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47 मिनट पहले
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अयोध्या के ऐतिहासिक राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की चोरी से जुड़े मामले में एक बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की तह तक जाने के लिए एक नई विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया है। इस बात की आधिकारिक जानकारी उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को दी है। उन्होंने अदालत को बताया कि चढ़ावा चोरी के इस संवेदनशील मामले की गहनता से जांच करने के लिए चार सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया जा चुका है।
जांच टीम की कमान और सदस्यों की भूमिका
इस नई SIT का नेतृत्व आईजी किरण एस को सौंपा गया है। उनके मार्गदर्शन में यह टीम पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ेगी। इस टीम की संरचना को बेहद संतुलित और विशेषज्ञता पूर्ण बनाया गया है। इसमें पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों को भी जगह दी गई है। टीम के सदस्यों की सूची इस प्रकार है:
- जांच टीम के प्रमुख के रूप में आईजी किरण एस जिम्मेदारी संभालेंगे।
- उनके सहयोग के लिए पुलिस विभाग से दो अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं, जो DIG और SP रैंक के हैं।
- वित्तीय लेन-देन और चंदे के खातों की बारीकी से जांच करने के लिए एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) को भी इस विशेष जांच दल का हिस्सा बनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई सहमति, दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
उच्चतम न्यायालय में इस मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया कि इस नई SIT का गठन 25 जुलाई को ही कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया था कि चंदे और चढ़ावे की चोरी के इस गंभीर मामले में वित्तीय गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए एक फोरेंसिक ऑडिटर की मदद ली जानी चाहिए। सरकार की पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के इस सुझाव को स्वीकार कर लिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नई SIT को निर्देश दिया है कि वे अपनी जांच की प्रगति से जुड़ी यथास्थिति रिपोर्ट अगले दो सप्ताह के भीतर अदालत में दाखिल करें।
आखिर क्यों पड़ी नई जांच टीम की जरूरत?
इस मामले में इससे पहले 20 जुलाई को सुनवाई हुई थी। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने नई जांच टीम बनाने की जरूरत पर जोर दिया था। अदालत का मानना था कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक अलग और केंद्रित जांच दल का होना जरूरी है। इससे पहले की SIT में लखनऊ के कमिश्नर, वित्त विभाग के विशेष सचिव और लखनऊ के एक वरिष्ठ IPS अधिकारी शामिल थे।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पहले की स्थिति स्पष्ट करते हुए अदालत को बताया था कि पुरानी टीम केवल एक प्रारंभिक जांच कर रही थी, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल यह पता लगाना था कि क्या वास्तव में कोई गंभीर अपराध हुआ है। प्रारंभिक जांच में जब अपराध की पुष्टि हो गई, तो इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर अमल करते हुए अब एक पूर्णकालिक और विशेषज्ञ SIT का गठन किया गया है, जो इस पूरे मामले की गहनता से जांच करेगी।
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