रतलाम में किसानों का अनोखा प्रदर्शन: कलेक्टर से मिलने की जिद पर अड़े अन्नदाता, कलेक्ट्रेट में शुरू किया हनुमान चालीसा का पाठ मध्य प्रदेश 5 घंटे पहले 2
मध्य प्रदेश के रतलाम में भारतीय किसान संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर से मुलाकात न होने पर धरने पर बैठ गए। किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही हनुमान चालीसा का पाठ कर अपना विरोध दर्ज कराया।

कलेक्ट्रेट में किसानों का धरना और हनुमान चालीसा का पाठ

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में मंगलवार दोपहर को उस समय हड़कंप मच गया जब भारतीय किसान संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान अपनी मांगों के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंच गए। किसानों का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपना था, जिसमें उनकी 37 महत्वपूर्ण मांगों का उल्लेख किया गया था। ज्ञापन देने के लिए जिद पर अड़े किसान तब तक वहां से हटने को तैयार नहीं थे जब तक कि उनकी सीधी मुलाकात कलेक्टर से न हो जाए। कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद अधिकारियों के साथ बातचीत विफल होने के बाद, किसानों ने कलेक्ट्रेट के भीतर ही बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर दिया।

कलेक्टर से मुलाकात के लिए दो घंटे का इंतजार

प्रदर्शनकारी किसान दोपहर करीब 1 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उस दौरान कलेक्टर अजय कटेसरिया किसी बैठक के सिलसिले में बाहर गए हुए थे। कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों ने साफ कर दिया था कि वे बिना कलेक्टर से मिले वापस नहीं लौटेंगे। उनकी इस जिद को देखते हुए डिप्टी कलेक्टर संजय शर्मा और नायब तहसीलदार रामचंद्र पांडेय वहां ज्ञापन लेने के लिए पहुंचे, लेकिन किसानों ने उन्हें ज्ञापन देने से साफ इनकार कर दिया। किसानों का कहना था कि वे केवल कलेक्टर को ही अपना ज्ञापन सौंपेंगे। दोपहर 3 बजे तक भी जब कलेक्टर कार्यालय नहीं पहुंचे, तो किसानों का गुस्सा और अधिक बढ़ गया।

अधिकारियों के रवैये पर भड़के किसान

किसानों ने प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि वातानुकूलित कमरों में बैठकर पिज्जा और बर्गर खाने वाले अधिकारी भला अन्नदाताओं की पीड़ा क्या समझेंगे। उन्होंने स्पष्ट रूप से घोषणा की कि जब तक उनकी मुलाकात कलेक्टर से नहीं हो जाती, वे यहां से टस से मस नहीं होंगे। किसानों ने यह तक कह दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो वे कलेक्ट्रेट परिसर में ही अपना भोजन बनाएंगे और रात भर यहीं डटे रहेंगे। शाम 5 बजे तक भी कलेक्टर के नहीं पहुंचने पर किसान कलेक्ट्रेट में ही जमे रहे।

सुविधाओं का अभाव और नाराजगी

विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में पीने के पानी की व्यवस्था न होने पर भी अपना आक्रोश जताया। दूर-दराज के गांवों से आए किसानों को जब पीने के लिए पानी तक नहीं मिला, तो उन्होंने कलेक्ट्रेट अधीक्षक के चेंबर में जाकर पूछताछ की। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि आरओ मशीन लगी है, लेकिन उसमें पानी ही नहीं था। पानी की ऐसी स्थिति देखकर किसान भड़क गए और बोले कि जो कार्यालय आम जनता के लिए बनाया गया है, वहां अगर आने वाले लोगों को पानी तक नसीब नहीं हो रहा है, तो फिर आम नागरिक का क्या हाल होता होगा।

फसल बीमा और अन्य मांगें

भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष पालीवाल ने बताया कि इस धरने का सबसे मुख्य कारण फसल बीमा योजना में बरती जा रही अनियमितताएं हैं। उन्होंने जानकारी दी कि पिछली बार जिले को 213 करोड़ रुपये की राहत राशि मिली थी, जबकि बीमा के नाम पर मात्र 42 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए। उन्होंने बताया कि जिले की केवल 15 ग्राम पंचायतों में ही बीमा राशि पहुंची, जबकि 55 ग्राम पंचायतें इससे वंचित रह गईं। इसके अलावा उन्होंने मांग की कि सोयाबीन की राहत राशि के लिए पुराने सर्वे रिपोर्ट का पुनर्मिलान किया जाए और उसी के आधार पर पूर्व की भांति बीमा का भुगतान किया जाए।

ज्ञापन में शामिल अन्य प्रमुख मांगों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पारदर्शिता, केला और मिर्च की फसल को बीमा दायरे में शामिल करना, सोयाबीन के लिए समर्थन मूल्य पर खरीद का पंजीयन शुरू करना शामिल है। साथ ही किसानों ने धान, मक्का, ज्वार और बाजरा जैसी खरीफ की सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की मांग की है। उन्होंने कृषि, सिंचाई और बिजली विभाग से जुड़ी स्थानीय और प्रदेश स्तरीय समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तर पर निगरानी समिति बनाने की भी मांग की है, जिसमें किसान प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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