महाराष्ट्र की सियासत में क्या फिर बनेंगे फडणवीस और उद्धव? रामदास आठवले के बयान से मची हलचल महाराष्ट्र एक घंटा पहले 6
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर एक बड़ा दावा किया है, जिसमें उन्होंने देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे को फिर से एक साथ लाने की इच्छा जताई है।

देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे की नजदीकियों पर सियासी चर्चा

महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों खासी चर्चाओं में है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला दावा किया है। आठवले ने कहा है कि वह भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच की दूरियों को खत्म करने के लिए प्रयास कर सकते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य के राजनीतिक गलियारों में महायुति गठबंधन को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हाल ही में एक सार्वजनिक मंच पर देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को एक साथ देखा गया था, जिसने राजनीतिक विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया था।

राज ठाकरे का मंच और आठवले की उम्मीद

इस घटनाक्रम का जिक्र करते हुए रामदास आठवले ने कहा कि एक समय ऐसा था जब देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे का एक मंच पर नजर आना लगभग असंभव सा लगता था। हालांकि, राज ठाकरे के प्रयासों की वजह से यह संभव हो सका और वे कुछ समय के लिए साथ दिखाई दिए। आठवले ने मजाकिया लहजे में तंज कसते हुए कहा कि राज ठाकरे ने भले ही इन दोनों नेताओं को एक दिन के लिए साथ लाने का काम किया हो, लेकिन वह इन दोनों को भविष्य में स्थायी रूप से एक साथ लाने की दिशा में ठोस कोशिश कर सकते हैं। उनका मानना है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों में नेताओं का मिलना-जुलना सकारात्मक संकेत हो सकता है।

क्या वाकई साथ आएंगे पुराने सहयोगी?

जब रामदास आठवले से यह सवाल किया गया कि वह इन दो दिग्गजों को एक साथ लाने का काम आखिर कब शुरू करेंगे, तो उन्होंने इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। वे इस सवाल को टालते हुए नजर आए। महाराष्ट्र में हाल ही में हुए एमएलसी चुनावों के परिणामों के बाद से ही राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। इन नतीजों के बाद से ही महायुति के घटक दलों के बीच अनबन की खबरें भी लगातार सामने आ रही हैं। देवेंद्र फडणवीस ने भी उस साझा मंच पर अपनी उपस्थिति को लेकर एक चुटकी ली थी, जिसे अब आठवले के बयान के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।

चुनाव नतीजों और गठबंधन पर आठवले की राय

महाराष्ट्र और कर्नाटक के एमएलसी चुनाव परिणामों का विश्लेषण करते हुए आठवले ने कहा कि कुल 28 सीटों में से एनडीए को सबसे अधिक सीटों पर विजय प्राप्त हुई है। उन्होंने ईमानदारी से स्वीकार किया कि महाराष्ट्र में गठबंधन को कुछ नुकसान उठाना पड़ा है। कर्नाटक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां कांग्रेस की सरकार होने के बाद भी पार्टी को नुकसान झेलना पड़ा है और नागपुर की सीट पर ही जीत मिल सकी है। आठवले ने अपनी स्वीकारोक्ति में कहा कि महाराष्ट्र में एनडीए का लक्ष्य सभी 5 सीटों पर जीत दर्ज करना था, लेकिन परिणाम उम्मीद के अनुरूप नहीं रहे।

मतभेद सुलझाने पर जोर

एमएलसी चुनावों के नतीजों के बाद बीजेपी और शिवसेना के बीच तल्ख बयानबाजी सामने आई है। इस पर टिप्पणी करते हुए रामदास आठवले ने कहा कि राजनीति में आरोप और प्रत्यारोप का सिलसिला चलता रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महायुति और महाविकास अघाड़ी, दोनों ही गठबंधनों के बीच खींचतान स्वाभाविक है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि चुनाव में हुई हार और सीटों के नुकसान से उपजे मतभेदों को आपसी बातचीत के जरिए जल्द ही दूर कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि राजनीति में बातचीत से समाधान निकल ही आते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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