NATO के नए प्लान से भड़का उत्तर कोरिया, बोला- यह युद्ध की खुली तैयारी है विश्व एक घंटा पहले 2
रूस-यूक्रेन और ईरान जैसे वैश्विक संकटों के बीच, नाटो के फ्यूल सप्लाई चेन प्लान ने उत्तर कोरिया को नाराज कर दिया है। प्योंगयांग ने इसे दुनिया में कहीं भी युद्ध छेड़ने की साजिश करार दिया है।

तीसरे विश्व युद्ध की आहट?

दुनिया इस समय रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे गंभीर तनावों के दौर से गुजर रही है। इन वैश्विक संघर्षों के बीच उत्तर कोरिया ने एक नई चेतावनी जारी की है। दरअसल, नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन यानी NATO के एक हालिया कदम ने किम जोंग उन के शासन को पूरी तरह से बौखला दिया है। उत्तर कोरिया का मानना है कि नाटो का यह फैसला किसी बड़े युद्ध की सीधी तैयारी का संकेत है और यह संगठन अब एक अधिक आक्रामक सैन्य गुट के रूप में बदलता जा रहा है।

फ्यूल सप्लाई चेन प्लान पर विवाद

विवाद की मुख्य वजह नाटो द्वारा पिछले महीने स्वीकृत फ्यूल सप्लाई चेन कैपेबिलिटी प्रोग्राम प्लान है। इस योजना का आधिकारिक उद्देश्य यूरोप में शीत युद्ध के दौर की सैन्य ईंधन पाइपलाइनों और विशाल स्टोरेज नेटवर्कों का आधुनिकीकरण करना है। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी KCNA ने इस योजना की तीखी आलोचना की है। प्योंगयांग का आरोप है कि नाटो सदस्य देशों ने शुरुआत में लागत को लेकर आपस में मतभेद किए थे, लेकिन अब वे सब युद्ध के लिए रणनीतिक ईंधन भंडार तैयार करने पर सहमत हो गए हैं, जो भविष्य में बड़े संघर्ष की आहट है।

युद्ध भड़काने का एजेंडा

उत्तर कोरिया ने अपनी आधिकारिक टिप्पणी में दावा किया है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी नाटो की इस पहल को रूस के साथ संभावित युद्ध की तैयारियों के रूप में देख रहा है। एजेंसी का आरोप है कि नाटो का असली मकसद भविष्य में होने वाली जंगों के लिए बड़े पैमाने पर ईंधन और युद्ध सामग्री का जखीरा जमा करना है। उत्तर कोरिया ने कहा कि नाटो का इरादा दुनिया के किसी भी हिस्से में कभी भी युद्ध की आग भड़काने का है। संगठन की स्थापना के कई दशकों बाद पहली बार नाटो इतनी खुलेआम युद्ध की तैयारी करता हुआ दिखाई दे रहा है, जो वैश्विक शांति के लिए खतरा है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दखल

उत्तर कोरिया ने नाटो पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य पहुंच बढ़ाने का गंभीर आरोप भी लगाया है। प्योंगयांग का तर्क है कि नाटो गठबंधन उन देशों के साथ मिलकर कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास लगातार भड़काऊ सैन्य प्रदर्शन कर रहा है, जो उत्तर कोरिया के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया रखते हैं। उत्तर कोरियाई प्रशासन ने नाटो की गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए रखी है, खासकर तब से जब से खबरें आई हैं कि उत्तर कोरिया ने यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद के लिए अपने सैनिक भेजे हैं।

सैन्य अभ्यास को बताया सबूत

अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उत्तर कोरिया ने हाल ही में हवाई द्वीपसमूह के निकट संपन्न हुए रिमपैक (RIMPAC) सैन्य अभ्यास का हवाला दिया। इस द्विवार्षिक अभ्यास में जर्मनी और इटली जैसे कई नाटो सदस्य देशों ने सक्रिय रूप से भाग लिया था। उत्तर कोरिया का कहना है कि यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि नाटो अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र को भी एक संभावित युद्धक्षेत्र के रूप में देख रहा है।

नाटो के पतन की भविष्यवाणी

उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि नाटो का वास्तविक और आक्रामक स्वरूप अब दुनिया के सामने पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है। एजेंसी ने बयान जारी कर कहा है कि युद्ध को बढ़ावा देने की नाटो की यह नीति वास्तव में उसके अपने पतन को ही तेज करने वाली साबित होगी। यूक्रेन को दी जा रही लगातार सैन्य सहायता और अब ईंधन पाइपलाइनों के विस्तार की योजना ने उत्तर कोरिया के साथ-साथ कई अन्य देशों की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो नाटो के इस नए रूप को वैश्विक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती मान रहे हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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