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एक महीने पहले
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जांच की वर्तमान व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
अयोध्या में राम मंदिर को मिले दान में कथित गड़बड़ी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपनाई गई जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने यह रेखांकित किया कि मामले की निष्पक्षता और तार्किकता सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता हो सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ने सुझाव दिया कि यदि पूर्व में गठित SIT केवल प्रारंभिक जांच तक सीमित थी, तो अब एक नई SIT का गठन किया जाना चाहिए ताकि पूरे मामले की विस्तृत और गहन जांच की जा सके।
सॉलिसिटर जनरल ने क्या जानकारी दी
मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने सर्वोच्च न्यायालय को अवगत कराया कि पिछली SIT का मुख्य दायित्व केवल यह निर्धारित करना था कि क्या कथित दान घोटाले में कोई संज्ञेय अपराध घटित हुआ है या नहीं। उन्होंने बताया कि SIT ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह मामला प्राथमिकी यानी FIR दर्ज किए जाने योग्य है और इसके बाद कानून के अनुसार FIR दर्ज कर ली गई है।
नई SIT के गठन पर अदालत का रुख
अदालत के समक्ष जब यह तथ्य आया कि मौजूदा SIT खुद जांच की कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ा रही है, तो सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या जांच के लिए कोई अलग SIT बनाई गई है। इस पर नकारात्मक जवाब मिलने के बाद, कोर्ट ने तुरंत प्रभाव से नई SIT गठित करने का परामर्श दिया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मामले की अगली सुनवाई अब आगामी सोमवार को की जाएगी।
IPS अधिकारी के नेतृत्व में जांच का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने पुरानी SIT की संरचना पर चर्चा करते हुए कहा कि इसमें लखनऊ के कमिश्नर, वित्त विभाग के विशेष सचिव और लखनऊ के एक वरिष्ठ IPS अधिकारी शामिल थे। न्यायालय ने सलाह दी कि इसी वरिष्ठ IPS अधिकारी की अध्यक्षता में एक नई SIT का गठन किया जाए और संपूर्ण जांच का जिम्मा उन्हें सौंपा जाए ताकि जांच में कोई कमी न रहे।
राजनीतिकरण से बचने की चेतावनी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत इस पूरे मामले को लेकर अत्यंत सतर्क है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण किसी भी स्थिति में नहीं होना चाहिए। अदालत का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच सही दिशा में आगे बढ़े और मामले का तार्किक निष्कर्ष निकले। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में कोई औपचारिक या अंतिम आदेश पारित नहीं किया है और सॉलिसिटर जनरल से कहा है कि वे राज्य सरकार से निर्देश प्राप्त कर अगली सुनवाई में अवगत कराएं।
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