द्विपक्षीय वार्ता का औपचारिक सत्र शुरू होने वाला था, तब दोनों नेताओं का मीटिंग हॉल में प्रवेश करना एक और महत्वपूर्ण क्षण बन गया। पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन एक-दूसरे के साथ बिल्कुल कंधे से कंधा मिलाकर चलते हुए हॉल में दाखिल हुए। उनके चलने के अंदाज में एक अजीब सी सहजता और आत्मविश्वास था, जो दो पक्के मित्रों की उपस्थिति का आभास करा रहा था। बातचीत की मेज पर बैठने से लेकर मीडिया के सवालों का जवाब देने तक, दोनों नेताओं की बॉडी लैंग्वेज बहुत ही सकारात्मक और आश्वस्त नजर आई। यह तस्वीर वैश्विक मंच पर एक बड़ा संदेश देने के लिए पर्याप्त थी कि भारत और रूस का तालमेल आज भी विश्व के सबसे मजबूत द्विपक्षीय संबंधों में से एक है।
पीएम मोदी के प्रति पुतिन का सम्मान और आभार
बातचीत की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत और रूस के संबंधों को नई ऊंचाई देने में प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता और उनकी व्यक्तिगत कोशिशों का बड़ा हाथ है। पुतिन ने कहा, 'बेशक, प्रधानमंत्री जी, हमारे रूस-भारत संबंधों के विकास में आपके व्यक्तिगत ध्यान और हमारे बीच बने बहुत ही दोस्ती भरे संबंधों की वजह से ही ये सब संभव हो सका है। इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं।' यह बयान मास्को के लिए नई दिल्ली की अहमियत को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर रूस पर लगे विभिन्न प्रतिबंधों और तमाम दबावों के बावजूद, भारत ने जिस तरह रूस के साथ अपने व्यापारिक और रणनीतिक हितों को संतुलित रखा है, पुतिन ने उसके लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है।
कार डिप्लोमेसी: दोस्ती की नई मिसाल
बिश्केक में इस मुलाकात का सबसे दिलचस्प हिस्सा 'कार डिप्लोमेसी' रही। द्विपक्षीय बैठक संपन्न होने के बाद, दोनों नेता 'नोमैड गेम्स' के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेने के लिए एक साथ रवाना हुए। यहां दुनिया ने एक अनूठा नजारा देखा, जहां भारत और रूस के प्रमुख अलग-अलग वाहनों के बजाय एक ही कार में सवार होकर समारोह स्थल तक पहुंचे। कूटनीतिक भाषा में इसे 'कार डिप्लोमेसी' कहा जाता है। जब दो बड़े देशों के सर्वोच्च नेता किसी तीसरे देश की धरती पर एक ही गाड़ी में सफर करते हैं, तो यह उनके आपसी गहरे जुड़ाव और भरोसे का संकेत माना जाता है। इस कार यात्रा के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच कई अहम और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत जारी रही।
चीन और पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक झटका
यह मुलाकात रणनीतिक रूप से चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। चीन लंबे समय से इस उम्मीद में था कि यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी देशों के दबाव में आकर रूस पूरी तरह से उसके प्रभाव में आ जाएगा और भारत-रूस के संबंध कमजोर हो जाएंगे। हालांकि, बिश्केक में पुतिन और मोदी की गर्मजोशी ने बीजिंग के उन तमाम कयासों को सिरे से खारिज कर दिया है। चीन अब यह भली-भांति समझ चुका है कि रूस की विदेश नीति में भारत का स्थान बेहद खास है। वहीं, पाकिस्तान जो हाल के दिनों में रूस से सस्ते तेल और रक्षा उपकरणों को लेकर उम्मीदें पाले बैठा था, उसे भी एक साफ संदेश मिल गया है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की यह केमिस्ट्री इस्लामाबाद के उन मंसूबों पर पानी फेरने के लिए काफी है, जो रूस के साथ नजदीकी बनाकर भारत के प्रभाव को कम करना चाहते थे। भारत और रूस की यह बॉन्डिंग साबित करती है कि क्षेत्रीय राजनीति में कूटनीति के दांव-पेच किसी भी दबाव से ऊपर होते हैं।
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