मिडिल ईस्ट संकट पर RBI का बड़ा बयान, ब्याज दरों में बदलाव को लेकर दिया यह संकेत व्यापार 2 महीने पहले 80
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मलहोत्रा ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ब्याज दरों को लेकर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी की फिलहाल कोई योजना नहीं

पश्चिम एशिया में मचे घमासान और कच्चे तेल की कीमतों में हो रही हलचल के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। RBI के गवर्नर संजय मलहोत्रा ने जोर देकर कहा है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में वृद्धि करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बैंक की बारीक नजर है, लेकिन रेपो रेट बढ़ाने का कदम उठाना अभी जल्दबाजी होगी।

मौद्रिक नीति के रुख में कोई बदलाव नहीं

एक साक्षात्कार के दौरान संजय मलहोत्रा ने कहा कि यदि बैंक ब्याज दरें बढ़ाने का मन बनाता, तो मौद्रिक नीति के न्यूट्रल रुख को बदलकर रिस्ट्रिक्टिव किया जाता। चूँकि ऐसा नहीं किया गया है, यह दर्शाता है कि बैंक अभी भी डेटा और ठोस आंकड़ों के आधार पर ही कोई भी निर्णय लेने के पक्ष में है। बैंक मौजूदा परिस्थितियों का बारीकी से आकलन कर रहा है।

महंगाई और विकास के आंकड़ों पर सतर्कता

हालिया नीतिगत फैसलों में RBI ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक विकास दर के अनुमान को संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही, खुदरा महंगाई के 5.1 प्रतिशत तक रहने की आशंका जताई गई है। गवर्नर ने स्वीकार किया कि वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में दिक्कतें और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें महंगाई के मोर्चे पर चुनौती पैदा कर सकती हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में राहत के संकेत

संजय मलहोत्रा ने इस बात पर संतोष जताया कि ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच तनाव में थोड़ी कमी आने से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी गई है। यूरिया की कीमतों में आई गिरावट भी घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन मजबूत रहा है और तेल कंपनियों के सहयोग से कीमतों के बड़े झटकों को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है।

अनिश्चितता के दौर में वेट एंड वॉच

वर्तमान स्थिति को देखते हुए RBI पूरी तरह से 'वेट एंड वॉच' की मुद्रा में है। गवर्नर ने बताया कि केंद्रीय बैंक मानसून की प्रगति, कच्चे तेल के दाम और महंगाई के अन्य कारकों पर निरंतर नजर रखे हुए है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ईंधन की कीमतों में आया बदलाव अन्य आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर कितना असर डालेगा।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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