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एक घंटा पहले
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रक्षाबंधन और पंचक का दुर्लभ संयोग
भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का महापर्व रक्षाबंधन इस साल 28 अगस्त 2026 को मनाया जा रहा है। देश भर में इस त्योहार को लेकर उत्साह का माहौल है, लेकिन इस बार रक्षाबंधन के साथ एक विशेष ज्योतिषीय संयोग जुड़ा हुआ है। पंचांग की गणना के अनुसार, रक्षाबंधन से ठीक एक दिन पहले पंचक काल की शुरुआत हो रही है। इस वजह से रक्षाबंधन का पूरा त्योहार पंचक के साए में मनाया जाएगा। कई लोग इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं और उनके मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पंचक के प्रभाव में राखी बांधना शुभ होगा या नहीं।
ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि में पंचक
ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक को एक अशुभ समय माना जाता है जिसमें कुछ विशेष कार्यों को करने से परहेज किया जाता है। चूंकि रक्षाबंधन का पर्व पंचक के दौरान ही पड़ रहा है, इसलिए भाई-बहनों में संशय की स्थिति बनी हुई है। हरिद्वार के जाने-माने ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री का इस संदर्भ में कहना है कि हालांकि पंचांग के अनुसार पंचक का असर त्योहार के समय मौजूद रहेगा, लेकिन वैदिक शास्त्र में ऐसे उपाय बताए गए हैं जिनसे इन नकारात्मक प्रभावों को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
शिव मंत्र से दूर होगा पंचक का दोष
पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार, पंचक काल में किसी भी प्रकार के अनिष्ट या अशुभ प्रभावों से बचने के लिए भगवान शिव की शरण में जाना सबसे उत्तम और प्रभावी उपाय है। सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इस मास के अंतिम दिन पंचक के दौरान उनकी आराधना करने से विशेष फल प्राप्त होता है। पंडित शास्त्री ने बताया कि पंचक के दोष को खत्म करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना सबसे शक्तिशाली उपाय है।
घर के पूजा स्थल पर या भगवान शिव के किसी सिद्धपीठ मंदिर में बैठकर निम्नलिखित मंत्र का 108 बार श्रद्धापूर्वक जाप करने से पंचक का नकारात्मक प्रभाव नष्ट हो जाता है:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्, उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस कल्याणकारी मंत्र के जाप से सभी प्रकार के दोष दूर हो जाते हैं और व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
रक्षा सूत्र बांधने का सही तरीका
पंडित श्रीधर शास्त्री का मानना है कि जब बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें, तो उन्हें वैदिक मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए। शिव आराधना के बाद जब रक्षा सूत्र बांधा जाता है, तो उसका संपूर्ण फल प्राप्त होता है। हरिद्वार के विद्वानों का कहना है कि पूरी श्रद्धा और नियमानुसार किए गए इस उपाय के बाद भाई-बहन बेझिझक रक्षाबंधन का पर्व मना सकते हैं। इस शास्त्रीय उपाय के बाद पंचक का साया पूरी तरह खत्म हो जाता है और भाई-बहन के जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का वरदान बना रहता है।
पंचक को लेकर क्या सावधानी बरतें
ज्योतिषाचार्य ने स्पष्ट किया है कि पंचक के दौरान मुख्य रूप से बांस या बांस से बनी वस्तुओं के इस्तेमाल को लेकर वर्जनाएं होती हैं। हालांकि, रक्षाबंधन के दिन इसके प्रभाव को लेकर अधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि भगवान शिव की विशेष पूजा और मंत्रों के पाठ से यह समय पूरी तरह सुखद और मंगलमय हो जाता है। अतः सभी भाई-बहन बिना किसी संशय के शिव जी का स्मरण कर इस रक्षाबंधन के पावन पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाएं और अपने रिश्तों की डोर को और भी अधिक मजबूत बनाएं।
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