छत्तीसगढ़
एक दिन पहले
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ट्रेनों की बढ़ती लेटलतीफी और यात्रियों का दर्द
रायपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए ट्रेनों का समय पर न पहुंचना एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। हालात ये हैं कि ट्रेनें अपने शुरुआती स्टेशन से मामूली देरी के साथ रवाना होती हैं, लेकिन रायपुर तक पहुंचते-पहुंचते उनकी देरी का आंकड़ा कई घंटों तक पहुंच जाता है। इस कारण यात्रियों को स्टेशन पर लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है और उनकी यात्रा की सारी योजनाएं धरी की धरी रह जाती हैं।
अमरकंटक और सारनाथ एक्सप्रेस का हाल
ट्रेनों की देरी का सबसे ताजा उदाहरण अमरकंटक एक्सप्रेस है। यह ट्रेन भोपाल से महज 3 मिनट की देरी से रवाना हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे यह अपने गंतव्य की ओर बढ़ी, देरी बढ़ती गई। जबलपुर आते-आते यह ट्रेन करीब 3 घंटे पिछड़ गई। अनूपपुर तक पहुंचते-पहुंचते इसकी देरी 3 घंटे हो गई और अंत में यह रायपुर रेलवे स्टेशन पर सुबह 6:55 के बजाय सुबह 11:13 बजे पहुंची। इस तरह रायपुर तक आते-आते यह ट्रेन कुल 4 घंटे 18 मिनट लेट हो गई।
कुछ ऐसा ही हाल सारनाथ एक्सप्रेस का भी देखने को मिला। अनूपपुर में यह ट्रेन 1 घंटे 7 मिनट की देरी से चल रही थी, लेकिन रायपुर तक का सफर पूरा करते-करते इसकी देरी बढ़कर 2 घंटे 50 मिनट हो गई। करगी रोड और उसलापुर के बीच तो इस ट्रेन को काफी देर तक खड़ा रहना पड़ा, जिससे इसकी लेटलतीफी और अधिक बढ़ गई।
क्षमता से 40% अधिक ट्रेनों का दबाव
रायपुर मंडल में ट्रेनों के इस तरह पिछड़ने के पीछे मुख्य कारण क्षमता से अधिक संचालन है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, रायपुर मंडल में ट्रेनों के संचालन की अधिकतम क्षमता लगभग 100 ट्रेनें है, लेकिन वर्तमान में यहां 140 से ज्यादा ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि निर्धारित क्षमता से 40 प्रतिशत अधिक ट्रेनें पटरियों पर दौड़ रही हैं।
इसके अलावा, यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का भारी दबाव भी एक प्रमुख कारण है। चूंकि मालगाड़ियों को पहली प्राथमिकता (प्रायोरिटी) दी जाती है, इसलिए यात्री ट्रेनों को अक्सर रास्ते में रोकना पड़ता है। एक स्टेशन पर हुई मामूली देरी का असर आगे के सभी स्टेशनों पर पड़ता है, जिससे ट्रेन अंत तक घंटों पीछे हो जाती है।
वेटिंग हॉल में बढ़ी यात्रियों की परेशानी
बीते रविवार की शाम रायपुर स्टेशन के एसी वेटिंग हॉल में यात्रियों की भारी भीड़ देखी गई। लोग अपनी ट्रेनों के स्टेटस को बार-बार मोबाइल पर देख रहे थे, लेकिन राहत नहीं मिल रही थी। कोरबा-यशवंतपुर एक्सप्रेस के यात्री सुरेंद्र बाबू ने बताया कि उन्हें सुबह 11:40 बजे रायपुर पहुंचना था, लेकिन उनकी ट्रेन करीब 8 घंटे की देरी से रात 8:23 बजे स्टेशन पहुंची। वहीं, अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे यात्री सीजो ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि ट्रेन के घंटों लेट होने के कारण उनकी महत्वपूर्ण बैठक (मीटिंग) छूट गई।
रायपुर मंडल के सीनियर डीसीएम सुष्कर विपुल बिलासराव का इस विषय पर कहना है कि कई ट्रेनें अन्य मंडलों से ही देरी से आती हैं। उन्होंने दावा किया कि मंडल का निरंतर प्रयास रहता है कि ट्रेनों को जल्द से जल्द संचालित कर समय पर रवाना किया जाए। आंकड़ों पर नजर डालें तो टाटानगर-इतवारी एक्सप्रेस 8 घंटे 20 मिनट, अमरकंटक और पोरबंदर सुपरफास्ट करीब 3 घंटे, जबकि हावड़ा-मुंबई, पुरी-दुर्ग और सूरत एक्सप्रेस करीब 2 घंटे की देरी से रायपुर पहुंचीं।
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