रायपुर स्काईवॉक की सीढ़ियों से दिखता केंद्रीय जेल का भीतरी हिस्सा, कांग्रेस ने सुरक्षा पर खड़े किए सवाल छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 2
रायपुर स्काईवॉक की निर्माणाधीन सीढ़ियों और ऊंचे प्लेटफॉर्म से केंद्रीय जेल परिसर का अंदरूनी हिस्सा दिखने का मुद्दा उठा है। कांग्रेस ने इसे जेल की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए तत्काल निरीक्षण और सुधार की मांग की है।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का स्काईवॉक प्रोजेक्ट एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यह वही परियोजना है जो बीते वर्षों से लगातार बहस और विवादों के केंद्र में रही है। हालांकि इस बार विवाद की वजह निर्माण कार्य की गुणवत्ता या उसकी उपयोगिता नहीं, बल्कि रायपुर केंद्रीय जेल की सुरक्षा व्यवस्था है।

क्या है पूरा मामला

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि स्काईवॉक के निर्माण के दौरान बनाई जा रही सीढ़ियों और ऊंचे प्लेटफॉर्म से केंद्रीय जेल परिसर का अंदरूनी हिस्सा बेहद आसानी से देखा जा सकता है। पार्टी का कहना है कि इस वजह से जेल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार शहर के ठीक बीचों-बीच स्थित यह केंद्रीय जेल एक संवेदनशील क्षेत्र है, जहां कई महत्वपूर्ण और गंभीर अपराधों से जुड़े कैदी रखे जाते हैं। उनका तर्क है कि अगर स्काईवॉक पर चढ़कर कोई भी व्यक्ति जेल के भीतर की गतिविधियों और संरचना को देख सकता है, तो यह सुरक्षा की दृष्टि से बेहद चिंताजनक स्थिति है।

विपक्ष का आरोप

विपक्ष का कहना है कि परियोजना के डिजाइन और निर्माण के दौरान इस अहम पहलू पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। दरअसल रायपुर स्काईवॉक को शहर में पैदल यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के मकसद से तैयार किया जा रहा है। लेकिन निर्माणाधीन सीढ़ियों से जेल परिसर का दृश्य दिखाई देने की बात सामने आने के बाद इस पूरी परियोजना को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

कांग्रेस ने मांग की है कि जेल प्रशासन और संबंधित विभाग बिना देरी किए इस मामले का निरीक्षण करें तथा सुरक्षा से जुड़ी संभावित खामियों को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।

जानकारों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी केंद्रीय जेल की सुरक्षा बहुस्तरीय होती है। इसमें बाहरी और आंतरिक सुरक्षा इंतजामों के साथ-साथ गोपनीयता की भी अहम भूमिका रहती है। उनका कहना है कि अगर किसी सार्वजनिक स्थान से जेल के भीतर का हिस्सा नजर आता है, तो यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। ऐसे में परियोजना के मौजूदा ढांचे की समीक्षा किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

आगे क्या होगा

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्काईवॉक की डिजाइन में बदलाव किया जाएगा, या फिर सुरक्षा कारणों से कुछ हिस्सों में संशोधन अथवा तोड़फोड़ करनी पड़ेगी। फिलहाल इस मुद्दे पर जेल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन चुका है।

रायपुर केंद्रीय जेल की सुरक्षा को लेकर उठे इन सवालों के बीच अब सभी की निगाहें प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि सुरक्षा संबंधी चिंताओं को सही पाया जाता है, तो स्काईवॉक परियोजना में बदलाव की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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