क्रॉस वोटिंग के डर से कांग्रेस का बड़ा दांव, झारखंड के सभी 16 विधायक जा सकते हैं तेलंगाना झारखंड 3 महीने पहले 47
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर 18 जून को होने वाले मतदान से पहले क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच कांग्रेस अपने सभी 16 विधायकों को एकजुट रखने के लिए तेलंगाना भेजने की तैयारी में है। उद्योगपति परिमल नाथवानी की निर्दलीय एंट्री ने सत्तारूढ़ 'इंडिया' गठबंधन की चिंता बढ़ा दी है।

झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है। उद्योगपति परिमल नाथवानी का निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरना और बीजेपी नेता गौरव वल्लभ की सक्रियता ने सत्तारूढ़ 'इंडिया' गठबंधन की बेचैनी बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अपने सभी विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें तेलंगाना ले जाने की योजना बना रही है।

विधायकों को तेलंगाना भेजने की तैयारी

क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं के बीच कांग्रेस अपने सभी 16 विधायकों को तेलंगाना रवाना करने की तैयारी में जुट गई है। सूत्रों का कहना है कि 18 जून को होने वाले मतदान तक पार्टी के विधायक तेलंगाना में ही रह सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक पार्टी की ओर से नहीं की गई है।

राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस किसी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी अपने सभी 16 विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही है और इसी क्रम में उन्हें तेलंगाना भेजा जा रहा है। राजनीतिक जानकार इसे संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंका से जोड़कर देख रहे हैं। कयास हैं कि सभी कांग्रेसी विधायक मतदान वाले दिन यानी 18 जून तक तेलंगाना के एक रिसॉर्ट में ठहरेंगे। बाड़ेबंदी की इस सुगबुगाहट से यह संकेत मिल रहा है कि विपक्षी खेमा क्रॉस वोटिंग की प्रबल आशंका से चिंतित है।

विधानसभा का संख्या बल और समीकरण

झारखंड विधानसभा में फिलहाल 'इंडिया' गठबंधन के पास कुल 56 सदस्यों का बड़ा बहुमत है। इस सत्तारूढ़ गठबंधन में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के चार और भाकपा (माले) लिबरेशन के दो सदस्य शामिल हैं।

दूसरी ओर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास केवल 24 विधायक हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी के 21 सदस्य तथा लोजपा (रामविलास), आजसू और जदयू के एक-एक विधायक हैं। इसके अलावा सदन में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का भी एक विधायक है। इस संख्या बल के अनुसार दोनों सीटें 'इंडिया' गठबंधन के खाते में जाती दिख रही हैं, लेकिन परिमल नाथवानी के लिए भाजपा समर्थित 9 विधायकों के साथ एनडीए के 12 विधायकों के प्रस्तावक बनने की खबरों ने कांग्रेस को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है।

गठबंधन की बैठक और एकजुटता का दावा

संभावित फूट की खबरों के बीच रविवार को रांची में 'इंडिया' गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं की एक अहम बैठक हुई। बैठक के बाद राज्यसभा सांसद सरफराज अहमद ने गठबंधन में किसी भी मतभेद से इनकार किया और दावा किया कि महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है तथा दोनों प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित की जाएगी। गठबंधन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि दोनों उम्मीदवार भारी मतों से चुनाव जीतेंगे।

कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव, मंत्री संजय यादव, मंत्री सुदिव्य सोनू, झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य और विनोद पांडे ने संयुक्त रूप से मीडिया को बताया कि गठबंधन के भीतर बेहतर समन्वय है और दोनों प्रत्याशी तय समय पर एकजुटता के साथ आगे बढ़ेंगे।

'हमारे पास 56 विधायक, क्रॉस वोटिंग नहीं'

कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने गठबंधन की एकता का दावा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी को एकजुट रहने का मूल मंत्र दिया है। उन्होंने कहा कि हमारे पास इतना संख्या बल है कि दोनों सीटें जीत ली जाएंगी—जीत के लिए 56 का आंकड़ा चाहिए और हमारे पास 56 विधायक हैं।

झामुमो और कांग्रेस के संबंधों पर उठे सवालों पर उन्होंने कहा कि थोड़ा-बहुत आपसी मतभेद होता रहता है, लेकिन सबका एक ही लक्ष्य है कि सांप्रदायिक ताकतों को कैसे रोका जाए। क्रॉस वोटिंग को लेकर उन्होंने दो टूक कहा कि पहले भले ही ऐसा हुआ हो, पर इस बार 0.1% भी ऐसी कोई आशंका नहीं है और सभी एकजुट हैं।

भाजपा पर निशाना साधते हुए प्रदीप यादव ने कहा कि किसी राजनीतिक दौरे की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन अगर भाजपा हाथ-पैर मारेगी तो घेराबंदी करनी होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा को उम्मीदवार उतारना ही नहीं चाहिए, क्योंकि उसके पास संख्या बल नहीं है।

आज होगा दोनों प्रत्याशियों का नामांकन

गठबंधन के फैसले के अनुसार 'इंडिया' गठबंधन के दोनों प्रत्याशियों का नामांकन आज होने जा रहा है। झामुमो की ओर से पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम पर्चा दाखिल करेंगे, जबकि कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी माने जाने वाले प्रणव झा चुनावी मैदान में उतर रहे हैं।

नेताओं के बयानों में भले ही एकजुटता दिख रही हो, लेकिन कांग्रेस आलाकमान को आशंका है कि नाथवानी की मजबूत पकड़ और चुनावी मैनेजमेंट के आगे उसके विधायकों का मन बदल सकता है। यही वजह है कि नामांकन प्रक्रिया पूरी होते ही कांग्रेस नेतृत्व विधायकों को चार्टर्ड प्लेन से तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद भेजने की तैयारी में है।

दूसरी सीट पर टिकी निगाहें

महागठबंधन के नेता दोनों उम्मीदवारों की जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन चुनावी गणित और संभावित क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं ने दूसरी सीट को दिलचस्प बना दिया है। यही कारण है कि सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटे हैं। अब सबकी निगाहें आज होने वाले नामांकन और उसके बाद की राजनीतिक हलचल पर टिकी हैं। मतदान 18 जून को होगा, जिसके बाद स्पष्ट होगा कि चुनावी रणनीतियों का कितना असर पड़ा और किस दल का गणित सबसे सटीक साबित हुआ।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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