महादेव ऐप केस: छत्तीसगढ़ में ED का बड़ा प्रहार, विकास गर्ग की 940 करोड़ की संपत्ति जब्त छत्तीसगढ़ एक महीने पहले 67
प्रवर्तन निदेशालय ने महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबारी विकास गर्ग और उनके परिवार की 940 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क कर ली है। जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट के जरिए हर महीने 450 करोड़ रुपये का काला धन कमाया जा रहा था।

रायपुर में ईडी की बड़ी कार्रवाई

छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टेबाजी के महादेव ऐप और स्काईएक्सचेंज मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। रायपुर स्थित ईडी के जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के प्रावधानों का उपयोग करते हुए कुल 940.77 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने का आदेश दिया है। इस बड़ी कार्रवाई का मुख्य केंद्र कारोबारी विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्य और उनके नियंत्रण में चल रही विभिन्न संस्थाएं रही हैं।

क्या-क्या कुर्क हुआ?

ईडी की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में भारी निवेश शामिल है। इसमें कीमती आवासीय मकान, जमीन के कई बड़े टुकड़े, शेयर बाजार में लगाए गए इक्विटी शेयर और अन्य प्रकार की सिक्योरिटीज शामिल हैं। जांच एजेंसियों ने पाया है कि ये सभी संपत्तियां महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज के मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के माध्यम से अवैध तरीके से अर्जित की गई थीं।

हर महीने 450 करोड़ का काला कारोबार

इस पूरे मामले की जांच के दौरान बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सट्टेबाजी सिंडिकेट प्रति माह 450 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई कर रहा था। यह पूरा नेटवर्क देश के बाहर से संचालित किया जा रहा था और इसका स्वरूप फ्रेंचाइजी आधारित पैनल नेटवर्क जैसा था। ईडी ने इस मामले की गहन जांच छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी, जिसे बाद में आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में दर्ज विभिन्न शिकायतों के साथ जोड़कर आगे बढ़ाया गया।

शेल कंपनियों का मायाजाल

ईडी ने अपनी जांच में यह पाया कि सट्टेबाजी के माध्यम से जमा किए गए काले धन को वैध बनाने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची गई थी। इसके लिए कई शेल कंपनियों और अकॉमोडेशन एंट्री का सहारा लिया गया। अवैध कमाई को जटिल वित्तीय लेन-देन के जरिए बार-बार घुमाया गया ताकि वह पूरी तरह कानूनी धन दिखाई दे। ईडी का आरोप है कि करीब 940.77 करोड़ रुपये की रकम को विकास गर्ग की कंपनियों में स्थानांतरित किया गया और बाद में इसी पैसे से शेयर और अन्य संपत्तियां खरीदी गईं।

अब तक 3800 करोड़ की जब्ती

महादेव सट्टा ऐप केस में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई यह अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाहियों में से एक है। इस ताजा कुर्की को मिलाकर, एजेंसी ने इस मामले में अब तक कुल 3800 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को अटैच, जब्त या फ्रीज कर दिया है। इस कार्रवाई से पहले ईडी ने लगभग 2,825 करोड़ रुपये की संपत्तियां सीज की थीं। इस पूरे केस में अभी तक एजेंसी ने सात प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए हैं। रायपुर में स्थित विशेष PMLA अदालत में इस मामले से जुड़ी कई शिकायतें दायर की जा चुकी हैं, जिन पर अदालत ने संज्ञान लिया है। फिलहाल, ईडी इस पूरे नेटवर्क के पीछे के मास्टरमाइंड और इसमें शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका की बारीकी से जांच कर रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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