हरिद्वार में 100 साल पुरानी दुकान का अनोखा स्वाद, गंगा घाट के पास मिलता है मशहूर मथुरा पेड़ा और मलाई समोसा जीवनशैली एक घंटा पहले 3
हरिद्वार के हर की पौड़ी के निकट स्थित एक ऐतिहासिक दुकान अपनी शुद्धता और पारंपरिक मिठाइयों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है, जहां यात्री गंगा स्नान के बाद स्वाद का आनंद लेने आते हैं।

हरिद्वार की सांस्कृतिक और खानपान विरासत

हरिद्वार की पहचान सिर्फ इसके पावन गंगा घाटों और प्राचीन मंदिरों तक ही सीमित नहीं है। यहां की आबो-हवा में घुली हुई पुरानी परंपराएं और खानपान की विरासत भी इसे खास बनाती है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बीच हरिद्वार का पारंपरिक स्वाद हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। हर की पौड़ी के बेहद करीब स्थित प्राचीन 'मथुरा वाले की दुकान' इसी विरासत का एक अहम हिस्सा है। करीब 100 साल पुरानी यह दुकान आज भी अपनी गुणवत्ता और शुद्धता के मानकों पर कायम है, जिसके कारण लोग यहां खींचे चले आते हैं।

मथुरा वाले का मशहूर पेड़ा

इस दुकान की सबसे लोकप्रिय पेशकश 'मथुरा पेड़ा' है। इस पेड़े को बनाने की विधि इसे बेहद खास बनाती है। दुकानदार ताजे दूध के मावे को धीमी आंच पर कई घंटों तक लगातार भूनते हैं, जिससे इसका रंग गहरा भूरा हो जाता है और इसमें एक सौंधी और मनमोहक खुशबू बस जाती है। इस पेड़े की सबसे बड़ी खूबी इसकी लंबी शेल्फ लाइफ है। बिना किसी फ्रिज या प्रिजर्वेटिव के यह पेड़ा लगभग 20 दिनों तक पूरी तरह से ताजा बना रहता है। यही वजह है कि हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु इसे एक पवित्र प्रसाद के रूप में अपने घरों को ले जाना पसंद करते हैं।

स्वाद में लाजवाब मलाई समोसा

प्राचीन मथुरा वाले की दुकान पर मिलने वाला 'मलाई समोसा' अपने आप में अनोखा है और यह सामान्य नमकीन समोसों से बिल्कुल अलग अनुभव प्रदान करता है। इसे तैयार करने में मैदे का बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया जाता है। इसके बजाय, यह शुद्ध और गाढ़ी मलाई की परतों से निर्मित होता है। इसके अंदर काजू, बादाम और पिस्ते जैसी मेवों की स्टफिंग की जाती है। इसकी मिठास बहुत ही संतुलित और प्राकृतिक होती है, जिससे यह उन लोगों के लिए भी मुफीद है जो कम मीठा पसंद करते हैं या फिर डायबिटीज के रोगी हैं।

शुद्ध मावा बर्फी का स्वाद

दुकान पर उपलब्ध पिस्ता-मावा बर्फी अपनी शुद्धता के लिए जानी जाती है। इस मिठाई को बनाने में किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल या कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। ताजा सफेद मावे को हल्की चाशनी के साथ जमाकर चौकोर टुकड़ों में काटा जाता है। जैसे ही यह बर्फी मुंह में जाती है, यह मक्खन की तरह घुल जाती है, जो इसके ताजा होने का प्रमाण देती है।

पिस्ता बर्फी की महक

अगर आपको मेवों का शौक है, तो यहां की पिस्ता बर्फी आपकी पहली पसंद बन सकती है। शुद्ध मावे के मिश्रण में बारीक कटे हुए उत्तम दर्जे के पिस्ते और हरी इलायची का मेल इसे बेहतरीन स्वाद देता है। हरे और सुनहरे रंग की यह मिठाई न केवल दिखने में आकर्षक है, बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर मानी जाती है। त्योहारों और खास अवसरों पर श्रद्धालु इस बर्फी की भारी मांग करते हैं।

सफेद पेड़ा और भूरे लड्डू की लोकप्रियता

सफेद पेड़ा भी दुकान का एक मुख्य आकर्षण है। ताजे दूध को घंटों कढ़ाकर बने मावे से इसे तैयार किया जाता है, जिसमें मिलावट का कोई स्थान नहीं होता। वहीं दूसरी ओर, यहां के सुनहरे भूरे रंग के लड्डू भी काफी लोकप्रिय हैं। दूध को तब तक भट्ठी पर पकाया जाता है जब तक कि वह मावा न बन जाए, जिससे लड्डू का रंग गहरा हो जाता है। इलायची की महक वाले ये लड्डू भी बिना फ्रिज के 20 दिनों तक खराब नहीं होते और गंगा स्नान के बाद यात्री इसे प्रसाद के रूप में खरीदते हैं।

रबड़ी की मिठास

अंत में, यहां की मलाईदार रबड़ी का स्वाद श्रद्धालुओं को गंगा स्नान के बाद एक नई ऊर्जा देता है। बड़े कड़ाहे में धीमी आंच पर दूध को कई घंटों तक खौलाकर उसकी मोटी परतें तैयार की जाती हैं। ताजे दूध की प्राकृतिक मिठास और केसर की महक इस रबड़ी को लाजवाब बनाती है। हर की पौड़ी आने वाले यात्री अक्सर थकान मिटाने के लिए ठंडी और स्वादिष्ट रबड़ी का आनंद लेना नहीं भूलते।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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