ऋषिकेश के पुराने बाजार की वो 4 मशहूर दुकानें, जहां आज भी कायम है दशकों पुराना स्वाद जीवनशैली एक घंटा पहले 5
ऋषिकेश में आधुनिक कैफे और नए रेस्टोरेंट के बीच कुछ ऐसी पुरानी दुकानें हैं, जिन्होंने अपनी गुणवत्ता और स्वाद के दम पर पीढ़ियों से ग्राहकों का भरोसा बनाए रखा है।

ऋषिकेश की सांस्कृतिक धरोहर और पुरानी दुकानें

योग नगरी के नाम से पूरी दुनिया में विख्यात ऋषिकेश शहर वक्त के साथ तेजी से विकसित हुआ है। शहर के बाजार का स्वरूप बदला है और नए जमाने के आधुनिक कैफे तथा रेस्टोरेंट की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। हालांकि, इन बदलावों के बीच कुछ ऐसी पुरानी दुकानें आज भी अपनी जगह मजबूती से टिकी हुई हैं, जिनके लिए कहा जा सकता है कि समय वहां जाकर जैसे ठहर सा गया है। ये दुकानें केवल व्यापार का जरिया नहीं हैं, बल्कि ये शहर की पुरानी यादों और खानपान की समृद्ध संस्कृति को संजोए हुए हैं। चोटीवाला से लेकर पंडित जी नाश्ते वाले तक, इन प्रतिष्ठानों ने पीढ़ियों से ग्राहकों के बीच अपनी जगह बनाए रखी है।

चोटीवाला का गौरवशाली इतिहास

ऋषिकेश के राम झूला इलाके में स्थित चोटीवाला आज भी शहर की एक प्रमुख पहचान बना हुआ है। इस रेस्टोरेंट की शुरुआत लगभग 67 साल पहले हुई थी और तब से लेकर आज तक यह अपने सात्विक भोजन और अनूठे अंदाज के लिए प्रसिद्ध है। यहां आने वाले पर्यटक और स्थानीय निवासी केवल पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि चोटीवाले बाबा की उस प्रसिद्ध छवि और इस स्थान से जुड़ी यादों को अनुभव करने आते हैं। भले ही शहर में नए रेस्टोरेंट खुल गए हों, लेकिन चोटीवाला की सादगी और स्वाद आज भी लोगों को अपनी ओर खींच लाता है। कई परिवार ऐसे हैं जो वर्षों से यहां आ रहे हैं और अब उनकी अगली पीढ़ी भी इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए यहां का स्वाद लेना पसंद करती है। यह दुकान ऋषिकेश की खानपान संस्कृति का एक अटूट हिस्सा बन चुकी है।

पंडित जी नाश्ते वाले का 86 साल का सफर

त्रिवेणी घाट बाजार में स्थित पंडित जी नाश्ते वाले की लोकप्रियता आज भी उसी प्रकार बरकरार है, जैसी दशकों पहले हुआ करती थी। इस दुकान की नींव साल 1940 में रखी गई थी। उस दौर की तुलना में आज का ऋषिकेश काफी व्यस्त और बड़ा हो चुका है, लेकिन इस दुकान की कार्यप्रणाली और स्वाद में बदलाव नहीं आया है। 86 साल पुरानी यह दुकान इस बात का प्रमाण है कि यदि गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए, तो ग्राहक कभी कम नहीं होते। यहां आज भी पुराने ग्राहकों की भीड़ उमड़ती है, जो अपने बच्चों को भी इस पुराने स्वाद से परिचित कराने के लिए साथ लाते हैं। त्रिवेणी घाट के आसपास कई नए विकल्प होने के बावजूद, पंडित जी के नाश्ते का अपना अलग ही रुतबा है।

अग्रवाल नमकीन की 57 साल पुरानी परंपरा

तिलक रोड पर स्थित अग्रवाल नमकीन का स्वाद ऋषिकेश के लोगों के जहन में लगभग 57 वर्षों से बसा हुआ है। इसकी शुरुआत साल 1969 के आसपास हुई थी। शहर के बाजार में आए बड़े बदलावों के बाद भी इस दुकान ने अपनी मौलिकता को बनाए रखा है। स्थानीय निवासियों के लिए यहां से नमकीन खरीदना केवल एक जरूरत नहीं, बल्कि उनके दैनिक जीवन का एक अहम हिस्सा और पुरानी आदत बन चुका है। अग्रवाल नमकीन की सबसे खास बात यह है कि यहां आने वाली भीड़ में आज भी वही पुराने चेहरे दिखाई देते हैं, जिन्होंने अपने परिवार के साथ यहां से सामान लेने की शुरुआत की थी। आज वे अपने बच्चों और पोते-पोतियों के साथ यहां आते हैं, जो यह दर्शाता है कि स्वाद और भरोसे का रिश्ता पीढ़ी-दर-पीढ़ी कैसे कायम रहता है।

हीरा लाल के छोले भटूरे का जादू

हीरा लाल मार्ग पर स्थित एक और जानी-मानी दुकान है जो अपने छोले भटूरे के लिए पूरे क्षेत्र में मशहूर है। साल 1972 में शुरू हुई इस दुकान का सफर लगभग 54 साल पुराना है। चार दशक से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी छोले भटूरे का यह स्वाद ऋषिकेश के लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। पुरानी गलियों में स्थित यह दुकान आज भी शहर के खानपान की दास्तां को बखूबी बयां करती है। आज बाजार में प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है, लेकिन हीरा लाल के छोले भटूरे आज भी अपनी विशिष्ट पहचान के साथ लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। यहाँ आने वाले ग्राहक अक्सर अपने पुराने दोस्तों या परिवार के साथ बैठते हैं और वर्षों पुराने स्वाद के साथ समय बिताते हैं। यह दुकान केवल एक खाने का स्थान नहीं, बल्कि ऋषिकेश के बदलते बाजार के बीच अपनी पहचान को संजोकर रखने वाली एक मिसाल है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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