पूर्णिया के प्रमुख चौराहों पर 15 दिन से ठप ट्रैफिक सिग्नल, खतरों के बीच गुजर रहे राहगीर बिहार एक महीने पहले 17
पूर्णिया के आर एन साह चौक और नेवालाल चौक पर पिछले 15 दिनों से ट्रैफिक सिग्नल खराब हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। नगर आयुक्त कुमार मंगलम ने जल्द मरम्मत का भरोसा दिलाया है।

पूर्णिया नगर निगम लंबे समय से नगर निगम क्षेत्र को आधुनिक स्वरूप देने की कोशिशों में जुटा है। इसी क्रम में बीते वर्ष शहरवासियों को बेहतर यातायात सुविधा देने के मकसद से अलग-अलग प्रमुख चौक-चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे, ताकि लोग नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित आवाजाही कर सकें। लेकिन अब यही सिग्नल शहरवासियों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं।

बढ़ गई है दुर्घटना की आशंका

शहर के अहम चौराहों में गिने जाने वाले आर एन साह चौक और नेवालाल चौक पर पिछले 15 दिनों से भी अधिक समय से ट्रैफिक सिग्नल खराब पड़े हैं। ऐसे में लोग नियमों का पालन तो करना चाहते हैं, मगर सिग्नल बंद रहने के कारण बिना किसी संकेत के ही सड़क पार करने को मजबूर हैं। इससे हादसों की आशंका काफी बढ़ गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते सिग्नल की मरम्मत न होने से आवाजाही में दिक्कतें आ रही हैं। कई राहगीरों ने बताया कि पहले लोग सिग्नल के अनुसार चलने के आदी हो चुके थे, लेकिन अब सिग्नल बंद रहने के कारण लोग ग्रीन लाइट का इंतजार करते रहते हैं और अंततः मजबूरी में जोखिम उठाकर सड़क पार करते हैं।

नगर आयुक्त ने दिया जल्द सुधार का भरोसा

इस बारे में जब स्थानीय लोगों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ट्रैफिक सिग्नल लगने से उन्हें काफी सुविधा मिली थी, लेकिन अब खराब हो जाने के कारण वे नियमों की अनदेखी कर सफर करने को विवश हैं।

वहीं, नगर आयुक्त कुमार मंगलम ने बताया कि लोगों की सुरक्षित यात्रा और यातायात नियमों के पालन को ध्यान में रखते हुए शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे। उन्होंने बताया कि मरम्मत कार्य और संबंधित कंपनी का अनुबंध समाप्त हो जाने के कारण सिग्नल कई दिनों से बंद पड़े हैं।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही सिग्नल की मरम्मत कराकर उन्हें दोबारा चालू कराया जाएगा और इसके लिए संबंधित कंपनी को आवश्यक निर्देश भी दे दिए गए हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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