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3 घंटे पहले
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उत्तर कोरिया की कूटनीतिक सक्रियता का नया दौर
उत्तर कोरिया अब अपनी पारंपरिक अलगाववादी नीति से बाहर निकलकर दुनिया के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में जुटा हुआ है। रूस और चीन जैसे करीबी सहयोगियों के बाद अब उत्तर कोरिया ने वियतनाम के साथ अपने दशकों पुराने कूटनीतिक रिश्तों में नई गर्माहट लाने की पहल की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर कोरियाई सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए नरम प्रस्तावों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। प्योंगयांग की यह नई नीति संकेत देती है कि वह अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने पुराने भरोसेमंद मित्रों के साथ संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है।
किम जोंग उन का वियतनाम को विशेष संदेश
वियतनाम के 81वें राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर उत्तर कोरियाई सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम को एक विशेष पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र के माध्यम से किम ने दोनों देशों के बीच पारंपरिक मैत्री, आपसी विश्वास और द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई है। उत्तर कोरिया की आधिकारिक समाचार एजेंसी केसीएनए ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की है, जिसने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में प्योंगयांग और हनोई के बीच बढ़ते संबंधों को ला खड़ा किया है। किम जोंग उन ने स्पष्ट किया कि पिछले साल अक्टूबर में राष्ट्रपति तो लाम की प्योंगयांग यात्रा के दौरान जो समझौते हुए थे, यह नया कदम उन्हीं संकल्पों को आगे बढ़ाने का एक माध्यम है।
साल 2025 से बदलती तस्वीर
उत्तर कोरिया और वियतनाम के बीच रिश्तों का नया अध्याय अक्टूबर 2025 में लिखा गया था, जब वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने उत्तर कोरिया की यात्रा की। यह पिछले 18 वर्षों में किसी भी शीर्ष वियतनामी नेता की पहली प्योंगयांग यात्रा थी, जिसने दोनों देशों के बीच बंद पड़े संवाद के रास्तों को खोल दिया। इसके बाद से दोनों देशों के बीच लगातार उच्च स्तरीय आदान-प्रदान देखने को मिल रहा है।
- इस साल मई के महीने में वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई चुंग ने उत्तर कोरिया का दौरा किया और अपनी समकक्ष चो सोन-हुई के साथ विस्तृत चर्चा की।
- इसके ठीक अगले महीने यानी जून में, दोनों देशों के सुरक्षा मंत्रियों की प्योंगयांग में एक अहम बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य केंद्र सार्वजनिक सुरक्षा, आंतरिक कानून व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में आपसी तालमेल को मजबूत करना था।
ऐतिहासिक रिश्तों को पुनर्जीवित करने का प्रयास
उत्तर कोरिया और वियतनाम के बीच संबंधों की जड़ें काफी गहरी और ऐतिहासिक रही हैं। वैचारिक समानता और कठिन समय में एक-दूसरे का समर्थन करने के कारण इन दोनों देशों के बीच पुराना राजनीतिक आत्मीय रिश्ता रहा है। वैश्विक समीकरणों में आए बदलावों और क्षेत्रीय परिस्थितियों के चलते पिछले कुछ सालों में इनके बीच का कूटनीतिक संपर्क सीमित हो गया था, लेकिन अब प्योंगयांग और हनोई दोनों ही इस रणनीतिक रिश्ते के महत्व को पुन: समझ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति मजबूत करने और खुद को कूटनीतिक अलगाव से बाहर निकालने के लिए उत्तर कोरिया इन पुराने मित्रों के साथ संबंधों को नई ऊर्जा दे रहा है। आने वाले समय में आर्थिक, सुरक्षा और राजनीतिक मोर्चे पर इन दोनों देशों के बीच सहयोग और प्रगाढ़ होने की संभावना है।
अमेरिका और वियतनाम के जटिल ऐतिहासिक संबंध
वियतनाम के कूटनीतिक इतिहास को देखें तो अमेरिका के साथ इसके रिश्ते काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। फ्रांसीसी उपनिवेश से आजादी के बाद 1945 में हो ची मिन्ह ने वियतनाम की स्वतंत्रता की घोषणा की थी। 1954 के जेनेवा समझौते के बाद देश अस्थायी रूप से दो हिस्सों में विभाजित हो गया, जिसमें उत्तर में साम्यवादी और दक्षिण में गैर-साम्यवादी सरकार थी। अमेरिका ने दक्षिण वियतनाम को साम्यवाद के विस्तार से बचाने के लिए सैन्य समर्थन देना शुरू किया। 1964 में टोंकिन की खाड़ी की घटना के बाद अमेरिका ने बड़े पैमाने पर सैन्य हस्तक्षेप किया और भीषण युद्ध छिड़ा, जिसमें दोनों तरफ से भारी जनहानि हुई। हालांकि, 1973 में पेरिस शांति समझौते के बाद अमेरिकी सेनाएं वापस लौट आईं। धीरे-धीरे समय बदला और 1990 के दशक में बिल क्लिंटन के प्रयासों से अमेरिका और वियतनाम के बीच संबंध सामान्य हुए। आज वे पुरानी कटुता को पीछे छोड़कर आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन वियतनाम की उत्तर कोरिया के साथ यह नई सक्रियता वैश्विक राजनीति में नए समीकरण पैदा कर रही है।
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