बघेलखंडी जायके वाले आटे और मेवे के लड्डू घर पर बनाना है बेहद आसान, जानिए क्या है सही विधि जीवनशैली एक घंटा पहले 2
अगर आप पारंपरिक स्वाद के शौकीन हैं तो बघेलखंडी स्टाइल में बने आटे और मेवे के लड्डू आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हैं। इन पौष्टिक और स्वादिष्ट लड्डुओं को घर पर बनाना बहुत ही सरल है और ये लंबे समय तक खराब भी नहीं होते।

बघेलखंडी स्वाद का देसी जादू

बघेलखंड की रसोई की खासियत है वहां का पारंपरिक और देसी जायका। अगर आप बाजार की मिलावटी मिठाइयों से बचकर घर पर कुछ शुद्ध और सेहतमंद बनाना चाहते हैं, तो बघेलखंडी स्टाइल में आटे और मेवे के लड्डू सबसे अच्छा विकल्प हैं। देसी घी, गेहूं का आटा, गोंद, मेवे और सोंठ के मेल से बनने वाले ये लड्डू न केवल स्वाद में लाजवाब होते हैं, बल्कि अपनी सोंधी खुशबू के लिए भी मशहूर हैं। इसे बनाने के लिए आपको किसी आधुनिक मशीन या कठिन पाक कला की जरूरत नहीं है, बस कुछ आसान चरणों का पालन करना है।

सामग्री और तैयारी की शुरुआत

सतना की रहने वाली अंजलि चतुर्वेदी के अनुसार, बघेलखंडी लड्डुओं की असली पहचान इसके अनुपात और भूनने की प्रक्रिया में छिपी है। इसके लिए आपको सबसे पहले एक भारी तले वाली कड़ाही लेनी चाहिए। इस कड़ाही में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध देसी घी डालें। घी को मध्यम आंच पर ही गर्म करें, क्योंकि बहुत अधिक गर्म घी में सामग्री जलने का डर रहता है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले गोंद को भूनना होता है। गोंद को धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक वह फूलकर कुरकुरा न हो जाए। एक बार गोंद अच्छी तरह फूल जाए तो इसे कड़ाही से निकालकर एक तरफ रख दें।

मेवों को भूनने का सही तरीका

गोंद के बाद उसी घी में बारी-बारी से मेवे डालें। इसमें काजू, बादाम, मखाने और चिरौंजी का उपयोग करना बेहतर होता है। मेवों को हल्का सुनहरा होने तक भूनें। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इन्हें बहुत तेज आंच पर न भूनें, अन्यथा मेवे जल सकते हैं और उनका स्वाद कड़वा हो सकता है। भुने हुए मेवों को एक प्लेट में निकाल लें और ठंडा होने दें। जब मेवे ठंडे हो जाएं, तो उन्हें मिक्सर में हल्का दरदरा पीस लें। ध्यान रहे कि बहुत महीन पाउडर न बनाएं, क्योंकि थोड़ा दरदरा रहने पर लड्डू खाते समय मेवों का कुरकुरापन अधिक आनंद देता है। आप चाहें तो इसमें बारीक कटे हुए खजूर और छुहारे भी मिला सकते हैं, जो इसके पोषण और स्वाद में और इजाफा करेंगे।

आटे को भूनना है सबसे बड़ी कला

लड्डू की सफलता पूरी तरह से आटे को भूनने पर निर्भर करती है। कड़ाही में बचे हुए घी में गेहूं का आटा डालें। इस चरण में जल्दबाजी बिल्कुल न करें। आटे को लगातार चलाते हुए धीमी आंच पर पकाएं। धीरे-धीरे आटे का रंग बदलकर सुनहरा या भूरा होने लगेगा और घर में एक सोंधी महक फैल जाएगी। जब आटे से कच्चापन पूरी तरह खत्म हो जाए, तो समझें कि यह तैयार है। धीमी आंच पर धैर्य के साथ भुना हुआ आटा ही लड्डुओं के स्वाद का आधार है।

स्वाद को दें अंतिम स्पर्श

अब भुने हुए आटे में सोंठ का पाउडर और कुटी हुई इलायची मिलाएं। सोंठ इस बघेलखंडी मिठाई को एक खास पहचान और तीखा-मीठा संतुलन देती है। इसके बाद पहले से तैयार करके रखा हुआ गोंद और दरदरे पिसे हुए मेवे इस मिश्रण में डाल दें। अब सामग्री को अच्छी तरह मिलाएं और मिश्रण को थोड़ा गुनगुना रहने तक ठंडा होने दें। जब मिश्रण हल्का गुनगुना हो, तभी इसमें पिसी हुई चीनी मिलाएं। यदि आप बहुत गर्म आटे में चीनी डाल देंगे, तो वह पिघल जाएगी और लड्डू का टेक्सचर चिपचिपा हो जाएगा।

लड्डू बांधना और भंडारण

अंत में हाथों की मदद से मिश्रण को मिलाएं और गोल आकार के लड्डू तैयार करें। अगर आपको मिश्रण थोड़ा सूखा लगे, तो आप हल्का गुनगुना देसी घी ऊपर से डाल सकते हैं। तैयार लड्डुओं को कुछ समय के लिए एक खुली प्लेट में छोड़ दें ताकि वे अच्छी तरह सेट हो जाएं। इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए हमेशा एक साफ और सूखे एयर टाइट डिब्बे का उपयोग करें। यदि आप इन्हें नमी से बचाकर सामान्य तापमान पर रखें, तो ये 2 से 3 महीने तक खराब नहीं होते। याद रखें कि डिब्बे से लड्डू निकालते समय हमेशा सूखे हाथों या चम्मच का ही इस्तेमाल करें। यदि आप इन्हें और भी लंबे समय तक संरक्षित करना चाहते हैं, तो इन्हें फ्रिज में भी रखा जा सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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