खूंटी में कमाल: 120 एकड़ में हो रही लेमन ग्रास की खेती, खेतों के बीच ही तैयार हो रहा खुशबूदार तेल झारखंड 2 घंटे पहले 2
झारखंड के खूंटी जिले के गुनी गांव में बड़े पैमाने पर लेमन ग्रास की खेती की जा रही है, जहां खेतों के बीच बने प्लांट में अत्याधुनिक तरीके से तेल निकाला जाता है।

खेतों के बीच खुशबू का सफर

झारखंड की राजधानी रांची के पास स्थित खूंटी जिले का गुनी गांव आज एक नई मिसाल बन गया है। यहां लगभग 120 एकड़ की विशाल भूमि पर लेमन ग्रास की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। इस खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां किसानों ने पारंपरिक खेती से हटकर लेमन ग्रास को चुना है और खेतों के ठीक बीच में एक प्रसंस्करण संयंत्र भी स्थापित किया है। यह प्लांट सीधे तौर पर पत्तियों से खुशबूदार एसेंशियल ऑयल निकालने का काम करता है, जिससे किसानों की आय में भी इजाफा हो रहा है।

तेल निकालने की वैज्ञानिक प्रक्रिया

लेमन ग्रास की खेती से जुड़े किसान इंद्र ने बताया कि पौधों से तेल निकालने की प्रक्रिया काफी व्यवस्थित है और इसे मुख्य रूप से चार चरणों में पूरा किया जाता है। भाप विधि यानी डिस्टिलेशन तकनीक का उपयोग करके यह कीमती तेल तैयार किया जाता है।

कटाई और भाप का निर्माण

प्रक्रिया की शुरुआत लेमन ग्रास की ताजी या हल्की मुरझाई पत्तियों की कटाई से होती है। इन एकत्रित पत्तियों को अच्छी तरह से साफ करने के बाद डिस्टिलेशन टैंक या भाप के बर्तनों में बहुत कसकर भरा जाता है। दूसरी तरफ एक बड़े बॉयलर में पानी को गर्म करके उच्च दबाव वाली भाप तैयार की जाती है। यही भाप तेल निकालने की मुख्य धुरी है।

वाष्पीकरण और संघनन

बॉयलर में तैयार हुई उच्च दबाव वाली भाप को टैंक के निचले हिस्से से अंदर भेजा जाता है, जो नीचे से ऊपर की ओर प्रवाहित होती है। भाप की तेज गर्मी के कारण पत्तियों की कोशिकाओं में मौजूद तेल वाष्पित होने लगता है। इसके बाद तेल और भाप का यह मिश्रित रूप एक कंडेंसर यानी ठंडे पानी की कुंडली से गुजरता है। इस प्रक्रिया में ठंडक मिलने के कारण भाप और तेल की वाष्प वापस तरल अवस्था में बदल जाती है।

तेल और पानी का पृथक्करण

तरल रूप में प्राप्त मिश्रण को एक सेपरेटर मशीन, जिसे फ्लोरेंटाइन सेपरेटर कहा जाता है, में डाला जाता है। चूंकि लेमन ग्रास का तेल पानी की तुलना में हल्का होता है, इसलिए यह स्वतः ही पानी के ऊपर एक अलग परत के रूप में तैरने लगता है। इस तरह तेल को पानी से अलग करना बेहद आसान हो जाता है।

गुणवत्ता जांच और पैकेजिंग

अंतिम चरण में तेल की गुणवत्ता की गहन जांच की जाती है। इसमें तेल का रंग, उसकी विशिष्ट खुशबू और डेंसिटी जैसे महत्वपूर्ण मानकों को परखा जाता है। जब तेल गुणवत्ता के सभी मानदंडों पर खरा उतर जाता है, तब इसे बाजार में बिक्री के लिए उपयुक्त बोतलों और कंटेनरों में पैक कर दिया जाता है। इस तरह गुनी गांव में उगी लेमन ग्रास एक व्यावसायिक उत्पाद के रूप में तैयार होकर बाहर भेजी जाती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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