बिश्केक शिखर सम्मेलन में भारत का दबदबा: आतंकवाद पर बना कड़ा रुख, हर प्रस्ताव को मिली मंजूरी विश्व एक घंटा पहले 4
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक जीत हुई है, जहाँ घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति और नवाचार संबंधी प्रस्तावों को सर्वसम्मति से शामिल किया गया है।

बिश्केक में भारत की कूटनीतिक गूंज

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में संपन्न हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भारत ने अपनी एक अलग छाप छोड़ी है। इस सम्मेलन के दौरान जारी साझा घोषणापत्र में भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं को न केवल जगह मिली, बल्कि उन्हें वैश्विक मंच पर पूरी तरह स्वीकार भी किया गया। आतंकवाद के मसले पर भारत का रुख अब संगठन का आधिकारिक स्वर बन गया है, जो भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय धमक को दर्शाता है।

आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ साझा रणनीति

शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने स्पष्ट शब्दों में आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का संकल्प लिया है। घोषणापत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि किसी भी आतंकवादी, अलगाववादी या चरमपंथी संगठन का उपयोग अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए करने की कोशिशों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारत के दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए सभी देशों ने आतंकवाद के किसी भी रूप के प्रति 'शून्य सहनशीलता' (जीरो टॉलरेंस) की नीति अपनाने पर मुहर लगाई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो टूक चेतावनी

बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद सख्त लहजा अपनाया। उन्होंने किसी देश का नाम लिए बिना पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि आतंकवाद को अब सरकारी नीति के एक औज़ार या हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का दौर खत्म हो चुका है। यह चेतावनी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले एक साल के लिए SCO की अध्यक्षता पाकिस्तान के हाथों में जाने वाली है। भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड को स्वीकार नहीं करेगा और सीमा पार आतंकवाद के सभी स्वरूपों के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होना होगा।

विज्ञान, नवाचार और युवाओं पर केंद्रित भारत की पहल

घोषणापत्र में केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भारत द्वारा की गई पहलों को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। भारत ने SCO के मंच पर युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और 'SCO यंग साइंटिस्ट्स फोरम' को नियमित रूप से आयोजित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदस्य देशों ने सहर्ष स्वीकार किया। यह मंच भारत की ही एक बड़ी कूटनीतिक पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच वैज्ञानिक शोध और नवाचार को गति देना है।

सांस्कृतिक संवाद और भाषा में बड़ा बदलाव

सम्मेलन में भारत के प्रभाव का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि साल 2026 में भारत में आयोजित होने वाले 'SCO सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम' का नेताओं ने स्वागत किया है। इसके साथ ही, युवाओं के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए 'SCO यंग ऑथर्स कॉन्फ्रेंस' के योगदान को भी मंच पर रेखांकित किया गया। संगठन के कामकाज में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव भी देखने को मिला है। SCO चार्टर में संशोधन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अब अंग्रेजी को संगठन की आधिकारिक और कार्यकारी भाषा के रूप में मान्यता देने की दिशा में ठोस प्रगति हुई है। संक्षेप में, बिश्केक शिखर सम्मेलन भारत के लिए एक बड़ी सफलता रहा, जहां आतंकवाद के खिलाफ उसका सख्त स्टैंड, तकनीक और युवा शक्ति को बढ़ावा देने के उसके विजन ने SCO के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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