हैती में बवाल: स्थानीय गैंग्स ने विदेशी सैनिकों को बनाया बंधक, अल सल्वाडोर ने रातों-रात उतारे 1,000 जवान विश्व एक घंटा पहले 4
कैरेबियाई देश हैती में जारी हिंसा के बीच वहां तैनात अल सल्वाडोर के चार सैनिकों को स्थानीय अपराधियों ने अगवा कर लिया है। इसके जवाब में राष्ट्रपति नायिब बुकेले ने 1,000 घातक सैनिकों को हैती भेजकर सीधे युद्ध का ऐलान कर दिया है।

हैती में अराजकता और सैन्य दखल

कैरेबियाई द्वीप राष्ट्र हैती इन दिनों गंभीर अस्थिरता और खूनी गैंग-वॉर के दौर से गुजर रहा है। देश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है और सड़कों पर खूंखार अपराधी गिरोहों का कब्जा है। इसी बीच एक बेहद संवेदनशील घटना सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। हैती में संयुक्त राष्ट्र समर्थित मिशन के तहत तैनात अल सल्वाडोर के चार सैनिकों को स्थानीय आपराधिक गैंग्स ने बंधक बना लिया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है और अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बुकेले ने इसका करारा जवाब देने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने अमेरिकी C-130 विमानों के बेड़े की सहायता से रातों-रात करीब 1,000 घातक कमांडो हैती की धरती पर उतार दिए हैं। अब इस पूरे घटनाक्रम ने हैती के अपराधियों और विदेशी सेना के बीच एक सीधी और भीषण जंग की शुरुआत कर दी है।

हैती में कैसे बिगड़े हालात?

हैती की वर्तमान भयावह स्थिति को समझने के लिए हमें साल 2021 की उस घटना पर गौर करना होगा, जब देश के तत्कालीन राष्ट्रपति जोवोनेल मोइस की उनके ही निवास पर निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर के बाद देश की राजनीति और प्रशासनिक ढांचे में शून्य पैदा हो गया, जिसका फायदा उठाकर सशस्त्र अपराधियों ने पूरे देश को अपने नियंत्रण में लेना शुरू कर दिया। आज स्थिति यह है कि राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस और आसपास के लगभग 80 से 90 प्रतिशत इलाकों पर विभिन्न अपराधी गुटों का राज है।

इन गैंग्स के कारण आम नागरिकों का जीवन नर्क बन चुका है। जबरन वसूली, अपहरण, हत्या और हिंसा आम बात हो गई है। इन अत्याचारों से त्रस्त होकर अब तक लगभग 15 लाख लोग अपने घरों को छोड़कर पलायन करने को मजबूर हो चुके हैं। हिंसा के कारण देश में लंबे समय से आम चुनाव तक संपन्न नहीं हो सके हैं। जब हैती की सरकार ने खुद को पूरी तरह असहाय पाया, तो उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बलों को हैती भेजा गया, जिसका प्राथमिक उद्देश्य इन अपराधी गिरोहों का सफाया करना था।

18 अक्टूबर की वह घटना, जिसने बदला सब कुछ

18 अक्टूबर 2026 की तारीख हैती के इतिहास में एक बड़े मोड़ के रूप में दर्ज हो गई है। राजधानी के बाहरी इलाके में अल सल्वाडोर के सैनिकों और तकनीशियनों के एक दल पर गैंग्स ने घात लगाकर जानलेवा हमला कर दिया। राष्ट्रपति नायिब बुकेले के अनुसार, उनके वायुसेना के चार तकनीशियन उस समय बाजार से अपने बेस की ओर लौट रहे थे, तभी अपराधियों ने उन्हें घेर लिया और उनकी गाड़ी को आग के हवाले कर दिया। जान बचाने के लिए उन सैनिकों को जलती हुई गाड़ी से बाहर कूदना पड़ा, लेकिन उसके बाद से वे रहस्यमयी तरीके से लापता हैं। आशंका यही जताई जा रही है कि उन्हें किसी कुख्यात गैंग ने अगवा कर लिया है। हालांकि, हैती के सबसे खूंखार ‘400 मावोजो’ गैंग के सरगना विल्सन जोसेफ ने एक वीडियो जारी कर इन दावों को खारिज किया है और इस हमले में अपनी संलिप्तता से साफ इनकार किया है। इसके बावजूद, राष्ट्रपति बुकेले ने अपने सैनिकों को सुरक्षित छुड़ाने के लिए इसे एक बड़े सैन्य अभियान के रूप में शुरू किया है।

विदेशी सैनिकों का अपहरण: अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला

जब कोई स्थानीय माफिया गिरोह किसी दूसरे देश के सैनिकों को बंधक बनाता है, तो यह वैश्विक मंच पर उस देश की भारी विफलता को दर्शाता है। इसका साफ मतलब है कि वहां की सरकार और सुरक्षा व्यवस्था का कोई अस्तित्व नहीं बचा है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी शर्मिंदगी का कारण बनती है। एक विदेशी सेना के जवानों को चुनौती देना उस देश की संप्रभुता पर सीधा हमला माना जाता है। ऐसी स्थिति में उस देश के पास अपने सैनिकों को छुड़ाने के लिए सीधे सैन्य कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। यही कारण है कि अल सल्वाडोर ने बिना किसी देरी के अपनी विशाल सैन्य टुकड़ी हैती रवाना कर दी है।

अल सल्वाडोर की आक्रामक रणनीति

अपने चार लापता जवानों की खोज और बचाव के लिए अल सल्वाडोर ने 1,000 सैनिकों का एक विशाल दस्ता तुरंत हैती भेजा है। इन सैनिकों को समय पर पहुंचाने के लिए अमेरिका ने अपने शक्तिशाली C-130 ट्रांसपोर्ट विमानों की मदद की है। गौरतलब है कि इस घटना से पहले अल सल्वाडोर के केवल 124 जवान ही हैती में तैनात थे, जिनका मुख्य काम तकनीकी सहायता और घायलों को एयरलिफ्ट करना था। लेकिन अब 1,000 लड़ाकू सैनिकों की सीधी एंट्री से अल सल्वाडोर इस पूरे संघर्ष में एक प्रमुख खिलाड़ी बन गया है। राष्ट्रपति नायिब बुकेले अपने देश में ‘गैंग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस’ की नीति के लिए वैश्विक स्तर पर चर्चित हैं। उन्होंने अपने देश में अपराधियों का सफाया कर जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन उन पर सख्त नीतियों को लेकर सवाल भी उठाते रहे हैं।

यूएन मिशन की विफलता और निजी सुरक्षा कंपनियों की एंट्री

हैती में चल रहे इस मिशन की विफलता के पीछे मुख्य कारण यूएन की सुस्ती और इच्छाशक्ति की कमी को माना जा रहा है। शांति सेना में कुल 5,000 से अधिक सैनिक तैनात होने थे, लेकिन एक साल बाद भी वहां महज 2,000 के करीब जवान ही पहुंच पाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र के पास इन गैंग्स को जड़ से खत्म करने के लिए आवश्यक राजनीतिक और सैन्य ताकत नहीं है।

यूएन की इस धीमी कार्यप्रणाली से निराश होकर हैती की सरकार ने अब अमेरिका के चर्चित सुरक्षा ठेकेदार और ‘ब्लैकवाटर’ के संस्थापक एरिक प्रिंस की निजी मिलिट्री कंपनी की सेवाएं भी ले रखी हैं। यह कंपनी 2025 से हैती में ड्रोन ऑपरेशन्स के जरिए गैंग्स के ठिकानों पर हमला कर रही है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अल सल्वाडोर के ये नए 1,000 सैनिक शायद संयुक्त राष्ट्र के जटिल और ढीले ढांचे के अधीन रहकर काम न करें। यह संभावना जताई जा रही है कि वे एरिक प्रिंस की प्राइवेट आर्मी के साथ मिलकर अपने लापता सैनिकों की तलाश के लिए एक आक्रामक और स्वतंत्र सैन्य ऑपरेशन चला सकते हैं।

आम नागरिकों की सुरक्षा पर संकट

अल सल्वाडोर की इस त्वरित कार्रवाई का स्वागत करते हुए हैती के स्थानीय मानवाधिकार समूहों ने एक चेतावनी भी जारी की है। ‘नेशनल ह्यूमन राइट्स डिफेंस नेटवर्क’ के प्रमुख पियरे एस्परेंस का कहना है कि सैन्य तैनाती से गैंग्स पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी, लेकिन सैनिकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ऑपरेशन के दौरान बेकसूर नागरिक न मारे जाएं। उनका तर्क है कि अपराधी इलाकों में रहने वाला हर व्यक्ति गैंगस्टर नहीं होता, इसलिए सैन्य कार्रवाई बेहद सटीक होनी चाहिए।

क्या हैती में नए युद्ध का आगाज हो गया है?

1,000 सैनिकों के पहुंचने के साथ ही हैती में युद्ध का एक नया और निर्णायक अध्याय शुरू हो गया है। अगर लापता सैनिकों का सुराग मिल जाता है, तो इसके बाद अल सल्वाडोर की सेना हैती के खतरनाक गैंग्स के खिलाफ सीधे और लंबे सैन्य संघर्ष में उतर सकती है। फिलहाल, पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी और कैरेबियाई क्षेत्र की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अल सल्वाडोर के जवान हैती को अपराधियों के इस खौफनाक चंगुल से मुक्त करा पाएंगे, या फिर हैती का यह आंतरिक संघर्ष उन्हें भी एक लंबी और चुनौतीपूर्ण जंग में उलझा देगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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