क्या 160 साल पुरानी पेंटिंग में छिपा है आईफोन का रहस्य? सोशल मीडिया पर छिड़ी टाइम ट्रैवल की बहस विश्व 4 घंटे पहले 7
ऑस्ट्रियाई कलाकार की एक पुरानी पेंटिंग इन दिनों इंटरनेट पर सुर्खियां बटोर रही है, जिसमें एक युवती के हाथ में मौजूद वस्तु बिल्कुल स्मार्टफोन जैसी दिखाई दे रही है।

पेंटिंग देख लोग हुए हैरान

आज के दौर और बीते हुए जमाने की जीवनशैली में जमीन आसमान का अंतर है। जहां आज के लोग अपनी ज्यादातर गतिविधियां इंटरनेट और मोबाइल स्क्रीन के इर्द-गिर्द बिताते हैं, वहीं पुरानी दुनिया काफी अलग थी। हालांकि, एक ऐसी पेंटिंग सामने आई है जिसने आधुनिक तकनीक और अतीत के बीच के फासले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पेंटिंग को देखकर लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि क्या वाकई 160 साल पहले भी आईफोन जैसी कोई चीज मौजूद थी। सुनने में यह बात भले ही किसी काल्पनिक कहानी जैसी लगे, लेकिन इस पेंटिंग के दृश्य बेहद दिलचस्प हैं।

रहस्यमयी पेंटिंग और उसकी कहानी

कल्पना कीजिए कि आप 19वीं सदी की एक पुरानी पेंटिंग को गौर से देख रहे हैं। उसमें एक युवती रास्ते पर आगे बढ़ती नजर आती है, लेकिन उसका ध्यान सामने के रास्ते पर नहीं, बल्कि उसके दोनों हाथों में थमी एक छोटी सी चीज पर है। उसके बैठने का अंदाज और उंगलियों की बनावट बिल्कुल वैसी ही है, जैसे आज के दौर में कोई युवती अपने स्मार्टफोन को पकड़कर उसे चला रही हो या टाइप कर रही हो। इस कलाकृति का नाम 'द एक्सपेक्टेड वन' है, जिसे ऑस्ट्रियाई कलाकार फर्डिनेंड जॉर्ज वाल्डम्यूलर ने चित्रित किया था। यह पेंटिंग वर्तमान में जर्मनी के म्यूनिख शहर स्थित न्यू पिनाकोथेक म्यूजियम की शोभा बढ़ा रही है।

क्या कला में कैद हो गया भविष्य?

पेंटिंग में दिखाई दे रहा परिदृश्य एक ग्रामीण इलाके का है, जहां हरियाली और पहाड़ियां नजर आ रही हैं। युवती के हाथ में मौजूद वह आयताकार वस्तु और उसके नीचे झुके सिर का कोण लोगों को हैरान कर रहा है। पहली नजर में यह किसी आधुनिक फोन जैसा लगता है। साल 2017 में जब यह तस्वीर इंटरनेट पर वायरल हुई, तो लोगों ने सोशल मीडिया पर टाइम ट्रैवल यानी समय यात्रा को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगानी शुरू कर दीं। लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि क्या कलाकार ने गलती से भविष्य की तकनीक को अपनी पेंटिंग में अमर कर दिया था।

विशेषज्ञों की क्या है राय?

ग्लासगो के निवासी पीटर रसेल ने भी इस अद्भुत समानता पर अपना तर्क रखा है। उनका मानना है कि आज का दर्शक जब भी इस पेंटिंग को देखता है, तो उसके दिमाग में सबसे पहले स्मार्टफोन का ही ख्याल आता है। हालांकि, 19वीं सदी में इस तस्वीर को देखने वाला कोई भी सामान्य व्यक्ति इसे एक प्रार्थना-पुस्तक या कोई छोटी किताब ही समझता। जानकारों का यह भी स्पष्ट मत है कि युवती के हाथों में मौजूद वस्तु वास्तव में उस दौर की एक पॉकेट बुक ही है। उस समय ऐसी छोटी किताबें आम थीं और लोग उन्हें पढ़ने के लिए हाथ में पकड़ते थे।

समय से डेढ़ सदी आगे

यह पूरा मामला इसलिए भी रहस्यमयी बना हुआ है क्योंकि आईफोन का पहली बार आगमन दुनिया में साल 2007 में हुआ था। वहीं, अगर हम शुरुआती स्मार्टफोन की बात करें जैसे नोकिया 9000 कम्युनिकेटर, तो भी यह पेंटिंग उस दौर की तकनीक से बहुत पहले बनी थी। अगर तर्क के तौर पर मान लिया जाए कि वह कोई स्मार्टफोन था, तो यह उस समय की तकनीक से करीब 160 साल आगे की बात होती। हालांकि, इस तरह की घटनाएं पहली बार सामने नहीं आई हैं, साल 2016 में भी इसी तरह की मिलती-जुलती एक और तस्वीर ने लोगों को आश्चर्यचकित किया था। क्या यह मात्र एक संयोग है या फिर कोई ऐतिहासिक भ्रम, इसका सटीक जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है, लेकिन यह पेंटिंग चर्चा का विषय बनी हुई है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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