कोटा में राहुल गांधी ने छात्रों से किया संवाद, बोले- शिक्षा व्यवस्था हमारे युवाओं को सिर्फ 5 ही रास्ते क्यों दिखाती है? राजस्थान एक महीने पहले 49
कोटा पहुंचे कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों से बातचीत की और देश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने छात्रों पर बढ़ते दबाव और खुदकुशी के मुद्दे पर भी चिंता जताई।

कोटा: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कोटा में छात्रों से रूबरू होते हुए कहा कि यहां आकर और उनके सामने खड़े होकर उन्हें बेहद खुशी और गर्व का अनुभव हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं को केंद्र में रखकर की गई बातचीत है। राहुल गांधी ने कहा कि यह शाम पूरी तरह छात्रों और उन कठिनाइयों को समर्पित है, जिनसे वे रोजाना जूझते हैं।

यात्रा के दौरान मिले सिर्फ पांच जवाब

राहुल गांधी ने अपनी पदयात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ समय पहले उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल सफर तय किया था। इस दौरान उनकी मुलाकात लाखों युवाओं से हुई और हर किसी से उनका एक ही सवाल रहता था कि वे जीवन में क्या बनना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि जवाब में उन्हें केवल पांच ही विकल्प सुनने को मिले- इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, IAS और फौजी। इसी से उनके मन में यह सवाल खड़ा हुआ कि जब देश के युवा ही उसका भविष्य हैं, तो हमारी शिक्षा प्रणाली उन्हें हमेशा सिर्फ पांच ही रास्ते क्यों दिखाती है।

छात्रों की खुदकुशी पर जताई चिंता

राहुल गांधी ने कहा कि यात्रा के बाद जब उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर गहराई से सोचना शुरू किया, तो उनके मन में कई सवाल उठे- आखिर सार्वजनिक क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था क्यों कमजोर पड़ गई और निजी क्षेत्र की पढ़ाई इतनी महंगी क्यों है। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था बच्चों पर दबाव डालती है, उन्हें तनाव देती है तथा उन्हें दबाकर और कुचलकर रख देती है, जो देश के लिए ठीक नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि वे चाहते हैं कि सब मिलकर ऐसा माहौल बनाएं, जिससे इतनी बड़ी आबादी वाले इस देश में किसी भी छात्र के मन में कभी आत्महत्या का विचार न आए। राहुल गांधी ने दोहराया कि यह बैठक इसी उद्देश्य से रखी गई है और इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह चर्चा इस बात पर है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में कहां खामियां हैं और उनमें किस तरह के सुधार की जरूरत है।

परीक्षा के दबाव का गंभीर मुद्दा

उल्लेखनीय है कि नीट की तैयारी के दौरान कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां छात्रों ने दबाव में आकर अपनी जान दे दी। यह वाकई चिंता का विषय है, जिस पर खुलकर बात होना जरूरी है। छात्रों को यह समझाना आवश्यक है कि किसी परीक्षा में असफल होने या वह देर से होने पर अपनी जान देना कोई समाधान नहीं है। हर समस्या का डटकर सामना करना चाहिए और आगे बढ़ते रहना चाहिए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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