म्यांमार में आधी रात को लगे भूकंप के तेज झटके, 4.6 की तीव्रता से हिल उठी धरती विश्व एक घंटा पहले 5
भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में शनिवार देर रात भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय लोग दहशत में आकर अपने घरों से बाहर निकल आए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.6 मापी गई है।

म्यांमार में आधी रात को महसूस हुई धरती की हलचल

भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में शनिवार देर रात भूकंप के तेज झटकों ने लोगों की नींद उड़ा दी। आधी रात के समय अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा के चलते स्थानीय निवासी बुरी तरह सहम गए। जैसे ही धरती में कंपन महसूस हुआ, लोग अपनी जान बचाने के लिए घबराकर घरों से बाहर सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ने लगे। विशेषज्ञों के अनुसार, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.6 मापी गई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब तिब्बत और महाराष्ट्र के हिंगोली में भी हाल ही में भूकंपीय हलचल दर्ज की गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल है।

भूकंप का केंद्र और समय

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र यानी NCS से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह भूकंप भारतीय समयानुसार 3 अक्टूबर 2026 को रात 11 बजकर 42 मिनट पर दर्ज किया गया था। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि भूकंप का केंद्र जमीन की सतह से 120 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। चूँकि भूकंप की गहराई काफी अधिक थी, इसलिए सतह पर इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। फिलहाल, इस भूकंप के कारण किसी भी प्रकार के जान-माल की हानि या बड़े नुकसान की कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। भूकंप की तीव्रता और गहराई से संबंधित ये सभी आंकड़े NCS द्वारा साझा किए गए हैं।

हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता

विशेषज्ञों का मानना है कि पूरा हिमालयी बेल्ट भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील है और म्यांमार भी इसी भूकंपीय जोन का हिस्सा है। भारत के सिस्मिक जोन मैप के वर्गीकरण के अनुसार, हिमालय का संपूर्ण क्षेत्र भूकंप के सबसे अधिक जोखिम वाले जोन यानी जोन-VI में आता है। यह जोन अत्यधिक भूगर्भीय हलचल और शक्तिशाली भूकंपों की संभावना को दर्शाता है। इसके अलावा, लद्दाख के उत्तर-पूर्वी हिस्से का एक छोटा क्षेत्र जोन-V में आता है, जो देश में दूसरे सबसे अधिक जोखिम वाली श्रेणी मानी जाती है। क्षेत्र की इसी संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार लगातार अपनी आपदा तैयारियों को दुरुस्त करने में जुटी है।

सरकार की तैयारी और निगरानी

हिमालयी क्षेत्र में भूकंप के बढ़ते खतरों के बीच सरकार ने सुरक्षा और निगरानी के स्तर को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार द्वारा भूकंपीय निगरानी नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है ताकि किसी भी तरह की हलचल का तुरंत पता लगाया जा सके। इसके साथ ही, डेटा संग्रह प्रणालियों को भी आधुनिक बनाया जा रहा है ताकि भूकंप संबंधी आंकड़ों का सटीक और त्वरित विश्लेषण किया जा सके। सरकार का मुख्य उद्देश्य आपदा से पहले की तैयारियों और जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना है।

माइक्रोजोनेशन अध्ययन और नई तकनीक

NCS ने चुनिंदा शहरों में भूकंपीय सूक्ष्म क्षेत्रीकरण यानी माइक्रोजोनेशन अध्ययन पर विशेष जोर दिया है। इस अध्ययन का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर जमीन के अलग-अलग हिस्सों में भूकंप के झटकों की तीव्रता और उनके प्रभाव को बारीकी से समझना है। इससे सुरक्षित भूमि के चयन, भवनों के बेहतर डिजाइन और आपदा जोखिम को कम करने वाली योजनाओं को लागू करने में मदद मिलती है।

इसके अलावा, NCS भारत में भूकंप की पूर्व चेतावनी प्रणाली यानी ईईडब्ल्यू विकसित करने पर भी काम कर रहा है। इस दिशा में एक बड़ी पहल के तहत हिमालयी क्षेत्र में वास्तविक समय में काम करने वाला विशेष भूकंपीय नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है। हिमाचल हिमालय में जमीन की हलचल को ट्रैक करने के लिए 10 पी-अलर्ट उपकरण लगाए गए हैं। साथ ही, वैज्ञानिकों द्वारा ऐसी अत्याधुनिक एल्गोरिदम का परीक्षण किया जा रहा है, जो शुरुआती भूकंपीय तरंगों का पता लगाने, तीव्रता का अनुमान लगाने और संभावित झटकों के बारे में पूर्व चेतावनी देने में सक्षम होंगी।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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