रजत शर्मा का ब्लॉग: झारखंड में सरकारी नौकरियों का बड़ा घोटाला और अन्य खबरें भारत 2 घंटे पहले 3
झारखंड की परीक्षाओं में सामने आए धांधली के मास्टरमाइंड अभय तिवारी का सच हैरान करने वाला है। वहीं, उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान हंगामे और तमिलनाडु में उदयनिधि स्टालिन की विवादित टिप्पणी ने राजनीति गरमा दी है।

झारखंड में सरकारी परीक्षाओं में धांधली का काला अध्याय

झारखंड में सरकारी नौकरी पाने के नाम पर जो धांधली हुई है, वह किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। जिस एजेंसी को पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था और जिसके मालिक को परीक्षाओं में हेरफेर के लिए गिरफ्तार किया गया, उसी को फिर से सरकारी भर्तियों का ठेका सौंप दिया गया। यह हैरान करने वाली बात है कि वर्ष 2014 के बाद हुई लगभग सभी परीक्षाओं पर सवाल उठे, लेकिन किसी ने इस कंपनी पर कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई।

इस पूरे घोटाले का केंद्र बिंदु अभय तिवारी नाम का एक शख्स है। यह नाम झारखंड के उन युवाओं की जुबान पर है जो पिछले 12 दिनों से सड़कों पर धरने पर बैठे हैं। इन प्रदर्शनकारी छात्रों के हाथों में अभय तिवारी की तस्वीरें हैं, जिनमें उसे भर्ती परीक्षाओं का मास्टरमाइंड करार दिया गया है। चौंकने वाली बात यह है कि अभय तिवारी के मार्केटिंग मैनेजर के रूप में काम करने के बावजूद, उसने बीते 13 वर्षों में 12 बार अलग-अलग सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षा दी और हर बार वह टॉपर सूची में शामिल रहा। वह कभी नौसेना का अफसर बना, तो कभी दारोगा, कॉन्स्टेबल, शिक्षक और यहाँ तक कि भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर का क्लर्क भी बन बैठा।

अभय तिवारी की चालाकी का स्तर यह था कि वह एक ही समय में दोहरी पहचान के साथ दो नौकरियां कर रहा था। गोड्डा में वह 'अभय तिवारी' के नाम से ब्लॉक सप्लाई अफसर था, जबकि उसी दौरान वह 'मनोज तिवारी' बनकर TDPL कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर सेवाएं दे रहा था। सीआईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि उसने अपने भाई, भाभी और साली को भी इसी तरह बैकडोर से नहीं, बल्कि फर्जीवाड़े के जरिए परीक्षाओं में पास कराकर सरकारी नौकरी दिलवाई।

छात्रों की मांग और सीआईडी की जांच

अभय तिवारी फिलहाल पुलिस की हिरासत में है और सीआईडी इस पूरे मामले की परतें खोल रही है। अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सीआईडी ने रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद समेत 18 जिलों में छापेमारी की है। इन छापों में ओएमआर शीट की कार्बन प्रतियां, एडमिट कार्ड और मार्कशीट्स बरामद हुई हैं।

अभय तिवारी के रिकॉर्ड को देखें तो उसने 2013 में भारतीय नौसेना की एसएसआर परीक्षा पास की, 2014 में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर और नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड की परीक्षाएं निकालीं। इसके बाद 2018 में सीआरपीएफ हेड कांस्टेबल और जेएसएससी पुलिस सब इंस्पेक्टर के पद पर भी उसका चयन हुआ। उसने जेएसएससी के पोस्ट ग्रेजुएट टीचर, जेपीएससी के एसीएफ, एफआरओ, एफएसओ और 11वीं-13वीं झारखंड सिविल सर्विस का प्रारंभिक चरण भी पहले प्रयास में उत्तीर्ण किया।

उसकी कमाई का गणित भी चौंकाने वाला था। जेपीएससी प्रीलिम्स पास कराने के लिए उसने पांच लाख रुपये का रेट तय किया था, जबकि मेन्स के लिए यह राशि 25 लाख रुपये थी। वह दस लाख रुपये एडवांस के तौर पर लेता था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सीआईडी जांच के आदेश जरूर दिए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र इस जांच पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। छात्रों का मानना है कि इस मामले को सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए। दिलचस्प यह है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर सक्रिय रहने वाली कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टियां रांची के छात्रों के इस आंदोलन से नदारद हैं, जो कई सवाल खड़े करता है।

कांवड़ यात्रा और बढ़ते विवाद

उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, फिर भी कई जगहों से अप्रिय घटनाएं सामने आ रही हैं। मेरठ से हरिद्वार तक कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा की जा रही है, लेकिन मेरठ में हुई झड़प ने शांति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो कांवड़ियों की बाइक के आपस में टकराने के बाद शुरू हुआ यह विवाद देखते ही देखते हिंसक हो गया। भीड़ ने पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया और उनकी वर्दी तक फाड़ दी। अफवाह यह फैली कि पुलिस कांवड़ खंडित करने वालों का बचाव कर रही है, जिसके बाद आक्रोशित कांवड़ियों ने कानून अपने हाथ में ले लिया।

सवाल यह उठता है कि क्या भगवान शिव की भक्ति और आस्था की इस यात्रा में हिंसा और क्रोध के लिए कोई जगह होनी चाहिए। ज्यादातर कांवड़िए श्रद्धा के साथ यात्रा पूरी करते हैं, लेकिन कुछ लोगों की करतूत से पूरी यात्रा की बदनामी होती है। कांवड़ियों के लिए सरकार हर संभव सुविधा दे रही है, ऐसे में उन्हें भी संयम बरतने की आवश्यकता है ताकि यात्रा गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

उदयनिधि स्टालिन की अशोभनीय टिप्पणी

तमिलनाडु में एक राजनीतिक रैली के दौरान उदयनिधि स्टालिन द्वारा की गई टिप्पणी ने राज्य में भारी हंगामा खड़ा कर दिया है। कावेरी जल विवाद को लेकर तंजावुर में हो रही सभा में उदयनिधि ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की मित्र और प्रसिद्ध अभिनेत्री तृषा को लेकर एक दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी की। इस बयान के बाद डीएमके कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया और हंसी ने विवाद को और बढ़ा दिया।

तृषा और उदयनिधि पूर्व सहकर्मी रहे हैं, लेकिन राजनीतिक नफरत के कारण स्तर इतना गिर गया कि ऐसी अभद्र बातें कही गईं। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने उदयनिधि के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुँचा। हालाँकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस गिरफ्तारी ने उदयनिधि को एक सहानुभूति का कार्ड खेलने का मौका दे दिया है। सरकार का यह कदम अंततः डीएमके के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में एक नया जोश आ गया है। इस पूरे प्रकरण में न तो बयान की आवश्यकता थी और न ही गिरफ्तारी की, लेकिन राजनीति ने इसे एक अनावश्यक मोड़ दे दिया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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