शकरकंद ही नहीं, इसके पत्तों की भाजी भी है बेहद लाजवाब, छतरपुर की यह देसी रेसिपी खूब हो रही पसंद जीवनशैली एक घंटा पहले 5
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में सर्दी के मौसम में शकरकंद के पत्तों से बनी भाजी का खूब चलन है। यह भाजी न केवल स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि सेहत के गुणों से भी भरपूर मानी जाती है।

सर्दी में खास है शकरकंद के पत्तों की भाजी

सर्दियों के दस्तक देते ही खानपान की आदतों में बदलाव आना स्वाभाविक है। आमतौर पर लोग शकरकंद को भूनकर या उबालकर खाना पसंद करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी इसके पत्तों की भाजी का स्वाद चखा है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में सर्दियों के दौरान घरों में शकरकंद की पत्तियों से खास भाजी तैयार की जाती है। यह न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि अपने स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण भी स्थानीय लोगों की पहली पसंद बनी हुई है।

क्यों खास है यह भाजी और क्या है इसे बनाने का तरीका

छतरपुर की निवासी रानू सोनी बताती हैं कि उनके क्षेत्र में साल भर तरह-तरह की भाजियां खाने की परंपरा है, लेकिन सर्दियों का मौसम भाजियों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान नौरपा और चना भाजी जैसी कई प्रकार की सब्जियां बाजार में आती हैं, जिनमें शकरकंद की भाजी भी प्रमुख है। इसे स्थानीय लोग दाल के साथ पकाते हैं, जिसके चलते इसे दरभजिया के नाम से भी जाना जाता है। रानू के अनुसार, इस भाजी को बनाने का तरीका काफी सरल है। सबसे पहले ताजी पत्तियों को तोड़कर साफ पानी से अच्छी तरह धोया जाता है और फिर बारीक टुकड़ों में काट लिया जाता है। इसके बाद इसे लहसुन का तड़का लगाकर दाल के साथ पकाया जाता है। इसे मसूर, मूंग या अरहर की दाल के साथ बनाया जा सकता है। इसे अक्सर गीली या रसेदार अवस्था में तैयार किया जाता है, जो खाने में बहुत स्वादिष्ट लगती है।

बाजार में आसानी से क्यों नहीं मिलती

अक्सर देखा जाता है कि शकरकंद की भाजी बाजार में बिकने वाली अन्य सब्जियों की तरह आसानी से उपलब्ध नहीं होती। इसके पीछे मुख्य कारण लोगों में इस सब्जी के बारे में जानकारी का अभाव है। रानू सोनी का कहना है कि वे बचपन से ही अपने मायके में इस भाजी का सेवन कर रही हैं, क्योंकि उनके परिवार में इसे पहले से ही उगाया जाता था। हालांकि गांव और ग्रामीण इलाकों के लोग इससे परिचित हैं, लेकिन शहरों में रहने वाले अधिकांश लोग शकरकंद के पत्तों के गुणों और इसके स्वाद से अब भी अनजान हैं।

घर के आंगन में उगाना है बेहद आसान

रानू ने बताया कि उन्होंने अपने ससुराल में आने के बाद घर के कच्चे आंगन में सब्जियों के साथ-साथ शकरकंद भी उगाना शुरू किया। यह तरीका दोहरा लाभ देता है। पहला, जमीन के अंदर शकरकंद के फल मिलते हैं और दूसरा, ऊपर लगे पत्तों का उपयोग भाजी बनाने के लिए किया जाता है। घर में उगाई गई यह सब्जी पूरी तरह से शुद्ध और रसायन मुक्त होती है।

सेहत के लिए है बेहद गुणकारी

शकरकंद के पत्तों में आयरन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, जो इसे पालक के समान ही सेहतमंद बनाती है। रानू के मुताबिक, इसकी तासीर गर्म होती है, जो इसे सर्दियों के लिए एक आदर्श सब्जी बनाती है। इसका नियमित सेवन करने से सर्दी और जुकाम जैसी मौसमी समस्याओं से राहत मिलती है। यही कारण है कि छतरपुर के हर घर में ठंड के सीजन में दरभजिया जरूर बनाई जाती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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