हिमाचल प्रदेश
एक घंटा पहले
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आज के डिजिटल युग में जब भारत के कोने-कोने में UPI, नेट बैंकिंग और डिजिटल वॉलेट का डंका बज रहा है, वहीं देश का एक हिस्सा ऐसा भी है जहां आज भी व्यापार के लिए किसी भी तरह की मुद्रा का उपयोग नहीं किया जाता। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित भारत-चीन सीमा के शिपकी-ला दर्रे पर एक बार फिर ऐतिहासिक व्यापार शुरू हो चुका है। करीब छह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद शुरू हुए इस सीमांत व्यापार की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां न तो भारतीय रुपये चलते हैं, न चीनी युआन, न अमेरिकी डॉलर और न ही किसी प्रकार का डिजिटल या नकद भुगतान होता है। यहां आज भी 329 साल पुरानी ऐतिहासिक वस्तु विनिमय प्रणाली जिसे अंग्रेजी में बार्टर सिस्टम कहा जाता है, उसके माध्यम से व्यापारिक लेन-देन का सिलसिला बखूबी जारी है।
छह साल के लंबे अंतराल के बाद फिर शुरू हुआ सीमांत व्यापार
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण वर्ष 2020 से ही भारत और चीन के बीच होने वाला यह सीमांत व्यापार पूरी तरह से बंद पड़ा था। अब लंबे समय के बाद, 1 अगस्त को इस व्यापार को दोबारा शुरू करने के लिए औपचारिक हरी झंडी दिखा दी गई है। हिमाचल प्रदेश सरकार के राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने पूह उपमंडल के अंतर्गत आने वाले सीमावर्ती क्षेत्र की ग्राम पंचायत नमज्ञा में नवनिर्मित छुप्पन ट्रेड मार्ट का भव्य उद्घाटन किया। इस आधुनिक ट्रेड मार्ट का निर्माण करीब 1 करोड़ 70 लाख रुपये की लागत से किया गया है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने सीमा पार से व्यापार करने वाले स्थानीय व्यवसायियों को नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आयात और निर्यात से जुड़े सभी नियमों का पालन करना हर व्यापारी की नैतिक जिम्मेदारी है। इस दौरान पूंह व्यापार मंडल के अध्यक्ष हिशे नेगी ने मंत्री के समक्ष दोनों देशों के बीच आयात और निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की सूची का दायरा बढ़ाने की मांग रखी। कैबिनेट मंत्री ने व्यापारियों की इस मांग को ध्यानपूर्वक सुना और इस दिशा में उचित कदम उठाने का आश्वासन भी दिया।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार और मजबूत होगी आर्थिकी
राजस्व मंत्री ने इस ऐतिहासिक व्यापार के पुनः संचालन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिपकी-ला सीमा पार व्यापार शुरू होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। इसके साथ ही, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे इस दुर्गम क्षेत्र से पलायन को रोकने में मदद मिलेगी।
क्या है बार्टर सिस्टम और 1697 की ऐतिहासिक 'गामग्या' परंपरा?
शिपकी-ला दर्रे पर होने वाले इस व्यापार का इतिहास बेहद समृद्ध और दिलचस्प है। भारत और चीन के बीच इस मार्ग से सीमा व्यापार करीब वर्ष 1697 से निरंतर चला आ रहा है। इस व्यापार में वस्तु विनिमय प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इसका अर्थ यह है कि इस व्यापारिक लेन-देन में कोई नकद राशि या डिजिटल ट्रांजैक्शन नहीं होता, बल्कि सामान के बदले सामान का आदान-प्रदान किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यापारी को चावल की आवश्यकता है और उसके पास अतिरिक्त मात्रा में गेहूं उपलब्ध है, तो वह गेहूं देकर चावल प्राप्त करता है।
इतिहासकारों के अनुसार, वर्ष 1697 में तत्कालीन तिब्बत प्रशासन और बुशहर रियासत के बीच एक महत्वपूर्ण संधि हुई थी। यह संधि बुशहर रियासत के तत्कालीन प्रतापी राजा केहरी सिंह और तिब्बत के बीच संपन्न हुई थी। हालांकि, इस ऐतिहासिक संधि का कोई लिखित दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। यह पूरा व्यापारिक समझौता केवल पारंपरिक मौखिक शपथ प्रथा जिसे स्थानीय भाषा में 'गामग्या' परंपरा कहा जाता है, के आधार पर ही सदियों से पूरी विश्वसनीयता के साथ चल रहा है। आज 329 वर्षों के बाद भी दोनों ओर के लोग इस पारंपरिक समझौते और आपसी विश्वास का पूरा सम्मान करते हैं।
भारत और चीन के बीच होने वाला आयात-निर्यात
इस अनूठी सीमांत व्यापार प्रणाली के अंतर्गत भारत और चीन के व्यापारी कई प्रकार की स्वदेशी वस्तुओं का आदान-प्रदान करते हैं। इस व्यापार की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- भारत की ओर से चीनी सीमा में लगभग 36 वस्तुओं का निर्यात किया जाता है।
- चीन की ओर से भारत में करीब 15 वस्तुओं का आयात किया जाता है।
- इस लेन-देन में मुख्य रूप से ऊन, पशु, जड़ी-बूटियां, खाद्य पदार्थ और स्थानीय स्तर पर निर्मित हस्तशिल्प की वस्तुएं शामिल होती हैं।
प्रसारण और प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति जताया आभार
इस अवसर पर नमज्ञा ग्राम पंचायत की प्रधान अंजलि नेगी ने मुख्य अतिथि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया और उन्हें अपने सीमांत क्षेत्र की विभिन्न बुनियादी समस्याओं और आवश्यकताओं से अवगत कराया। राजस्व मंत्री ने स्थानीय ग्रामीणों की सभी समस्याओं को अत्यंत गंभीरता से सुना और उनमें से अधिकांश का मौके पर ही त्वरित निपटारा करने के आदेश जारी किए।
दूसरी तरफ, किन्नौर जिले के उपायुक्त अर्थात DC डॉ अमित कुमार शर्मा ने सीमांत व्यापार को सफलतापूर्वक दोबारा शुरू करने में अपना अमूल्य सहयोग देने के लिए भारतीय सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल अर्थात ITBP, सीमा शुल्क विभाग और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से जुड़े सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का विशेष रूप से आभार प्रकट किया।
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