धरती का एक कोना जहां है दूसरी दुनिया का अहसास, खून बहाते पेड़ और 38 भारतीयों के फंसने की अनसुनी कहानी विश्व एक घंटा पहले 6
यमन का सोकोत्रा आइलैंड अपनी रहस्यमयी वनस्पतियों और एलियन जैसी दिखने वाली प्रकृति के लिए मशहूर है। इस द्वीप पर एक समय 38 भारतीय नागरिक भी फंस गए थे, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया था।

धरती पर बसा है एक एलियन लोक

हमारी पृथ्वी पर कई ऐसी जगहें मौजूद हैं जो भौगोलिक और प्राकृतिक रहस्यों से भरी पड़ी हैं। इन स्थानों को देखकर अक्सर ऐसा लगता है कि हम किसी दूसरी दुनिया या दूसरे ग्रह पर आ गए हैं। हिंद महासागर में स्थित यमन का सोकोत्रा आइलैंड इसी तरह का एक अनोखा स्थान है। यह आइलैंड किसी बाहरी दुनिया के ग्रह जैसा दिखाई देता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यहाँ की वनस्पति है, जो दुनिया के किसी अन्य हिस्से में देखने को नहीं मिलती। इसी अलगाव और अनोखेपन के कारण यह जगह दुनिया भर के शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए एक पहेली और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

ड्रैगन ब्लड ट्री का रहस्य

सोकोत्रा की पहचान यहाँ पाए जाने वाले प्रसिद्ध ड्रैगन ब्लड ट्री से है। इन पेड़ों की बनावट सामान्य पेड़ों से काफी अलग होती है। इनकी शाखाएं ऊपर की तरफ इस तरह फैली होती हैं कि वे एक उल्टे छाते का आकार ले लेती हैं। यदि आप इन्हें दूर से देखेंगे, तो ऐसा महसूस होगा जैसे किसी काल्पनिक दुनिया के बड़े-बड़े छाते धरती पर उग आए हों। इन पेड़ों को ड्रैगन ब्लड ट्री कहे जाने के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प वैज्ञानिक कारण है। जब इन पेड़ों की छाल या इनके तने को किसी तरह की चोट पहुँचती है या इन्हें काटा जाता है, तो इनसे एक गाढ़ा लाल रंग का तरल पदार्थ निकलता है। यह तरल हूबहू खून जैसा दिखाई देता है, जिसे रेजिन कहा जाता है। इसी विचित्र विशेषता के कारण इन्हें ड्रैगन ब्लड ट्री का नाम दिया गया है।

जब 38 भारतीय फंस गए थे इस आइलैंड पर

सोकोत्रा आइलैंड का नाम केवल उसकी प्रकृति के लिए ही नहीं, बल्कि एक कठिन बचाव अभियान के लिए भी जाना जाता है। मई 2018 में जब इस क्षेत्र में भयंकर चक्रवात मेकुनु ने तबाही मचाई थी, तब सोकोत्रा में कुल 38 भारतीय नाविक फंस गए थे। प्राकृतिक आपदा के कारण वहां फंसे नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाने के लिए भारतीय नौसेना ने एक साहसी मिशन को अंजाम दिया था। इस बचाव अभियान का नाम ऑपरेशन निस्तार रखा गया था। भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सुनयना की मदद से उन 38 भारतीयों को सफलतापूर्वक द्वीप से सुरक्षित निकाला गया था, जो चक्रवात के बाद वहां फंस गए थे।

अनोखी जैव विविधता और रेगिस्तानी गुलाब

ड्रैगन ब्लड ट्री के अलावा, सोकोत्रा की वनस्पति में और भी कई अद्भुत पौधे शामिल हैं। यहाँ बोतल के आकार वाले तने वाले रेगिस्तानी गुलाब के पेड़ पाए जाते हैं। ये पेड़ बहुत ही अनोखे तरीके से विकसित होते हैं। इनका तना काफी मोटा होता है, जो पानी जमा करने और उसे संरक्षित रखने का काम करता है। यह विशिष्ट बनावट इन पौधों को रेगिस्तानी वातावरण में जीवित रहने में मदद करती है। चूंकि यह द्वीप लंबे समय तक मुख्य भू-भाग से भौगोलिक रूप से कटा रहा, इसलिए यहाँ के पेड़-पौधों और जीवों का विकास दुनिया के बाकी हिस्सों से बिल्कुल अलग दिशा में हुआ है। यहाँ की जलवायु और प्राकृतिक परिस्थितियाँ ऐसी कई प्रजातियों के लिए अनुकूल हैं, जो पृथ्वी पर कहीं और नहीं पाई जातीं।

विश्व धरोहर का दर्जा

सोकोत्रा का महत्व केवल उसके अजीब पेड़ों तक सीमित नहीं है। यहाँ के तटीय इलाकों का साफ नीला पानी और सफेद रेत इसे एक प्राकृतिक जन्नत बनाती है। इसके अलावा, यहाँ कई ऐसी पक्षी प्रजातियां, सरीसृप और कीट मिलते हैं जो केवल इसी द्वीप तक सीमित हैं। यहाँ का समुद्री और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र काफी संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। इन सभी विशेषताओं को देखते हुए, साल 2008 में यूनेस्को ने सोकोत्रा द्वीपसमूह को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया था। यह दर्जा इसकी असाधारण जैव विविधता और दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए मिला है, जिससे दुनिया भर में इस आइलैंड की विशिष्टता को आधिकारिक मान्यता प्राप्त हुई।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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