MBA की पढ़ाई बीच में छोड़ी, आज शहद के कारोबार से कमा रहे हैं लाखों, पतंजलि और डाबर भी हैं ग्राहक झारखंड 2 महीने पहले 76
रांची के रहने वाले मोहम्मद सिराज ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मधुमक्खी पालन में अपनी पहचान बनाई है। आज उनके ब्रांड का सालाना टर्नओवर 15 लाख रुपये से अधिक है और वे बड़ी कंपनियों को शहद की सप्लाई कर रहे हैं।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले मोहम्मद सिराज की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो विपरीत हालात में भी हार नहीं मानते। कभी 20,000 रुपये की नौकरी की तलाश में भटकने वाले सिराज आज एक सफल उद्यमी हैं। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें अपनी MBA की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी। उस दौर में बीमारी और करियर को लेकर अनिश्चितता ने उन्हें हताश कर दिया था, लेकिन पिता के प्रोत्साहन ने उन्हें मधुमक्खी पालन के व्यवसाय की ओर प्रेरित किया।

बड़े ब्रांड्स हैं ग्राहक

सिराज वर्तमान में लगभग 2000 बक्सों के साथ मधुमक्खी पालन का काम कर रहे हैं। उनके व्यवसाय की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उत्पादित शहद का 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा सीधे पतंजलि और डाबर जैसी बड़ी कंपनियां थोक में खरीद लेती हैं। बाकी बचे हुए शहद को वे अपने ब्रांड छोटा नागपुर ज्वेल हनी के नाम से बेचते हैं। मांग इतनी अधिक है कि कई बार उनके अपने ब्रांड के लिए स्टॉक तक कम पड़ जाता है क्योंकि बड़ी कंपनियां पहले से ही भारी मात्रा में शहद की एडवांस बुकिंग कर लेती हैं।

सीजन के अनुसार बदलती है जगह

सिराज बताते हैं कि शुद्ध और विभिन्न प्रकार के शहद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वे अलग-अलग स्थानों की यात्रा करते हैं। उनके काम करने का तरीका कुछ इस प्रकार है:

  • लीची फ्लेवर के लिए वे मुजफ्फरपुर जाकर बक्से लगाते हैं।
  • करंज के शहद के लिए वे रांची के खूंटी के जंगलों का रुख करते हैं।
  • जामुन फ्लेवर के शहद के लिए उनकी टीम हजारीबाग और सिमडेगा जैसे क्षेत्रों में जाकर काम करती है।

सपनों से ऊपर टर्नओवर

एक समय था जब सिराज का लक्ष्य केवल 20,000 रुपये की मासिक नौकरी पाना था, ताकि घर का खर्च चल सके। आज वही सिराज अपने पैरों पर खड़े हैं और उनका सालाना टर्नओवर 15 लाख रुपये से अधिक पहुंच चुका है। अपनी मेहनत के दम पर वे न केवल खुद के बॉस बने हैं, बल्कि 20 अन्य लोगों को रोजगार देकर आत्मनिर्भर भी बना रहे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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