जीवनशैली
एक घंटा पहले
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विचारों
बरसात का सुहावना मौसम अपने साथ कई तरह के पकवानों की यादें लेकर आता है। जब बाहर रिमझिम बारिश हो रही हो, तो ठंडी हवाओं के बीच कुछ गरमा-गरम और चटपटा खाने का मन हर किसी का करता है। ऐसे में यदि चाय के साथ कुरकुरी और मसालेदार कचौड़ी मिल जाए, तो दिन का मजा दोगुना हो जाता है। वैसे तो लोग अक्सर बाजार से कचौड़ी लाकर खाते हैं, या घर पर सामान्य तौर पर आलू की कचौड़ी बनाते हैं, लेकिन इस बार आप अपने किचन में कुछ बेहद खास और अलग ट्राई कर सकते हैं।
हरियाणा के अंबाला की एक प्रसिद्ध उड़द धुली दाल की कचौड़ी इस मौसम के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प मानी जाती है। यह साधारण आलू की कचौड़ी से स्वाद और बनावट दोनों में काफी अलग होती है। इसमें उड़द की धुली हुई दाल की एक खास मसालेदार स्टफिंग यानी मिश्रण भरा जाता है, जो इसके स्वाद को अनोखा बना देता है। अंबाला की रहने वाली स्थानीय महिला बिंद्रा ने इस पारंपरिक और स्वादिष्ट कचौड़ी को घर पर आसानी से बनाने की बेहद सरल रेसिपी साझा की है। उनका कहना है कि इसे घर पर बनाना बेहद आसान है और इसका स्वाद इतना लाजवाब होता है कि बच्चे और बड़े सभी इसे बार-बार मांगकर खाएंगे।
उड़द दाल कचौड़ी बनाने के लिए जरूरी सामग्रियां
कचौड़ी की इस लाजवाब रेसिपी को घर पर आजमाने के लिए आपको बहुत ज्यादा बाहरी सामान की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए रसोई में मिलने वाली सामान्य सामग्रियों का ही इस्तेमाल किया जाता है। मुख्य रूप से आपको निम्नलिखित चीजों की आवश्यकता होगी:
- उड़द की धुली दाल: लगभग 250 ग्राम (रात भर पानी में भिगोई हुई)
- गेहूं का आटा: लगभग आधा किलो
- प्याज: दो बारीक कटे हुए
- हरी मिर्च: एक से दो बारीक कटी हुई
- जीरा: तड़के के लिए आधा छोटा चम्मच
- मसाले: हल्दी पाउडर, स्वादानुसार नमक, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और गरम मसाला
- हरा धनिया: बारीक कटा हुआ, स्टफिंग में मिलाने के लिए
- अजवाइन: थोड़ी सी (आटे में मिलाने के लिए, इच्छा अनुसार)
- तेल: तलने के लिए पर्याप्त मात्रा में रिफाइंड तेल या सरसों का तेल
पहला चरण: उड़द दाल का पेस्ट और स्टफिंग की तैयारी
इस विशेष कचौड़ी को बनाने की शुरुआत उड़द की दाल को तैयार करने से होती है। बिंद्रा के अनुसार, सबसे पहले आपको 250 ग्राम उड़द की धुली हुई दाल को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। इसके बाद इस दाल को रात के समय पर्याप्त पानी के अंदर भिगोकर रख दें। यदि आप इसे सुबह बनाना चाहते हैं, तो रात भर भिगोना सबसे सही रहता है ताकि दाल पूरी तरह से फूल जाए।
सुबह के समय जब दाल अच्छी तरह से फूल जाए, तो उसे पानी से निकालकर दो से तीन बार साफ पानी से धो लें। इसके बाद भीगी हुई दाल को मिक्सी के जार में डालें। ध्यान रखें कि दाल पीसते समय बहुत ज्यादा पानी का इस्तेमाल न करें, क्योंकि हमें इसका एक गाढ़ा और चिकना पेस्ट तैयार करना है। मिक्सी को चलाकर दाल का एक बढ़िया और गाढ़ा पेस्ट बना लें। यह पेस्ट ही आपकी कचौड़ी की मुख्य स्टफिंग का आधार बनेगा।
दूसरा चरण: स्वादिष्ट और मसालेदार स्टफिंग को पकाना
अब बारी आती है कचौड़ी के अंदर भरे जाने वाले मसालेदार मिश्रण को तैयार करने की। इसके लिए गैस पर एक कढ़ाई चढ़ाएं और उसमें थोड़ा सा कुकिंग ऑयल यानी तेल डालकर गर्म होने दें। जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए, तो उसमें जीरा डालकर तड़का लगाएं। जीरा चटकने के बाद, कढ़ाई में बारीक कटे हुए दो प्याज और बारीक कटी हुई हरी मिर्च डाल दें।
प्याज और हरी मिर्च को मध्यम आंच पर तब तक भूनें जब तक कि प्याज का रंग हल्का सुनहरा न हो जाए। जैसे ही प्याज अच्छी तरह भून जाए, तो आंच को धीमा कर दें। अब इसमें स्वाद के अनुसार हल्दी पाउडर, नमक, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और थोड़ा सा गरम मसाला मिलाएं। बिंद्रा का कहना है कि मसालों को धीमी आंच पर अच्छी तरह से भूनना बेहद महत्वपूर्ण है। इससे मसालों का कच्चापन पूरी तरह खत्म हो जाता है और स्टफिंग में एक बेहतरीन सोंधापन और स्वाद आता है।
जब मसालों से अच्छी खुशबू आने लगे और वे अच्छी तरह पक जाएं, तो कढ़ाई में मिक्सी में तैयार किया हुआ उड़द दाल का पेस्ट डाल दें। अब दाल के पेस्ट और भुने हुए मसालों को आपस में अच्छी तरह मिला लें। गैस की आंच को धीमा ही रखें और इस पूरे मिश्रण को लगातार चलाते हुए अच्छी तरह भूनें। इसे तब तक भूनना है जब तक कि दाल का गीलापन कम न हो जाए और वह एक सूखे मिश्रण के रूप में न आ जाए। एक बार जब स्टफिंग तैयार हो जाए, तो गैस बंद कर दें और इस मिश्रण को कढ़ाई से निकालकर थोड़ी देर के लिए ठंडा होने के लिए रख दें।
तीसरा चरण: कचौड़ी के लिए आटा गूंथना
जब तक दाल का तैयार मसाला ठंडा हो रहा है, तब तक आप कचौड़ी के लिए आटा गूंथने की तैयारी कर सकते हैं। इसके लिए एक बड़े बर्तन या परात में लगभग आधा किलो आटा लें। इस आटे में स्वाद के अनुसार थोड़ा सा नमक मिला लें। बिंद्रा के अनुसार, यदि आप चाहें तो इसमें थोड़ी सी अजवाइन को हाथों से क्रश करके भी मिला सकते हैं, जिससे कचौड़ी का पाचन भी अच्छा रहता है और स्वाद भी निखर कर आता है।
अब आटे में धीरे-धीरे करके पानी डालें और उसे गूंथना शुरू करें। ध्यान रखें कि कचौड़ी का आटा न तो बहुत ज्यादा सख्त होना चाहिए और न ही बहुत ज्यादा नरम या गीला। आटे को मध्यम मुलायम गूंथना है ताकि कचौड़ी बेलते समय फटे नहीं और स्टफिंग बाहर न निकले। जब आटा अच्छी तरह से गूंथ जाए, तो इसे थोड़ी देर के लिए (लगभग 10 से 15 मिनट) ढककर रख दें। इससे आटा अच्छी तरह सेट हो जाता है और कचौड़ियां बहुत ही खस्ता बनती हैं।
चौथा चरण: कचौड़ियों को बेलना और स्टफिंग भरना
अब जब आटा सेट हो चुका है और उड़द दाल का मसाला भी पूरी तरह से ठंडा हो चुका है, तो कचौड़ी बनाने का अगला कदम शुरू होता है। ठंडे हो चुके दाल के मसाले में बारीक कटा हुआ हरा धनिया डालें और उसे अच्छी तरह से मिला लें। हरा धनिया मिलाने से स्टफिंग में एक ताजी खुशबू और बेहतरीन रंगत आ जाती है।
इसके बाद, गूंथे हुए आटे की छोटी-छोटी लोइयां यानी पेड़े तोड़ लें। एक लोई को हाथ में लेकर थोड़ा फैलाएं या कटोरी का आकार दें। अब इस फैली हुई लोई के बीच में तैयार की गई उड़द दाल की स्वादिष्ट स्टफिंग का एक चम्मच रखें। इसके बाद, आटे के किनारों को चारों तरफ से ऊपर उठाते हुए आपस में जोड़ लें और उसे अच्छी तरह सील यानी बंद कर दें ताकि तलते समय मसाला बाहर न बहे।
स्टफिंग बंद करने के बाद लोई को दोबारा गोल आकार दें। अब चकला और बेलन लें। लोई पर हल्का सा तेल लगाएं और बेहद हल्के हाथों से उसे बेलना शुरू करें। ध्यान रखें कि बेलते समय बहुत ज्यादा दबाव न डालें, अन्यथा दाल की स्टफिंग बाहर निकल सकती है। इसे आप पूरी की तरह गोल आकार दे सकते हैं या फिर थोड़े छोटे साइज की कचौड़ी भी तैयार कर सकते हैं।
पांचवां चरण: कचौड़ियों को कुरकुरा होने तक तलना
कचौड़ियों को बेलने के बाद अब उन्हें तलने की बारी आती है। एक गहरी कढ़ाई लें और उसमें तलने के लिए पर्याप्त मात्रा में रिफाइंड तेल या सरसों का तेल डालें। गैस चालू करें और तेल को अच्छी तरह गर्म होने दें। बिंद्रा के अनुसार, तेल का तापमान सही होना बहुत जरूरी है। जब तेल गर्म हो जाए, तो आंच को मध्यम कर दें।
अब गर्म तेल में सावधानी से एक-एक करके बेली हुई कचौड़ियों को डालें। कचौड़ियों को कभी भी तेज आंच पर न तलें। मध्यम आंच पर तलने से कचौड़ियां अंदर तक अच्छी तरह पकती हैं, उनकी बाहरी परत बेहद कुरकुरी और खस्ता बनती है, और अंदर की स्टफिंग भी अच्छी तरह गर्म होकर अपना पूरा स्वाद छोड़ती है। कचौड़ी को दोनों तरफ से पलट-पलट कर तब तक तलें जब तक कि उसका रंग खूबसूरत सुनहरा और भूरा न हो जाए। जब कचौड़ियां पूरी तरह से फूल जाएं और सुनहरी हो जाएं, तो उन्हें तेल से छानकर एक प्लेट पर निकाल लें।
चटनी के साथ गरमा-गरम परोसें
इस तरह आपकी गरमा-गरम और खस्ता अंबाला स्टाइल उड़द धुली दाल की कचौड़ी बनकर बिल्कुल तैयार है। बिंद्रा बताती हैं कि इस स्वादिष्ट कचौड़ी का असली मजा धनिया, पुदीना और हरी मिर्च से तैयार की गई तीखी और चटपटी हरी चटनी के साथ आता है। इसके अलावा आप इसे मीठी इमली की चटनी या आलू की रसेदार सब्जी के साथ भी परोस सकते हैं।
बरसात के इस सुहावने और ठंडे मौसम में सुबह के नाश्ते या शाम की चाय के साथ यह कचौड़ी एक बेहतरीन स्नैक साबित होगी। चूंकि इसमें पारंपरिक आलू की जगह उड़द धुली दाल की मसालेदार स्टफिंग भरी गई है, इसलिए इसका स्वाद बाजार की कचौड़ियों से काफी अलग और शुद्ध होता है। घर पर तैयार की गई यह स्वादिष्ट कचौड़ी हाइजीनिक होने के साथ-साथ आपके बच्चों और परिवार के सभी सदस्यों को बेहद पसंद आएगी। तो इस बार जब भी बारिश हो, इस आसान रेसिपी को अपने घर पर जरूर आजमाएं और पूरे परिवार के साथ स्वादिष्ट दाल कचौड़ी का आनंद लें।
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