बारिश में चटपटे स्वाद का मज़ा: बुरहानपुर की मशहूर गिलकी के पकौड़े अब घर पर बनाएं जीवनशैली 4 घंटे पहले 2
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में बारिश के दौरान गिलकी के पकौड़ों का चलन काफी बढ़ जाता है। इस लेख में जानिए फूलाबाई द्वारा बताई गई इन स्वादिष्ट पकौड़ों को तैयार करने की आसान विधि।

बारिश और पकौड़ों का खास रिश्ता

मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में मानसून की दस्तक के साथ ही खानपान की पसंद में बदलाव आना स्वाभाविक है। बारिश की रिमझिम फुहारों के बीच गर्मागर्म चाय के साथ कुछ कुरकुरा खाने का आनंद ही कुछ और है। इस मौसम में बुरहानपुर में गिलकी से बनाए जाने वाले पकौड़े बेहद लोकप्रिय हैं। गिलकी के पकौड़े न केवल स्वाद में लाजवाब होते हैं, बल्कि यह स्थानीय व्यंजनों की एक खास पहचान भी बन चुके हैं। यदि आप भी इस बारिश के मौसम का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो आप घर पर ही इन पकौड़ों को आसानी से तैयार कर सकते हैं।

विशेषज्ञ की सलाह

इस विषय पर जानकारी देते हुए विशेषज्ञ फूलाबाई ने बताया कि गिलकी भले ही एक सामान्य सब्जी मानी जाती हो, लेकिन इससे तैयार पकौड़े स्वाद में काफी अनोखे होते हैं। बारिश के दिनों में बुरहानपुर के घरों में नाश्ते के तौर पर इन्हें बनाना काफी पसंद किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें बनाने के लिए किसी जटिल सामग्री की आवश्यकता नहीं होती और यह कम समय में तैयार हो जाते हैं।

पकौड़े बनाने की सरल विधि

गिलकी के पकौड़े बनाने के लिए फूलाबाई ने निम्नलिखित चरणों का पालन करने की सलाह दी है:

  • सबसे पहले ताजी गिलकी को पानी से अच्छी तरह धोकर साफ कर लें।
  • इसके बाद चाकू की मदद से इसके छोटे या पतले टुकड़े काट लें।
  • अब एक बर्तन में बेसन लें और उसमें जीरा, लाल मिर्च पाउडर और अपने स्वादानुसार नमक मिलाएं।
  • इसमें धीरे-धीरे आवश्यकतानुसार पानी डालते हुए एक गाढ़ा घोल तैयार कर लें।
  • अब गिलकी के कटे हुए टुकड़ों को इस बेसन के घोल में अच्छी तरह लपेटें।
  • अंत में, गर्म तेल में इन टुकड़ों को सावधानी से डालें और सुनहरा होने तक तलें।

कुरकुरे स्वाद का आनंद

तेल में तलने के बाद जब पकौड़े सुनहरे और कुरकुरे हो जाएं, तो उन्हें बाहर निकाल लें। इन गर्मागर्म पकौड़ों को आप चाय के साथ या हरी चटनी के साथ परोस सकते हैं। बुरहानपुर के स्थानीय निवासियों के अनुसार, इन पकौड़ों की एक खास विशेषता यह भी है कि यदि इन्हें सही तरीके से बनाकर सुरक्षित रखा जाए, तो इनका सेवन अगले दो दिन तक भी किया जा सकता है। हालांकि, अधिकांश लोग इनका स्वाद गर्मागर्म ही लेना पसंद करते हैं। तो इस बार बारिश होने पर बाजार की बजाय घर की बनी सामग्री का उपयोग करके गिलकी के इन पकौड़ों का आनंद जरूर लें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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