करौली का प्रसिद्ध समोसा: महज 10 रुपये में मिलता है अनोखा स्वाद, सिर्फ 4 घंटे सजती है बाबूलाल की दुकान जीवनशैली 3 घंटे पहले 5
करौली के भुड़ारे बाजार में बाबूलाल राठौर का समोसे का ठेला पिछले 15 वर्षों से लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। यहाँ रोजाना सिर्फ 4 से 5 घंटे ही गरमा-गरम समोसे मिलते हैं, जिसे खाने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

राजस्थान के करौली शहर में स्वाद के शौकीनों के लिए वैसे तो कई ठिकाने हैं, लेकिन भुड़ारे बाजार में लगने वाला एक छोटा सा ठेला इन दिनों पूरे शहर की पहली पसंद बना हुआ है। इस ठेले पर मिलने वाले समोसे का स्वाद इतना लाजवाब है कि कड़ाही से बाहर आते ही ये तुरंत बिक जाते हैं। सबसे खास बात यह है कि आज के इस महंगाई के दौर में भी यहाँ समोसा बेहद किफायती दाम पर उपलब्ध है। बाबूलाल राठौर का यह ठेला पिछले 15 सालों से लगातार लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है और यहाँ का स्वाद चखने के लिए लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।

15 वर्षों से स्वाद और कीमत का बेजोड़ संगम

करौली के भुड़ारे बाजार में लगने वाले इस ठेले की सबसे बड़ी खासियत इसकी कीमत और गुणवत्ता है। जहां आजकल बाजारों में समोसे की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं बाबूलाल के इस ठेले पर गरमा-गरम समोसा सिर्फ 10 रुपये में मिल जाता है। इस समोसे के साथ दी जाने वाली तीखी हरी और खट्टी-मीठी लाल चटनी इसके स्वाद को दोगुना कर देती है। 15 साल पहले शुरू हुआ यह सफर आज भी उसी उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ जारी है। महंगाई बढ़ने के बावजूद बाबूलाल ने अपने समोसे की कीमत को नियंत्रित रखा है, ताकि हर वर्ग का व्यक्ति इसका आनंद ले सके।

बाबूलाल के इस ठेले पर केवल समोसे ही नहीं बेचे जाते, बल्कि ग्राहकों के लिए नाश्ते के कई अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। यहाँ आने वाले लोग दाल के कुरकुरे मंगोड़े, ठंडे-ठंडे दही भल्ले और खस्ता नमकपारे का स्वाद भी ले सकते हैं। इन सभी पकवानों को हरी और लाल चटनी के साथ बेहद करीने से परोसा जाता है। हालांकि, सबसे ज्यादा मांग यहाँ के समोसे की ही रहती है, जिसे करौली शहर का सबसे बेहतरीन और सबसे सस्ता समोसा माना जाता है।

सिर्फ 4 घंटे में सिमट जाता है पूरा कारोबार

इस दुकान की एक बेहद दिलचस्प बात यह है कि इसका स्वाद चखने के लिए ग्राहकों को समय का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। बाबूलाल राठौर का यह ठेला पूरे दिन नहीं खुलता। वे रोजाना केवल चार से पांच घंटे के लिए ही अपना ठेला लगाते हैं। जैसे ही ठेला सजता है, वैसे ही समोसे प्रेमियों की भारी भीड़ वहां जमा होने लगती है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक, हर उम्र के लोग कड़ाही से ताजे निकलने वाले समोसे का इंतजार करते नजर आते हैं। सीमित समय के लिए उपलब्ध होने के कारण, यहाँ हमेशा गहमागहमी का माहौल रहता है और कड़ाही से समोसा निकलते ही तुरंत समाप्त हो जाता है।

आखिर क्या है इस समोसे के स्वाद का राज?

पिछले डेढ़ दशक से लोगों के दिलों पर राज करने वाले बाबूलाल राठौर ने अपने समोसे के स्वाद का राज साझा किया है। उनका कहना है कि वे गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं करते। समोसे बनाने की पूरी प्रक्रिया में वे केवल उच्च गुणवत्ता वाले रिफाइंड और सोयाबीन तेल का ही उपयोग करते हैं। बाबूलाल के अनुसार:

"एक बेहतरीन समोसे का असली आधार उसका मसाला और आलू होता है। हम समोसे के भरावन के लिए हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले ताजे आलू चुनते हैं और उसमें घर के पिसे हुए विशेष मसालों का मिश्रण तैयार करते हैं। यही कारण है कि हमारे समोसे का स्वाद दूसरों से काफी अलग और खास होता है।"

कम कीमत और शानदार स्वाद के इस अनूठे तालमेल की वजह से न केवल करौली शहर के स्थानीय लोग, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोग भी यहाँ खिंचे चले आते हैं।

ग्राहकों की जुबानी, बाबूलाल के समोसे की कहानी

इस दुकान पर नियमित रूप से आने वाले ग्राहक नरेश जाटव ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पिछले पांच से सात सालों से यहाँ के समोसे खा रहे हैं। नरेश के अनुसार, पूरे करौली शहर में उन्हें इस ठेले से बेहतर स्वाद कहीं और नहीं मिला। वे कहते हैं कि स्वाद के साथ-साथ इसकी कीमत इतनी कम है कि यह हर किसी के बजट में आसानी से फिट हो जाता है। उनके बच्चे भी इस समोसे के दीवाने हैं और जब भी वे भुड़ारे बाजार आते हैं, यहाँ का समोसा खाए बिना घर वापस नहीं लौटते।

स्वाद के साथ जुड़ी यादों का सफर

करौली के भुड़ारे बाजार का यह छोटा सा ठेला अब केवल एक व्यावसायिक दुकान नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के जीवन और उनकी पुरानी यादों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। दस साल से भी अधिक समय से यहाँ आ रहे कई ग्राहकों के लिए यह जगह पुरानी यादों को ताजा करने का एक जरिया है। आज के आधुनिक और महंगे रेस्टोरेंट के दौर में भी, 10 रुपये में मिलने वाला यह गरमा-गरम समोसा और चटपटी चटनी लोगों को पुरानी सादगी का अहसास कराती है, जिससे इसकी लोकप्रियता आज भी उतनी ही बनी हुई है जितनी 15 साल पहले थी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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