झारखंड हुआ नक्सल मुक्त, 1 करोड़ का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार झारखंड एक घंटा पहले 5
सुरक्षा बलों ने झारखंड में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए भाकपा माओवादी के शीर्ष कमांडर मिसिर बेसरा को धर दबोचा है, जिसके बाद राज्य को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है।

झारखंड को मिली बड़ी कामयाबी

झारखंड में सुरक्षा बलों ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और बड़ी सफलता दर्ज की है, जो राज्य के सुरक्षा परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल सकती है। लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बने और भाकपा माओवादी के सबसे बड़े चेहरों में से एक, 1 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से झारखंड को आधिकारिक रूप से नक्सल मुक्त राज्य माना जा रहा है। यह उपलब्धि देश के शीर्ष नेतृत्व, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नक्सलवाद मुक्त भारत बनाने का संकल्प शामिल है, के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखी जा रही है।

कोबरा बटालियन का विशेष ऑपरेशन

इस पूरे ऑपरेशन को सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन-209 ने अंजाम दिया है। खुफिया एजेंसियों को मिली विशेष जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने एक घेराबंदी की और मिसिर बेसरा तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की। इस विशेष अभियान में केवल मिसिर बेसरा ही नहीं, बल्कि उसके साथ दो अन्य कुख्यात माओवादी कमांडर मोछू और गौरव हांसदा को भी सुरक्षा बलों ने दबोच लिया है। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वह पिछले कई वर्षों से झारखंड के साथ-साथ पूर्वी भारत के अन्य कई राज्यों में माओवादी गतिविधियों की कमान संभाल रहा था।

मिसिर बेसरा का बैकग्राउंड

मिसिर बेसरा मूल रूप से झारखंड के गिरिडीह जिले के मदनाडीह गांव का रहने वाला है। गांव से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए धनबाद चला गया था। मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारियों के अनुसार, धनबाद में रहने के दौरान ही उसका झुकाव माओवादी विचारधारा की तरफ हुआ। ऐसी भी चर्चा है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उसे नौकरी मिली, तो उस समय भी उससे रिश्वत की मांग की गई थी, जिससे नाराज होकर उसने इस रास्ते को अपना लिया था। हालांकि उसके परिजन व्यवस्था से जूझकर पैसे जुटाने की कोशिश में थे, लेकिन मिसिर ने दूसरा ही मार्ग चुन लिया जो उसे हिंसा की ओर ले गया।

परिवार और निजी जीवन

मिसिर बेसरा का निजी जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है। उसके बेटे सिद्धार्थ के अनुसार, उसने अपने पिता को तब देखा था जब वह केवल 5 साल का था। उस घटना के बाद से सिद्धार्थ ने कभी अपने पिता को नहीं देखा। वर्तमान में मिसिर बेसरा का बेटा सिद्धार्थ दिहाड़ी मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहा है। मिसिर बेसरा का लंबे समय से फरार होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी, और उसकी गिरफ्तारी के बाद अब राज्य में शांति व्यवस्था की एक नई उम्मीद जगी है। इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि सुरक्षा बल नक्सलवाद के खात्मे के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप