विश्व
एक घंटा पहले
2
विचारों
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस्तेमाल हुए जापानी कार्गो जहाज होफुकु मारू का मलबा आखिरकार खोज लिया गया है। समुद्री पुरातत्वविदों और इतिहासकारों की एक टीम का दावा है कि उन्होंने फिलीपींस के पश्चिमी तट के पास, ज़ाम्बलेस प्रांत के समुद्र में इस जहाज के अवशेष ढूंढ निकाले हैं। यह कोई साधारण जहाज नहीं था। इसे 'हेलशिप' यानी नरक का जहाज कहा जाता था, क्योंकि जापान युद्ध के दौरान ऐसे जहाजों का प्रयोग युद्धबंदियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए करता था।
पूरी दुनिया में क्यों मची है चर्चा
द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुए 80 साल से ज्यादा का समय गुजर चुका है। ऐसे में शोधकर्ताओं का इतिहास के एक अहम और भुला दिए गए हिस्से तक पहुंचने का दावा दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है।
इन जहाजों को नरक का जहाज कहे जाने के पीछे की एक बड़ी वजह यह थी कि इन पर कैदियों को बेहद अमानवीय हालात में रखा जाता था। प्यास, भूख, भीषण गर्मी, मारपीट और बीमारियों के चलते कई कैदी रास्ते में ही दम तोड़ देते थे। इतना ही नहीं, कई बार मित्र देशों को यह जानकारी ही नहीं होती थी कि इन जहाजों में उन्हीं के सैनिक कैदी बनाकर रखे गए हैं, और वे इन पर हमला कर देते थे।
हादसों में मारे गए थे करीब 20 हजार सैनिक
इतिहासकारों का अनुमान है कि ऐसे हेलशिप जहाजों में 1.25 लाख से ज्यादा मित्र देशों के सैनिकों को ढोया गया था। इनमें से लगभग 20 हजार सैनिकों की मौत यात्रा के दौरान ही हो गई थी।
21 सितंबर 1944 को होफुकु मारू के साथ भी ऐसी ही घटना हुई थी। उस समय जहाज में करीब 1000 ब्रिटिश और डच युद्धबंदी सवार थे। हमला होते ही यह जहाज तीन मिनट से भी कम समय में समुद्र में समा गया और 1000 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। जहाज के निचले होल्ड्स में ही करीब 1000 ब्रिटिश और डच कैदी मौजूद थे।
सालों तक चली खोज
लंबे समय तक यह राज ही बना रहा कि जहाज का मलबा आखिर कहां पड़ा है। लेकिन हेलशिप मेमोरियल फाउंडेशन को अमेरिकी और जापानी सैन्य रिकॉर्ड में कुछ ऐसे दस्तावेज मिले, जिनसे संकेत मिला कि जहाज उस जगह से करीब 30 मील दूर डूबा था, जहां पहले माना जाता था।
इसके बाद जानकारों की एक टीम ने खोज अभियान शुरू किया। सोनार तकनीक की मदद से समुद्र की गहराई में एक अज्ञात मलबे का पता चला। बाद में गोताखोरों ने नीचे उतरकर जांच की, जहां उन्हें मानव अवशेष भी मिले।
कैसे हुई पहचान
जानकारों के मुताबिक मलबे का आकार, उसकी स्थिति और उसके दो हिस्सों में टूटे होने का तरीका पूरी तरह होफुकु मारू के रिकॉर्ड से मेल खाता है। यह जहाज समुद्र की सतह से करीब 160 फीट नीचे पड़ा हुआ है।
हेलशिप मेमोरियल फाउंडेशन के शोधकर्ता टिम बेकनशॉल का कहना है कि सारे सबूत एक ही दिशा में इशारा कर रहे हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि यह मलबा होफुकु मारू का ही है।
इस ऐतिहासिक खोज को डिस्कवरी चैनल के कार्यक्रम 'एक्सपीडिशन अननोन' के एक विशेष एपिसोड में दिखाया जाएगा।
Comments
0 comment