एक ही छत के नीचे यूपी की बनारसी, झारखंड का तसर और राजस्थान का बंधेज, ऑनलाइन ऐप्स पर भी जबरदस्त मांग झारखंड 2 घंटे पहले 2
रांची के सालवीय और सुमित ने 'सियाकारी' नाम से कपड़ों का ब्रैंड शुरू किया है, जहां देश के हर राज्य की मशहूर साड़ी एक ही जगह मिलती है। उनकी साड़ियों की अमेजॉन से लेकर फ्लिपकार्ट तक भारी डिमांड है और इससे करीब 600 कारीगरों को रोजगार मिल रहा है।

रांची के दो युवा उद्यमी सालवीय और सुमित ने मिलकर 'सियाकारी' नाम से अपना कपड़ों का ब्रैंड शुरू किया है। इस ब्रैंड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां देश के अलग-अलग शहरों के मशहूर फैब्रिक एक ही छत के नीचे मिल जाते हैं, और वह भी हर बजट के मुताबिक। जिस राज्य की जो साड़ी प्रसिद्ध है, उसे ग्राहक इनके ब्रैंड के जरिए आसानी से खरीद सकते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स पर भी इनकी मौजूदगी मजबूत है।

हर राज्य का मूल फैब्रिक एक जगह

सालवीय और सुमित ने अपने इस ब्रैंड के तहत देशभर के विभिन्न राज्यों के कलाकारों और वहां के पारंपरिक फैब्रिक को एक मंच पर लाने का काम किया है। झारखंड का तसर सिल्क, यूपी की बनारसी साड़ी और जयपुर की बंधेज जैसी चीजें यहां एक ही जगह उपलब्ध हैं। दोनों ने अलग-अलग राज्यों के कारीगरों से साड़ियां बनवाने का काम शुरू किया। आज अमेजॉन से लेकर फ्लिपकार्ट तक इनकी साड़ियों की जबरदस्त मांग है। इस पहल से करीब 600 कारीगरों को रोजगार मिल रहा है।

हर रेंज में मिलती हैं साड़ियां

सालवीय बताती हैं कि उनके यहां दक्षिण भारत की कांजीवरम साड़ी देखने को मिलेगी। इसके अलावा बंगाल की लोकल कॉटन साड़ी और कश्मीर का कश्मीरी सिल्क भी उपलब्ध है। उनके मुताबिक साड़ियों की रेंज भी काफी किफायती है और इसकी शुरुआत 2000 से होती है, जिससे हर वर्ग के लोग इन्हें खरीद सकते हैं।

वे बताती हैं कि उनकी सबसे खास बात यह है कि वे सीधे कारीगर से साड़ी बनवाने का काम करती हैं, इसीलिए ग्राहकों को कम दाम में ही उच्च गुणवत्ता वाला उत्पाद मिल जाता है।

एक बार खरीदने वाला दोबारा लौटता है

सुमित का कहना है कि जो ग्राहक एक बार उनसे साड़ी खरीदता है, वह दोबारा जरूर लौटता है, क्योंकि इस दाम में ऐसी गुणवत्ता शायद ही कहीं और मिले। उन्होंने बताया कि खासतौर पर अमेजॉन से उन्हें जबरदस्त ऑर्डर आते हैं और वहां से बार-बार रिपीट ऑर्डर मिलते रहते हैं। इससे देश के कारीगरों को भी एक मंच मिलता है और उनके काम को सराहना मिलती है।

सुमित के अनुसार उनकी साड़ियों में खूबसूरत हैंड पेंटिंग से लेकर कढ़ाई तक का काम होता है। इनमें मशीन का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता, सब कुछ हाथ से तैयार किया जाता है। उनका कहना है कि साड़ी का बाजार इतना बड़ा है कि वे चाहे जितने भी कलेक्शन ले आएं, लोगों की मांग पूरी करना मुश्किल हो जाता है। आज भी ग्राहकों की इतनी मांग रहती है कि उसे पूरा कर पाना संभव नहीं हो पाता। इसी वजह से दोनों ने साड़ी के क्षेत्र में कुछ अलग करने और अपना ब्रैंड बनाने का फैसला किया।

खोल चुके हैं चार आउटलेट

सुमित बताते हैं कि उनके पास अपने ऑफिस से लेकर दुकान तक सब कुछ है। रांची, पटना, दिल्ली और कानपुर में उनके स्टोर मौजूद हैं, यानी ग्राहक सीधे वहां जाकर खरीदारी कर सकते हैं। उनके साथ इस समय 600 से अधिक लोग जुड़े हुए हैं और उन्हें उम्मीद है कि यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उनके मुताबिक आज इनकी कमाई भी काफी अच्छी है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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